फ्लैट पैनल डिस्प्ले पर कस्टम ड्यूटी बढ़ी, भारत में मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बड़ा फायदा

Make in India Electronics: केंद्र सरकार ने फ्लैट पैनल डिस्प्ले पर कस्टम ड्यूटी 10% से बढ़ाकर 20% की है, जबकि ओपन सेल पार्ट्स पर ड्यूटी घटाई गई है. इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी.

Make in India Electronics: भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. वित्त मंत्रालय ने इंटरएक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले (IFPD) पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है. इसके साथ ही ओपन सेल और जरूरी कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है. सरकार का कहना है कि इस फैसले से देश में इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्माण बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी. अब तक की व्यवस्था में यह देखा जा रहा था कि तैयार डिस्प्ले को आयात करना सस्ता पड़ता था, जबकि उनके पार्ट्स मंगाकर भारत में बनाना महंगा होता था. इसे इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर कहा जाता है. इसी वजह से कई कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग से बच रही थीं. सरकार ने इस खामी को दूर करने के लिए तैयार डिस्प्ले पर टैक्स बढ़ाया और पार्ट्स पर टैक्स घटाया है.

ओपन सेल मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा सीधा फायदा

वित्त मंत्रालय ने LCD और LED टीवी में इस्तेमाल होने वाले ओपन सेल के पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है. इससे पहले 2023-24 के बजट में इन पार्ट्स पर BCD को 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत किया गया था. अब इसे पूरी तरह माफ कर दिया गया है, जिससे भारत में टीवी और डिस्प्ले पैनल बनाने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी. वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह फैसला ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप है और इसका मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है. सरकार चाहती है कि कंपनियां रेडीमेड प्रोडक्ट मंगाने के बजाय भारत में ही उत्पादन करें, जिससे देश में निवेश और रोजगार दोनों बढ़ें.

स्मार्टफोन सेक्टर जैसा मॉडल अपनाने की तैयारी

सरकार इस नीति को स्मार्टफोन सेक्टर की तर्ज पर लागू कर रही है. फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम के जरिए भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है. अब इसी तरह डिस्प्ले और टीवी सेक्टर में भी स्थानीय उत्पादन को बढ़ाने की योजना है. शुरुआती दौर में इंपोर्ट किए जाने वाले हाई-एंड डिस्प्ले और इंटरएक्टिव पैनल थोड़े महंगे हो सकते हैं. हालांकि, लंबे समय में जब भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, तो LCD और LED टीवी समेत कई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में स्थिरता या कमी देखने को मिल सकती है.

कंपनियों पर बढ़ेगा लोकलाइजेशन का दबाव

इस फैसले के बाद देशी और विदेशी कंपनियों के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग करना ज्यादा फायदेमंद हो जाएगा. तैयार डिस्प्ले आयात करने पर अब 20 प्रतिशत तक कस्टम ड्यूटी देनी होगी, जिससे कंपनियां अपने सप्लाई चेन को भारत में शिफ्ट करने पर मजबूर होंगी. सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य सिर्फ घरेलू मांग को पूरा करना नहीं है, बल्कि भारत को LCD और LED डिस्प्ले का बड़ा एक्सपोर्टर बनाना भी है. अगर यह नीति सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत एक मजबूत और आत्मनिर्भर डिस्प्ले इकोसिस्टम के रूप में उभर सकता है.

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Published by: Abhishek pandey

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