NSE IPO: देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) आखिरकार अपना आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) लाने की तैयारी कर रहा है. SEBI से मंजूरी मिलने के बाद अब कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है. लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि NSE के शेयर उसके अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेड नहीं होंगे.
NSE अपनी ही दुकान पर क्यों नहीं बिकेगा?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, NSE के CEO आशीष चौहान ने साफ किया है कि भारत में नियम ऐसे हैं कि कोई एक्सचेंज खुद को रेगुलेट नहीं कर सकता है. यानी रेगुलेटर खुद ही लिस्टेड कंपनी नहीं बन सकता है. इसलिए NSE को अपने शेयर लिस्ट कराने के लिए दूसरे एक्सचेंज जैसे कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सहारा लेना पड़ेगा.
क्या IPO से कंपनी को मिलेगा पैसा?
नहीं, यह आईपीओ कंपनी के विस्तार के लिए पैसा जुटाने के लिए नहीं है. यह एक ऑफर फॉर सेल (OFS) है. इसका मतलब है कि NSE के मौजूदा शेयरधारक (लगभग 1.95 लाख लोग) अपने शेयर जनता को बेचेंगे. इससे उन्हें अपना पैसा निकालने (liquidity) का मौका मिलेगा. कंपनी को इससे कोई नया फंड नहीं मिलेगा.
कितनी होगी NSE के शेयर की कीमत?
अभी मार्केट में चर्चा है कि NSE की वैल्यूएशन 50 अरब डॉलर तक हो सकती है. लेकिन CEO ने कहा कि इन अटकलों पर भरोसा न करें. असली कीमत आईपीओ के समय मार्केट की हालत देखकर तय की जाएगी. अभी ड्राफ्ट पेपर (DRHP) तैयार होने में कुछ महीनों का समय लगेगा.
लिस्टिंग से आम निवेशकों को क्या फायदा?
आशीष चौहान का मानना है कि पब्लिक लिस्टिंग से पारदर्शिता (transparency) बढ़ती है और कामकाज में सुधार होता है. जब कोई कंपनी पब्लिक होती है, तो उसे हर जरूरी जानकारी तुरंत जनता और मीडिया के साथ शेयर करनी पड़ती है, जिससे जवाबदेही बढ़ जाती है.
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