Delhi High Court Decision: अदालत ने धानुका ट्रेडमार्क के अनधिकृत इस्तेमाल पर लगाई रोक, उत्पादन-बिक्री बंद

Delhi High Court Decision: दिल्ली हाई कोर्ट ने धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के ट्रेडमार्क "धानुका" के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि प्रतिवादी कंपनी ने ब्रांड की साख का गलत लाभ उठाने और बाजार में भ्रम फैलाने की कोशिश की. आदेश के तहत 29 जनवरी तक प्रतिवादियों को उत्पादन, बिक्री और विज्ञापन पूरी तरह से रोकने का निर्देश दिया गया है. यह प्रतिबंध ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी लागू होगा.

Delhi High Court Decision: दिल्ली हाईकोर्ट ने कृषि रसायन कंपनी धानुका एग्रीटेक लिमिटेड को राहत देते हुए उसके ट्रेडमार्क ‘धानुका’ के अनधिकृत इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति तेजस करिया ने एग्रीम होलसेल प्राइवेट लिमिटेड और अन्य प्रतिवादियों को 29 जनवरी तक ‘धानुका’ नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया. धानुका एग्रीटेक ने याचिका में आरोप लगाया था कि प्रतिवादी कंपनी उसके ट्रेडमार्क का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी, अनुचित प्रतिस्पर्धा और ब्रांड छवि को नुकसान पहुंचा रही है.

बाजार में पहचान और भरोसे की बात

न्यायाधीश तेजस करिया ने माना कि धानुका एग्रीटेक लंबे समय से इस ट्रेडमार्क का इस्तेमाल कर रही है और इस नाम से उसने बाजार में अच्छी साख और भरोसा अर्जित की है. अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों की ओर से ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करना प्रथम दृष्टया बेईमानी है और यह कंपनी की प्रतिष्ठा का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास है. अदालत के आदेश के मुताबिक, यह प्रतिबंध न केवल ऑफलाइन बल्कि इंटरनेट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लागू रहेगा.

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29 जनवरी तक धानुका शब्द के इस्तेमाल पर रोक

इसके साथ ही, अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 29 जनवरी तय की है. तब तक यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा और प्रतिवादियों को किसी भी तरह से “धानुका” नाम का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी.

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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