Budget 2026: सूर्यदेव जैसा कल्याणकारी होगा बजट या आम आदमी की उम्मीदों पर लगेगा ग्रहण, पहली बार रविवार को पेश होगा बजट

Budget 2026: इस साल के बजट को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहली बार रविवार को और संसद में लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी. आम आदमी को इस बजट से आयकर राहत, रोजगार सृजन, एमएसएमई को मजबूती, बैंकिंग सेक्टर सुधार, बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा और एआई में निवेश की उम्मीद है. क्या यह बजट सूर्यदेव जैसा कल्याणकारी होगा या उम्मीदों पर पानी फिरेगा?

By KumarVishwat Sen | January 12, 2026 7:36 PM

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को संसद के निचली सदन लोकसभा में लगातार नौवीं दफा बजट पेश करके इतिहास रचेंगी. लेकिन, खास बात यह है कि जिस एक फरवरी 2026 को वह संसद में बजट पेश करेंगी, उस तारीख को दिन रविवार पड़ता है. यह भी अपने आप में एक इतिहास ही होगा कि संसद में पहली दफा रविवार को आम बजट पेश किया जाएगा. अब चूंकि, रविवार को संसद में बजट पेश होगा, तो लोगों के बीच सवाल यह भी पैदा हो रहे हैं कि इस साल का केंद्रीय बजट सूर्यदेव की तरह कल्याणकारी होगा या आम आदमी की उम्मीदों पर पानी फिरेगा. इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि पिछले साल 2025 में एक फरवरी शनिवार को पड़ा था और सरकार ने आम आदमी के लिए अपना पूरा पिटारा खोल दिया था.

मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड के करीब पहुंचेंगी सीतारमण

एक फरवरी को संसद में लगातार नौवीं बार बजट पेश करके निर्मला सीतारमण पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएंगी. मोरारजी देसाई के नाम लगातार 10 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है. उन्होंने 1959 से 1964 तक वित्त मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल में कुल 6 बजट और 1967 से 1969 के बीच 4 बजट पेश किए थे. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में क्रमशः नौ और आठ बार बजट पेश किए थे. जब 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार बड़ी जीत हासिल की, तो उन्हें भारत की पहली महिला वित्त मंत्री बनाया गया. 2024 में जब मोदी तीसरी बार सत्ता में आए, तो निर्मला सीतारमण ने अपना वित्त मंत्रालय का पद बनाए रखा.

2017 में बदली गई बजट की तारीख

सरकार ने वर्ष 2017 में बजट की तारीख बदलकर एक फरवरी कर दिया, ताकि वह मार्च के आखिर तक पार्लियामेंट से मंज़ूरी की प्रक्रिया पूरी कर सके और 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत से ही बजट लागू किया जा सके. 28 फरवरी को बजट पेश करने का मतलब था कि पार्लियामेंट से मंजूरी की प्रक्रिया में 2-3 महीने लगने के बाद इसे मई-जून से पहले लागू नहीं किया जा सकता था.

आम आदमी की सरकार से क्या हैं उम्मीदें

  • सरकार ने पिछले साल 12 लाख रुपये तक की आमदनी पर टैक्स से छूट देने का प्रावधान किया था. इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस दायरे को बढ़ाने का काम करेगी.
  • नौकरी की तलाश करने वाले युवकों को सरकार से उम्मीद है कि इस बार के बजट में उनके लिए रोजगार सृजन पर जोर दिया जाएगा, ताकि उन्हें सरकारी नौकरी आसानी से मिल सके.
  • चूंकि, इस साल का बजट 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप होगा, तो देश के अर्थशास्त्री सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए योजनाओं पर जोर देने की बात कर रहे हैं.
  • बैंकिंग सेक्टर अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, इसलिए इसमें भी सुधार करने की जरूरत है. बैंकिंग तंत्र का विस्तार रोजगार, उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है.
  • बुनियादी ढांचा, हरित ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रेलवे में पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने की उम्मीद की जा रही है.
  • बजट में रोजगार से जुड़ी योजनाओं, अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम और महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों के लिए बजट में आवंटन बढ़ सकता है.
  • शिक्षा, एआई और हरित ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों के जरिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन पर ध्यान देना जरूरी होगा.
  • शिक्षा, एआई और हरित ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों के जरिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन पर ध्यान देना जरूरी होगा.
  • नौकरीपेशा, वरिष्ठ नागरिक और आम टैक्सपेयर चाहते हैं कि बजट में किराया और फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज आय पर टीडीएस सीमा को बढ़ाया जाए और टैक्स से जुड़ी राहत दी जाए. इससे आम लोगों की कर-बोझ कम हो सकता है.
  • विशेषज्ञ को उम्मीद है कि बजट में टीडीएस नियमों के सुधार तथा नई आयकर अधिनियम के सुचारू कार्यान्वयन के लिए नीति स्पष्टता आए.
  • बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की मांग है, ताकि आर्थिक विकास और रोजगार दोनों को बल मिले. विशेषज्ञों के अनुसार बजट में पूंजीगत व्यय में लगभग 10 % की वृद्धि हो सकती है.
  • एमएसएमई और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन योजना पेश किए जाने की उम्मीद है. इन क्षेत्रों को आसान नियम, कम लागत, टैक्स राहत और निर्यात शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं देने की उम्मीद है, जिससे रोजगार और उत्पादन बढ़े.
  • सोना और अन्य आयात वस्तुओं पर सीमा शुल्क कम करने की संभावना है, जिससे उपभोक्ता-स्तर पर कीमतें नियंत्रित हो सकती हैं और व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा.
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि से जुड़े कार्यक्रमों और छोटे व्यवसायों के लिए सहायता योजनाओं को बजट में प्रमुखता मिलने की उम्मीद है, ताकि ग्रामीण मांग और आर्थिक समावेशन दोनों को तवज्जो मिले.

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