Push Start-Stop फीचर वाली कार खरीदने से पहले जान लें फायदे और नुकसान

नयी कारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा Push Start-Stop फीचर सुविधा और सिक्योरिटी देता है, लेकिन स्मार्ट की, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कुछ परेशानियां भी पैदा कर सकता है.

कारों में मिलने वाला पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर अब सिर्फ महंगी लग्जरी गाड़ियों तक सीमित नहीं रहा. आज छोटे हैचबैक से लेकर कॉम्पैक्ट एसयूवी तक में यह फीचर तेजी से आम हो चुका है. बिना चाबी लगाए सिर्फ एक बटन दबाकर इंजन स्टार्ट करना लोगों को प्रीमियम फील देता है. खासकर शहरों में रोजाना ड्राइव करने वालों के लिए यह काफी सुविधाजनक माना जाता है. लेकिन जितना यह फीचर आधुनिक और आसान लगता है, उतने ही इसके कुछ ऐसे पहलू भी हैं जिनके बारे में जानना जरूरी है. कई बार यही स्मार्ट फीचर मुश्किल की वजह भी बन सकता है.

बिना चाबी कार स्टार्ट करने का आसान तरीका

पुश स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुविधा है. ड्राइवर को बार-बार जेब या बैग से चाबी निकालने की जरूरत नहीं पड़ती. जैसे ही स्मार्ट की कार के अंदर होती है, ब्रेक या क्लच दबाकर एक बटन प्रेस करते ही इंजन स्टार्ट हो जाता है. ट्रैफिक में बार-बार रुकने और चलने के दौरान यह फीचर काफी आराम देता है.

आजकल ज्यादातर नई कारों में यह फीचर कीलेस एंट्री के साथ आता है, जिससे कार लॉक और अनलॉक करना भी आसान हो जाता है. यही वजह है कि युवाओं और फैमिली कार खरीदारों के बीच इसकी मांग तेजी से बढ़ी है.

सुरक्षा में भी करता है मदद

यह फीचर सिर्फ सुविधा तक सीमित नहीं है. इसमें सिक्योरिटी का भी बड़ा रोल होता है. कार तभी स्टार्ट होती है जब स्मार्ट की आसपास मौजूद हो. ऐसे में पारंपरिक तरीके से वायर जोड़कर कार चोरी करना काफी मुश्किल हो जाता है.

ज्यादातर कंपनियां इसके साथ इंजन इमोबिलाइजर सिस्टम भी देती हैं. यानी गलत चाबी या बिना ऑथराइजेशन के इंजन स्टार्ट नहीं होगा. यही कारण है कि यह फीचर न्यू जेनरेशन की कारों में तेजी से स्टैंडर्ड बनता जा रहा है.

कम घिसावट, लेकिन खर्च हो सकता है ज्यादा

पारंपरिक चाबी वाले सिस्टम में कई मैकेनिकल पार्ट्स लगातार इस्तेमाल से घिसते रहते हैं. पुश स्टार्ट सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक बेस्ड होता है, इसलिए इसमें मूविंग पार्ट्स कम होते हैं. लंबे समय में इससे कुछ हद तक मेंटेनेंस कम हो सकता है.

हालांकि, अगर स्मार्ट की खो जाए या सिस्टम में खराबी आ जाए तो खर्च काफी बढ़ सकता है. नयी स्मार्ट की बनवाने के लिए अक्सर डीलरशिप पर जाना पड़ता है और री-प्रोग्रामिंग भी करनी होती है. वारंटी खत्म होने के बाद रिपेयर बिल कई लोगों को चौंका सकता है.

कई बार बन जाता है परेशानी की वजह

इस फीचर की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भरता है. अगर कार की बैटरी कमजोर हो जाए या पूरी तरह डिस्चार्ज हो जाए, तो कई बार कार स्टार्ट ही नहीं होती. हालांकि कंपनियां बैकअप स्टार्टिंग सिस्टम देती हैं, लेकिन अधिकतर लोगों को उसके इस्तेमाल की जानकारी नहीं होती.

इसके अलावा कई ड्राइवर इंजन बंद करना भी भूल जाते हैं. खासकर हाइब्रिड और बेहद शांत कारों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है. चाबी निकालने की जरूरत नहीं होने की वजह से कई बार लोग कार छोड़कर चले जाते हैं और इंजन चालू रह जाता है.

क्या यह फीचर वाकई जरूरी है?

पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर निश्चित तौर पर ड्राइविंग अनुभव को ज्यादा आधुनिक और आसान बनाता है. लेकिन इसके फायदे तभी पूरी तरह मिलते हैं जब ड्राइवर इसकी बेसिक जानकारी रखे. स्मार्ट फीचर्स के साथ थोड़ी सावधानी भी जरूरी है. अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह फीचर रोजाना ड्राइविंग को काफी आरामदायक बना सकता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Rajeev kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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