GST Council Meeting: करीब एक साल के अंतराल के बाद GST काउंसिल की बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में होगी. इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी. बैठक से एक दिन पहले यानी 11 सितंबर को अधिकारियों की बैठक होगी. ऑफिशियल मेमोरेंडम (आधिकारिक ज्ञापन) के मुताबिक, इसमें GST से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की तैयारी की जाएगी.
GST काउंसिल आम तौर पर हर तिमाही में बैठक करती है, ऐसे में करीब एक साल बाद होने वाली यह बैठक कारोबारियों और उद्योग जगत के लिए अहम मानी जा रही है. पिछली बैठक में GST 2.0 के तहत टैक्स रेट में बदलाव और प्रक्रियाओं को आसान बनाने से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी.
इस बार बैठक में किन मुद्दों पर नजर रहेगी?
अभी बैठक का पूरा एजेंडा तय नहीं हुआ है. हालांकि, पिछली बैठक में जिन सुधारों और नियमों पर चर्चा हुई थी, उन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है.
खास तौर पर इन मुद्दों पर नजर रहेगी:
- कारोबारियों के लिए GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान करना.
- GST ऑडिट से जुड़े नियमों में राहत और सुधार.
- कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर ITC से जुड़े मुद्दे.
- GST से जुड़े मामलों की अपील सुनने वाली व्यवस्था की समीक्षा.
- पिछले साल टैक्स रेट में बदलाव के बाद राज्यों और केंद्र की कमाई की स्थिति का जायजा.
क्या GST रेट में फिर बदलाव होगा?
पिछले साल रेट में बदलाव के बाद अब राज्यों और केंद्र की कमाई पर भी नजर रखी जाएगी. इसके साथ ही उद्योग के कुछ हिस्सों की ओर से अपने सामान और सेवाओं पर GST रेट की समीक्षा की मांग भी उठती रही है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि 12 सितंबर की बैठक में इन मांगों पर तुरंत कोई फैसला होगा या नहीं. बैठक का अंतिम एजेंडा अभी तय होना बाकी है. इसलिए फिलहाल किसी खास वस्तु या सेवा पर GST कम होने की उम्मीद को पक्का नहीं माना जा सकता.
ITC नियमों में बदलाव क्यों जरूरी बताया जा रहा है?
GST काउंसिल की बैठक से पहले कारोबारियों के लिए ITC यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट का मुद्दा खासा अहम है. ग्रांट थोर्नटन भारत के पार्टनर और टैक्स विवाद प्रबंधन प्रमुख मनोज मिश्रा के मुताबिक, ITC से जुड़े उन नियमों की समीक्षा होनी चाहिए जिन पर सबसे ज्यादा विवाद और मुकदमेबाजी होती है.
मौजूदा व्यवस्था में किसी कारोबारी के ITC के अधिकार को इस बात से जोड़ा जाता है कि उसके सप्लायर ने टैक्स सरकार के खाते में जमा किया है या नहीं. समस्या यह है कि सामान खरीदने वाला कारोबारी अपने सप्लायर के टैक्स जमा करने की प्रक्रिया को पूरी तरह नियंत्रित या निगरानी नहीं कर सकता. इसी वजह से ITC से जुड़े विवाद कम करने के लिए नियमों को ज्यादा व्यावहारिक बनाने की मांग है.
सुप्रीम कोर्ट के गेम्सक्राफ्ट मामले पर भी नजर
GST से जुड़ी मुकदमेबाजी कम करना भी इस बैठक की अहम उम्मीदों में शामिल है. मनोज मिश्रा ने कहा कि वास्तविक और नियमों की व्याख्या से जुड़े विवादों को कम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के गेम्सक्राफ्ट मामले के फैसले पर भी नजर रहेगी. यानी 12 सितंबर की बैठक सिर्फ टैक्स रेट को लेकर ही नहीं, बल्कि कारोबारियों के लिए GST की प्रक्रिया और विवादों को आसान बनाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है.
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