क्या आपकी बाइक अचानक लेने लगी है झटके? मैकेनिक के पास जाने से पहले जान लें पीछे की असली वजह

क्या आपकी बाइक या स्कूटर चलते-चलते झटके ले रहा है? मैकेनिक के पास जाने से पहले जानें कि पेट्रोल में पानी की मिलावट, स्पार्क प्लग या एयर फिल्टर के गंदे होने जैसी समस्याएं आपकी बाइक को परेशान कर सकती हैं.

सुबह-सुबह ऑफिस जाने के लिए निकले हों और बाइक अचानक चलते-चलते झटके लेने लगे, तो मूड खराब होना तय है. कई बार बाइक थोड़ी दूर सही चलती है और फिर ऐसा लगता है जैसे पेट्रोल खत्म हो रहा हो. मैकेनिक के पास जाने पर वो अक्सर बड़ा खर्चा बता देते हैं, लेकिन हर बार वजह इंजन की खराबी नहीं होती. आजकल पेट्रोल पंपों पर 20 पर्सेंट एथेनॉल यानी E20 पेट्रोल मिल रहा है. अगर आपकी बाइक या स्कूटर थोड़ी पुरानी है, तो यह पेट्रोल आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. आइए जानते हैं, कि बिना वजह मैकेनिक को पैसे दिए आप घर बैठे इस दिक्कत को कैसे समझकर ठीक कर सकते हैं.

बाइक या स्कूटर झटके क्यों लेती है?

  • पेट्रोल में पानी की मिलावट: एथेनॉल की आदत होती है कि वो हवा में मौजूद नमी यानी पानी को सोख लेता है. जब बाइक 2-3 दिन खड़ी रहती है, तो टंकी के नीचे पानी बैठ जाता है. जब यह पानी पेट्रोल के साथ इंजन में जाता है, तो बाइक झटके लेने लगती है.
  • स्पार्क प्लग में कचरा: अगर स्पार्क प्लग पर काला कार्बन या पेट्रोल जम जाए, तो करंट सही से नहीं मिलता. इससे बाइक में मिसिंग शुरू हो जाती है.
  • गंदा एयर फिल्टर: अगर एयर फिल्टर में धूल जम जाए, तो इंजन को सही हवा नहीं मिलती. बिना हवा के पेट्रोल सही से जलता नहीं है और बाइक रुक-रुक कर चलती है.

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मैकेनिक के पास जाने से पहले करें ये काम

स्पार्क प्लग खोलकर कपड़े से साफ करें और कट की दूरी सही रखें. टंकी का पेट्रोल किसी पारदर्शी बोतल में निकालें, नीचे बैठा पानी साफ दिख जाएगा. साइड पैनल खोलकर एयर फिल्टर निकालें और उसे झाड़कर साफ कर लें.

इस परेशानी से बचने के आसान उपाय क्या हैं?

  • टंकी खाली न रखें: अपनी बाइक में हमेशा आधा टैंक से ज्यादा पेट्रोल रखें. कम पेट्रोल रहने पर नमी जल्दी पानी बन जाती है.
  • बाइक ढककर खड़ी करें: अगर बाइक को धूप या बारिश में 3-4 दिन खड़ा रखना पड़े, तो फ्यूल का स्विच बंद कर दें. 
  • सही पेट्रोल पंप चुनें: जहां ज्यादा गाड़ियां आती-जाती हों, वहीं से पेट्रोल भरवाएं ताकि ताजा और बढ़िया क्वालिटी का पेट्रोल मिले. अगर आप ये छोटे काम खुद कर लेंगे, तो मैकेनिक के फालतू खर्चे से बच जाएंगे और आपकी बाइक हमेशा स्मूथ चलेगी.

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By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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