खत्म नहीं हो रही सीट शेयरिंग पर महागठबंधन की मुसीबत, अब इस पार्टी ने 11 सीटों पर ठोकी दावेदारी

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन और एनडीए में अब तक बात नहीं बन पाई है. इसके पीछे की वजह छोटी-छोटी पार्टियों की मांग मानी जा रही है. अब महागठबंधन में शामिल एक दल ने 11 सीटों की मांग कर दी है.

Bihar Chunav 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव मुहाने पर है लेकिन महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग पर सहमति अभी तक नहीं बन पाई है. इसी बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने इंडिया गठबंधन में 11 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की मांग रखी है. माकपा ने जिन सीटों पर दावा ठोका है उनमें विभूतिपुर, मांझी, पिपरा (मोतिहारी), मटिहानी, बहादुरपुर, मोहिउद्दीन नगर, बिस्फी, महिषी, नौतन, पूर्णिया और परबत्ता शामिल हैं.

पिछले चुनाव में कैसा था स्ट्राइक रेट

फिलहाल विभूतिपुर से अजय कुमार और मांझी से सत्येंद्र यादव माकपा विधायक हैं. 2020 के चुनाव में पार्टी ने चार सीटों पर किस्मत आजमाई थी और दो पर जीत हासिल की थी. उस समय माकपा का स्ट्राइक रेट 50 प्रतिशत और कुल वोट शेयर 0.65 प्रतिशत रहा था. इस बार पार्टी को भरोसा है कि इस बार 11 सीटों पर जीत मिल सकती है.

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पार्टी कर चुकी है कार्यकर्ता सम्मेलन

पार्टी नेताओं का कहना है कि जहां संगठन मजबूत है, वहां गठबंधन के अन्य दलों को भी फायदा मिलेगा, चाहे उम्मीदवार किसी और दल का ही क्यों न हो. चुनाव की घोषणा से पहले ही माकपा ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. जिन सीटों पर दावा किया गया है, वहां कार्यकर्ता सम्मेलनों का आयोजन कर लिया गया है.

इन सम्मेलनों में माकपा की शीर्ष नेतृत्व टीम से पोलित ब्यूरो सदस्य ए. विजय राघवन और अशोक धावले ने हिस्सा लेकर कार्यकर्ताओं में जोश भरा. इसके अलावा पार्टी ने बूथ स्तर पर कमेटियों का गठन भी कर लिया है, ताकि सीट फाइनल होते ही वोटों को अपने पक्ष में संगठित किया जा सके.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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