Budget 2026: जैसे-जैसे 1 फरवरी, 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट की तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे टैक्सपेयर की उम्मीदें और एक्सपर्ट के सुझाव भी तेज हो गए हैं. इस बार अमेरिकन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जो सीधे तौर पर मिडिल क्लास और वेतनभोगी वर्ग (Salaried Class)की बचत को प्रभावित कर सकता है.
बचत खातों से आगे बढ़ने की जरूरत
वर्तमान में, आयकर अधिनियम 2025 की धारा 153 (जो पहले आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80TTA थी) के तहत, टैक्सपेयर को बचत खाते (Savings Account) से मिलने वाले ब्याज पर केवल ₹10,000 तक की कटौती (Deduction) का लाभ मिलता है. AMCHAM का मानना है कि आज के दौर में बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज बहुत कम है. ऐसे में कोई भी समझदार निवेशक अपना सारा पैसा बचत खाते में रखने के बजाय फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या रिकरिंग डिपॉजिट (RD) में निवेश करना पसंद करता है जहाँ रिटर्न बेहतर मिलता है.
विशेषज्ञों की मुख्य सिफारिशें
AMCHAM ने अपने प्री-बजट सुझावों में दो बड़े बदलावों की वकालत की है.
- सीमा में वृद्धि: धारा 153 के तहत मिलने वाली छूट की सीमा को वर्तमान ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 किया जाना चाहिए.
- दायरा बढ़ाना: अभी यह छूट केवल बचत खाते के ब्याज तक सीमित है. AMCHAM ने सिफारिश की है कि इसमें सभी प्रकार के बैंक डिपॉजिट, विशेष रूप से फिक्स्ड डिपॉजिट (FDRs) और टर्म डिपॉजिट को भी शामिल किया जाना चाहिए.
- यह अवास्तविक (Unreal/Unrealistic) है कि वेतनभोगी (Salaried Class) व्यक्ति अपनी पूरी बचत केवल बचत खाते में रखेंगे. बेहतर रिटर्न के लिए वे अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा टर्म डिपॉजिट या एफडी में ट्रांसफर करते हैं. इसलिए, टैक्स लाभ का दायरा बढ़ना चाहिए.
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
Income Tax Act 1961 की धारा 80TTA को वित्त अधिनियम 2012 के माध्यम से पेश किया गया था. पिछले एक दशक में महंगाई और निवेश के तरीकों में काफी बदलाव आया है. विशेषज्ञों का तर्क है कि
- ₹10,000 की सीमा आज की अर्थव्यवस्था के हिसाब से बहुत कम है.
- एफडी पर टैक्स छूट मिलने से लोग बैंकिंग प्रणाली में अधिक पैसा रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
- वरिष्ठ नागरिकों को पहले से ही कुछ लाभ मिलते हैं, लेकिन सामान्य टैक्सपेयर के लिए यह एक बड़ी राहत होगी.
क्या वित्त मंत्री देंगी राहत?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को बजट पेश करेंगी. यदि सरकार AMCHAM की इन सिफारिशों को स्वीकार करती है, तो यह न केवल लोगों की जेब में अधिक पैसा छोड़ेगा, बल्कि निवेश की आदतों में भी सकारात्मक सुधार लाएगा.
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