Iran-Israel War: मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेतों ने इस आग में घी डालने का काम किया है. भारत के लिए यह स्थिति कूटनीतिक और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर काफी अहम है. आइए समझते हैं कि इस युद्ध का भारत के व्यापार और आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है.
ईरान संकट से भारत को कितना खतरा?
भारत और ईरान के बीच व्यापारिक रिश्ते पिछले कुछ सालों में काफी बदल गए हैं. पहले भारत ईरान से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अब यह बहुत कम हो गया है. पिछले वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार सिमटकर महज 168 करोड़ डॉलर के आसपास रह गया है, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का एक छोटा सा हिस्सा (0.01%) है.
भारत ईरान को मुख्य रूप से बासमती चावल, चाय, चीनी और दवाइयां जैसी चीजें भेजता है, जबकि वहां से सेब, पिस्ता और खजूर मंगवाए जाते हैं. चूंकि यह कारोबार बहुत बड़ा नहीं है, इसलिए ईरान के साथ व्यापार रुकने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा सीधा संकट आने के आसार कम हैं.
इजरायल के साथ बढ़ता रक्षा और तकनीक का कारोबार
ईरान के मुकाबले इजरायल के साथ भारत के व्यापारिक समीकरण थोड़े अलग और ज्यादा संवेदनशील हैं. पिछले एक दशक में भारत और इजरायल के बीच डिफेंस (रक्षा) और हाई-टेक उपकरणों का लेनदेन काफी बढ़ा है. भारत इजरायल से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विमानों के पुर्जे आयात करता है.
आंकड़ों के मुताबिक, इजरायल से हथियारों की खरीदारी में कई गुना की बढ़ोतरी हुई है. अगर यह जंग लंबी खिंचती है, तो भारत को मिलने वाली डिफेंस सप्लाई और तकनीकी सहयोग पर असर पड़ सकता है, जो भारत की सुरक्षा रणनीतियों के लिहाज से चिंता का विषय हो सकता है.
हवाई मार्ग बंद होने से एक्सपोटर्स की बढ़ी चिंता
जंग के कारण कई अहम हवाई रास्तों को बंद या डायवर्ट कर दिया गया है. इसका सीधा असर एयर कार्गो (Air Cargo) पर पड़ रहा है. ताजी सब्जियां और फल एयर कार्गो के जरिए भेजे जाते हैं ताकि वे जल्दी खराब न हों. फ्लाइट्स कैंसिल होने या रास्ता लंबा होने से ये उत्पाद समय पर नहीं पहुंच पाएंगे. डिलीवरी में देरी का मतलब है माल का सड़ना और बीमा लागत का बढ़ना. इससे भारतीय निर्यातकों को करोड़ों का घाटा हो सकता है, जिसका सीधा असर देश के किसानों की आय पर पड़ेगा.
आम आदमी पर क्या होगा इसका असर?
भले ही सीधा व्यापार कम हो, लेकिन इस युद्ध का सबसे बड़ा असर सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर पड़ेगा. भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते से मंगवाता है. अगर युद्ध के कारण यह समुद्री रास्ता बंद होता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होगी जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. इसके अलावा, लाल सागर (Red Sea) के रास्ते में तनाव बढ़ने से जहाजों का किराया और बीमा महंगा हो जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि विदेशों से आने वाली हर चीज महंगी हो सकती है और भारत से बाहर सामान भेजना भी महंगा पड़ेगा.
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