Anant Singh Arrest: ‘छोटे सरकार’ और ‘दादा' के बीच शक्ति का संग्राम की भेंट चढ़ा ‘टाल का बादशाह’?

Anant Singh Arrest : बिहार की राजनीति में फिर उबाल है. मोकामा विधानसभा क्षेत्र में बाहुबली नेताओं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह और ‘दादा’ सूरजभान सिंह की पुरानी दुश्मनी दुलारचंद यादव की हत्या के बाद फिर भड़क उठी है. यह लड़ाई अब सियासी मुकाबले से ज्यादा वर्चस्व की जंग बन चुकी है.

Anant Singh Arrest, केशव सुमन सिंह : बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में ‘छोटे सरकार’ और ‘दादा’ के बीच पुरानी दुश्मनी एक बार फिर से खुलकर सामने आती नजर आ रही है. जिसकी शुरूआत दुलारचंद यादव की हत्‍या से मानी जा रही है. दुलारचंद की हत्‍या का आरोप भले ही अनंत सिंह पर लगा, लेकिन उन्‍होंने इसे सिरे से नकार दिया. इस हत्‍या को ‘सियासत बनाम शक्ति’ का त्रिकोणिय संघर्ष माना जा रहा था. यह तनाव 30 अक्टूबर को उस वक्त चरम पर पहुंच गया, जब 1990 के दशक के कुख्यात बाहुबली और जन सुराज पार्टी के नेता दुलारचंद यादव एक की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वे दुलार ‘टाल का बादशाह’ के नाम से जाने जाते थे और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के करीबी भी थे.

90 के दशक का बिहार जहां चुनावी हिंसा आम बात थी. बिहार अपने इस इतिहास को भूलने लगा था. नई पीढ़ी के मन में वो यादें अब धुंधली हो चुकी थीं. तभी मोकामामा की चुनावी हिंसा ने उस याद फिर से ताजा कर दिया. राजधानी पटना से लगभग 95 किलोमीटर दूर का ये इलाका कभी बाहुबलियों के लिए जाना जाता था. इस बार के विधानसभा चुनाव में दोनों बाहुबली आमने सामने थे. इसे भुमिहार बनाम भूमिहार का शक्ति संग्राम भी कहा जा सकता है. जहां दो कुख्यात बाहुबलियों के बीच सीधा मुकाबला था. मोकामामा के स्‍थानीय पवन कुमार कहते हैं ‘इस मुकाबले ने ही इसे खूनी रंग दे दिया. एक एनडीए का प्रतिनिधित्व करता है तो दूसरा महागठबंधन का. यह पार्टियों की नहीं, दोनों की व्‍यतिगत मसला बन गया था.’

हत्या के बाद भड़की सियासी जंग

30 अक्टूबर को हुई हत्या के बाद हालात और बिगड़ आरोप है कि जदयू प्रत्याशी और बाहुबली अनंत सिंह जिन्हें लोग ‘छोटे सरकार’ के नाम से जानते हैं, के समर्थकों ने दुलारचंद यादव की हत्या कराई. हालांकि, अनंत सिंह ने इसका आरोप अपने प्रतिद्वंदी सूरजभान सिंह पर लगाया है. जिन्हें इलाके में ‘दादा’ के नाम से जाना जाता है. सूरजभान सिंह की पत्नी और राजद नेता वीणा देवी इस सीट से महागठबंधन की उम्मीदवार हैं.

तीन दशक की दबदबे की राजनीति

अनंत सिंह पिछले 35 वर्षों से मोकामा क्षेत्र की सबसे ताकतवर हस्तियों में गिने जाते हैं. 1990 से अब तक उनके परिवार का वर्चस्व यहां बना हुआ है, सिवाय 2000 से 2005 के बीच, जब सूरजभान सिंह ने अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को हराया था. दिलिप सिंह, जो कभी मंत्री भी रहे, 1990 और 1995 में विधायक बने थे. उनके छोटे भाई अनंत सिंह ने 2005 में सीट वापस जीती और तब से लगातार विजेता रहे हैं, चाहे किसी भी पार्टी से लड़े या निर्दलीय ही चुनाव मैदान में कूदे.

