आज की कारें पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो गई हैं. सड़क पर पैदल चलने वाला कोई व्यक्ति सामने आ जाए तो कार उसे पहचान सकती है, लेन से गाड़ी भटकने पर उसे वापस सेंटर में ला सकती है, जरूरत पड़ने पर खुद ब्रेक लगा सकती है और साइड से आ रही गाड़ियों के बारे में ड्राइवर को अलर्ट भी कर सकती है. लेकिन अब कारों के और भी ज्यादा स्मार्ट होने की तैयारी है.
सोचिए, अगर सड़क पर चल रही कारें एक-दूसरे से बात कर सकें और आगे होने वाले खतरे की जानकारी आपस में शेयर कर सकें, तो सड़क हादसों को रोकने में कितनी मदद मिल सकती है. यही काम करने वाला है Vehicle-to-Vehicle यानी V2V कम्युनिकेशन. सरकार 1 अक्टूबर 2028 से नई गाड़ियों में V2V टेक्नोलॉजी देना जरूरी करने की तैयारी कर रही है. ऐसे में सवाल है कि आखिर V2V क्या है? क्या यह ADAS की तरह ही काम करती है या फिर यह उससे अलग टेक्नोलॉजी है? आइए जानते हैं.
क्या ADAS की तरह ही काम करती है V2V?
सीधा जवाब है नहीं. V2V और ADAS दोनों अलग-अलग टेक्नोलॉजी हैं. हालांकि, दोनों एक साथ काम करें तो गाड़ियों की सेफ्टी को काफी बेहतर बनाया जा सकता है. आसान शब्दों में समझें तो ADAS गाड़ी की आंखें और कान हैं, जबकि V2V उसकी आवाज है.
इसे ऐसे समझिए जैसे गाड़ी कोई इंसान हो. ADAS गाड़ी को आसपास की चीजों को देखने और समझने की पावर देता है. वहीं, V2V टेक्नोलॉजी गाड़ी को दूसरी गाड़ियों से बातचीत करने की सुविधा देती है. यानी एक सिस्टम गाड़ी को आसपास देखने में मदद करता है, तो दूसरा उसे दूसरी गाड़ियों से जानकारी शेयर करने की सुविधा देती है.
ADAS कैसे काम करता है?
ADAS यानी Advanced Driver Assistance Systems का पूरा खेल कार में लगे सेंसर और कैमरों पर डिपेंड करता है. कार में लगे कैमरे, रडार, अल्ट्रासोनिक सेंसर और कुछ मामलों में LiDAR लगातार आसपास की चीजों पर नजर रखते हैं.
मान लीजिए, आपकी कार के आगे चल रही गाड़ी अचानक धीमी होने लगती है. ADAS इसे पहचानकर आपको तुरंत आगे टक्कर होने की चेतावनी दे सकता है. वहीं, अगर कार में Autonomous Emergency Braking का फीचर है, तो सिस्टम जरूरत पड़ने पर खुद ब्रेक भी लगा सकता है. हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. ADAS उतना ही देख और समझ सकता है, जितना उसके कैमरे और सेंसर डिटेक्ट कर पाते हैं.
V2V कैसे ADAS से एक कदम आगे है?
V2V से लैस कारें सिर्फ अपने आसपास की चीजों को कैमरा या रडार से देखने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि दूसरी V2V वाली गाड़ियों से भी वायरलेस तरीके से डिटेल्स शेयर कर सकती हैं. इसमें गाड़ी की स्पीड, लोकेशन, किस दिशा में जा रही है और कितनी तेजी से ब्रेक लगा रही है जैसी डिटेल्स शामिल हो सकती है.
अब इसे एक व्यस्त हाईवे के उदाहरण से समझ लेते हैं. मान लीजिए आप एक बड़े SUV के पीछे चल रहे हैं और आपके आगे वह SUV एक ट्रक के पीछे है. अचानक आगे मोड़ के पास ट्रैफिक पूरी तरह रुक जाता है और ट्रक को जोर से ब्रेक लगाना पड़ता है. लेकिन आपकी कार के कैमरे और रडार के सामने SUV खड़ी है, इसलिए उन्हें ट्रक दिखाई ही नहीं देता.
ऐसी सिचुएशन में नॉर्मल ADAS वाली कार को खतरे का अंदाजा तभी होगा, जब आपके आगे चल रही SUV ब्रेक लगाएगी या फिर ट्रक और रुका हुआ ट्रैफिक सेंसर की नजर में आएगा.
लेकिन V2V यहां पूरा खेल बदल देता है. ट्रक जैसे ही अचानक ब्रेक लगाएगा, वह अपनी यह डिटेल्स आसपास की दूसरी V2V गाड़ियों को भेज सकता है. यह चेतावनी ट्रैफिक में लगभग तुरंत आगे-पीछे पहुंच सकती है. यानी आपकी कार को ट्रक दिखाई देने से पहले ही पता चल सकता है कि आगे कोई बड़ा खतरा है और उसे सावधान होने की जरूरत है.
यही V2V और नॉर्मल ADAS के बीच सबसे बड़ा अंतर है. ADAS खतरे को देखता और पहचानता है, जबकि V2V खतरे की जानकारी दूसरी गाड़ियों तक पहुंचाता है.
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