Stock Market Close: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा. पूरे दिन उतार-चढ़ाव के बाद बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. बीएसई सेंसेक्स 829.29 अंक यानी 1.08% गिरकर 76,034.42 पर बंद हुआ. वहीं एनएसई निफ्टी 227.70 अंक यानी 0.95% टूटकर 23,639.15 के स्तर पर बंद हुआ.
दरअसल, ईरान की नौसेना प्रमुख के एक बयान के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई. उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की मंजूरी लेनी पड़ सकती है, नहीं तो उन पर हमला हो सकता है. इससे दुनिया भर में तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है और कच्चे तेल के दाम फिर से चढ़ने लगे हैं.
बाजार पर क्यों पड़ा दबाव
मार्केट एक्सपर्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, बाहर से आ रहे नकारात्मक संकेतों की वजह से बाजार कमजोर हुआ है. मिडिल ईस्ट में जंग अभी खत्म होने के संकेत नहीं हैं और ब्रेंट क्रूड भी फिर महंगा हो रहा है. उन्होंने बताया कि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार में लगातार खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेशक (FII) लगातार बिकवाली कर रहे हैं. इसी वजह से बाजार को संभलने में मुश्किल हो रही है.
निवेशकों के लिए क्या सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. इतिहास बताता है कि जब भी बड़े भू-राजनीतिक संकट खत्म होते हैं, बाजार तेजी से वापसी करता है. इसलिए निवेशकों को अपने निवेश को जारी रखना चाहिए और SIP जैसी योजनाएं जारी रखनी चाहिए. लंबी अवधि के निवेशक बाजार की गिरावट का फायदा उठाकर अच्छे और मजबूत कंपनियों के शेयर धीरे-धीरे खरीद सकते हैं.
क्रूड ऑयल और वैश्विक चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हो रहे हमलों और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. इससे महंगाई और गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है. फिलहाल निवेशक सावधानी बरत रहे हैं और इसी वजह से शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिल रही है. हालांकि लंबी अवधि के लिहाज से भारत का बाजार अब भी निवेश के लिए आकर्षक माना जा रहा है.
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