Bankipur By Election Result: बांकीपुर उपचुनाव में जीत हासिल करने के लिए जन सुराज और बीजेपी ने दो बिल्कुल अलग रास्ते चुने. सुबह 7 बजे से ही जन सुराज पार्टी (JSP) के पेशेवर कार्यकर्ता इलाकों में निकल जाते थे और देर रात काम खत्म कर लौटते थे.
दूसरी तरफ बीजेपी ने अपने पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं के दम पर मोर्चा संभाला. जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर और बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा दोनों की साख दांव पर है.
परदे के पीछे की असली राजनीतिक लड़ाई
बांकीपुर का यह चुनाव सिर्फ रैलियों और भाषणों तक सीमित नहीं रहा. इसके पीछे सैकड़ों कार्यकर्ताओं, सलाहकारों और वालंटियर्स की हफ्तों की मेहनत शामिल है. यह चुनाव प्रशांत किशोर के लिए बेहद खास है, क्योंकि उन्होंने इसी उपचुनाव से अपने चुनावी सफर की शुरुआत की है.
2 अक्टूबर 2024 को बनी जन सुराज पार्टी ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली थी और बांकीपुर में प्रत्याशी को 5% से कम वोट मिले थे.
बीजेपी के गढ़ में सम्राट चौधरी की पहली परीक्षा
2008 के परिसीमन के बाद से बांकीपुर हमेशा बीजेपी का मजबूत किला रहा है. अप्रैल में सम्राट चौधरी के बिहार का मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी के लिए यह पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है. बीजेपी ने यहां से स्थानीय नेता नीरज सिन्हा को टिकट दिया. पार्टी ने करीब 40 स्टार प्रचारकों को उतारा और 1000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को जमीन पर सक्रिय किया.
जन सुराज का पेशेवर और हाईटेक प्रचार
2025 की हार के बाद जन सुराज ने अपनी टीम में बदलाव किए लेकिन करीब 100 मुख्य कर्मचारियों को बनाए रखा. इसके अलावा लगभग 250 पेशेवरों की पूरी टीम तैनात की गई. हर एक कर्मचारी को 4-4 बूथों की जिम्मेदारी दी गई थी. महिलाओं को जोड़ने, जातिगत तालमेल बिठाने और बूथ संभालने के लिए अलग-अलग टीमें काम कर रही थीं.
बीजेपी का पारंपरिक और मजबूत कैडर नेटवर्क
बीजेपी ने अपने दशकों पुराने मजबूत संगठन पर भरोसा जताया. पार्टी का लक्ष्य हर बूथ समिति में 20 स्थानीय कार्यकर्ताओं को जोड़ने का था, हालांकि कई जगह 7 से 10 कार्यकर्ता ही जुट पाए. पार्टी ने पूरे क्षेत्र के 420 से अधिक बूथों की जिम्मेदारी विधायकों को सौंपी थी. चुनाव के आखिरी दौर में बूथ सहायता केंद्र भी बनाए गए ताकि वोटरों को पोलिंग बूथ तक आसानी से पहुंचाया जा सके.
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दो अलग-अलग चुनावी मॉडलों के बीच मुकाबला
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, बांकीपुर का यह उपचुनाव दो मॉडलों की टक्कर बन गया. एक तरफ जन सुराज का डेटा, रिसर्च और प्रोफेशनल्स पर टिका आधुनिक प्रचार था, तो दूसरी तरफ बीजेपी का कैडर और मजबूत जमीनी ढांचा था. इस बार मतदान केवल 34.24% ही रहा, जो 2025 के विधानसभा चुनाव के 41.45% से काफी कम है.
30 जुलाई को हुए मतदान के दौरान दोनों दलों में बहस भी हुई. प्रशांत किशोर ने पुलिस पर अपने समर्थकों को बेवजह पकड़ने का आरोप लगाया, तो बीजेपी ने जन सुराज पर बाहर से फर्जी वोटर लाने का दावा किया.
श्री कृष्णपुरी इलाके में दोनों पक्षों के बीच झड़प के बाद पुलिस को दखल देना पड़ा था. जानकारों का मानना है कि कम वोटिंग से जन सुराज को ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद कम है.
