भारतीय सड़कों पर कार को सेफ रखना है तो ये चीज है सबसे जरूरी, खरीदते समय न करें इग्नोर

Car Ground Clearance: भारत में कार चुनते समय माइलेज और फीचर्स के साथ ग्राउंड क्लीयरेंस को भी जरूर देखना चाहिए. ऊंची सड़कों से लेकर गड्ढों और बारिश भरे रास्तों तक, ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कार ज्यादा सेफ रहती है. यह अंडरबॉडी को नुकसान से बचाता है, बेहतर विजिबिलिटी देता है और हर सफर को आसान बनाता है.

Car Ground Clearance: जब लोग भारत में कार खरीदते हैं, तो अक्सर उनका ध्यान माइलेज, कीमत और फीचर्स पर रहता है. लेकिन एक चीज जो बहुत कम लोग देखते हैं, वो है ग्राउंड क्लियरेंस. आसान शब्दों में कहें तो ये कार के नीचे और सड़क के बीच की दूरी होती है. भारत जैसी सड़कों पर ये छोटी-सी चीज बहुत बड़ा फर्क डालती है. अगर ग्राउंड क्लियरेंस 180 mm या उससे ज्यादा हो, तो उसे आमतौर पर खराब रास्तों और स्पीड ब्रेकर के लिए काफी बेहतर माना जाता है. आइए इसे थोड़े डिटेल में समझते हैं.

हाई ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कार क्यों है जरूरी?

भारत की सड़कों का हाल हर जगह एक जैसा नहीं होता. शहरों में अचानक स्पीड ब्रेकर, गड्ढे या टूटी-फूटी सड़कें मिल जाती हैं. वहीं गांवों में कई बार कच्ची या ऊबड़-खाबड़ रास्तों से सामना हो जाता है. ऐसे में अगर कार की ग्राउंड क्लीयरेंस कम हो, तो नीचे का हिस्सा आसानी से रगड़ खा सकता है. इससे ऑयल सूम्प या एग्जॉस्ट जैसे जरूरी पार्ट्स को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है. इसलिए ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कार इन मुश्किल रास्तों पर ज्यादा सेफ रहती है.

मॉनसून में ड्राइविंग अक्सर सबसे बड़ी टेंशन बन जाती है. तेज बारिश में सड़कें मिनटों में पानी से भर जाती हैं और लो ग्राउंड क्लीयरेंस वाली गाड़ियों के लिए मुश्किल बढ़ जाती है, क्योंकि पानी इंजन तक पहुंचने का खतरा रहता है. लेकिन ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस वाली गाड़ी ऐसी परिस्थितियों में बेहतर रहती है, क्योंकि वो पानी के ऊपर रहती है.

जिन कारों का ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा होता है, उनमें बैठने की पोजिशन भी थोड़ी ऊंची मिलती है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि आपको सड़क आगे से साफ-साफ दिखती है. आप पहले ही गड्ढे, ट्रैफिक और सामने आने वाली रुकावटों को देख सकते हैं. इससे ड्राइविंग ज्यादा सेफ हो जाती है.

ये बात का ध्यान रखें

कंपनियां जो ग्राउंड क्लियरेंस बताती हैं, वह आमतौर पर उस स्थिति में मापा जाता है जब कार पूरी तरह खाली होती है. लेकिन जैसे ही आप उसमें पैसेंजर बैठाते हैं और सामान रखते हैं, गाड़ी की ऊंचाई थोड़ी कम हो जाती है. यही वजह है कि कार चुनते समय हमेशा अपनी जरूरत से थोड़ा ज्यादा ग्राउंड क्लियरेंस वाली गाड़ी लें.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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