2020 में वे राजद टिकट पर जीते, लेकिन आर्म्स एक्ट मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य घोषित कर दिए गए. 2022 के उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने सीट जीती. 2024 में हाई कोर्ट से बरी होने के बाद अनंत सिंह अब जदयू उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं. राजद ने अनंत सिंह का मुकाबला करने के लिए सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को उम्मीदवार बनाया है. खुद सूरजभान सिंह, जो 2008 में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए थे, चुनाव लड़ने से वंचित हैं.

सूरजभान का राजनीतिक सफर

सूरजभान सिंह 2004 में बेगूसराय जिले के बलिया लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने थे. 2014 में उन्होंने अपनी पत्नी वीणा देवी को मुंगेर से लोकसभा चुनाव लड़वाया. जो उन्होंने लोजपा के टिकट पर जीता था. 2019 में उनके छोटे भाई चंदन सिंह नवादा से सांसद बने. रामविलास पासवान के निधन के बाद लोजपा दो गुटों में बंटी. एक तरफ सूरजभान सिंह पशुपति पारस के साथ रहे. 2024 में उन्होंने पलटी मारी और राजद में शामिल हो गए, अब उनकी पत्नी वीणा देवी को मोकामा से मैदान में उतारा है.

बैलेट नहीं, बुलेट से तय होगी ‘सत्‍ता की ताकत’

मोकामा में जिस तरह के माहौल हैं, वहां इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कि इस बार ‘सत्‍ता की ताकत’ बैलेट से नहीं, बुलेट से तय की जाएगी. मोकामा में दो बाहुबलियों की टक्कर है. जिसमें एक पावर सेंटर दुलारचंद यादव को इस रेस से बाहर कर दिया गया है. अब मुकाबला दो के बीच है। सोचने वाली बात ये है कि खुद एडीआर की रिपोर्ट बताती में बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार 32 फीदस उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं, जबकि 27 फीसद पर गंभीर धाराएं।

मोकामा की सामाजिक बनावट

गंगा किनारे बसे मोकामा की आबादी 2.89 लाख है. इसमें भूमिहार वोटर लगभग 85,000 हैं. जो संख्‍या के आधार पर सबसे बड़ा हिस्सा है. अनंत सिंह और सूरजभान सिंह दोनों इसी जाति से हैं. इसके बाद दूसरे नंबर पर यादव हैं. जिनके पास करीब 40,000 वोटर है., कुर्मी, धानुक, पासवान और सहनी समुदायों के लगभग 95,000 वोटर हैं. अब देखने वाली बात ये होगी कि इन नंबर्स के आधार पर जीत किसे मिलती है। बता दें कि, यहां भारत वैगन, बाटा और शराब उत्पादन की फैक्ट्रियां थीं, जो अब बंद हो चुकी हैं. कहा जाता है ये बाहुबल की भेंट चढ़ चुकीं हैं. अब खेती और पशुपालन ही यहां की अर्थव्यवस्था है.

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अनंत सिंह सहित तीन गिरफ्तार

शनिवार को आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, दुलारचंद यादव की मौत “कार्डियो-पल्मोनरी फेल्योर और सिर, सीने में गंभीर चोट” से हुई. समर्थकों का आरोप है कि गोली मारने के बाद आरोपी दुलार पर गाड़ी चढ़ाकर भागे, जिससे उनकी मौत हुई. इस मामले में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें अनंत सिंह, उनके भतीजे रणवीर और करमवीर सिंह समेत दो अन्य के नाम शामिल हैं. दो पुलिस अधिकारी “लापरवाही” के आरोप में निलंबित किए गए हैं. अब देखने वाली बात ये होगी कि मोकामा में 6 मतदान कैसे होता है? हालांकि ऐतियात के तौर पर इलाके में भारी पुलिसबल तैनान कर दिया गया है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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