Nitrogen vs Regular Air: कई लोग अक्सर मानते हैं कि टायर में नाइट्रोजन भरवाने से कई फायदे मिलते हैं. जैसे पंक्चर कम होना, माइलेज बेहतर होना, परफॉर्मेंस बढ़ना और टायर की लाइफ लंबी होना. लेकिन सवाल ये है कि क्या सच में आपकी कार के टायरों में नॉर्मल हवा की जगह नाइट्रोजन भरवाना जरूरी है? आखिरकार, जो हवा हम यूज करते हैं उसमें पहले से ही करीब 78% नाइट्रोजन होता है. तो फिर क्या हम सिर्फ एक नार्मल चीज को जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं, या वाकई इसमें कोई बड़ा फायदा छिपा है? चलिए इसे थोड़ा आसान शब्दों में समझते हैं.
नाइट्रोजन और रेगुलर हवा में क्या अंतर है?
नाइट्रोजन एक सूखी गैस होती है, जबकि नॉर्मल हवा में ऑक्सीजन भी मौजूद होती है. नॉर्मल हवा में करीब 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन होती है, और बाकी हिस्सा कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन, नीयॉन, हीलियम, क्रिप्टॉन और जेनॉन जैसी गैसों से बना होता है. इसके मुकाबले, जब टायरों में नाइट्रोजन भरी जाती है तो उसमें लगभग 100% शुद्ध नाइट्रोजन होती है. नाइट्रोजन हवा में ऑक्सीजन नहीं होती, इसलिए यह एक सूखी गैस होती है, जबकि नॉर्मल हवा पूरी तरह सूखी नहीं होती.
नाइट्रोजन हवा के फायदे
जब हम नॉर्मल हवा (Regular Air) को टायर में भरते हैं, तो उसमें नमी भी मौजूद होती है. जब टायर गरम होता है, तो यह नमी भाप (vapor) में बदल जाती है. इसकी वजह से टायर के अंदर प्रेशर उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है. इसके उलट, नाइट्रोजन गैस में न तो नमी होती है और न ही पानी की भाप. इसलिए यह टेम्परेचर बदलने पर भी ज्यादा स्टेबल रहता है. यही वजह है कि ज्यादा गर्मी में नाइट्रोजन भरे टायर नॉर्मल हवा वाले टायरों की तुलना में ज्यादा सेफ और कम फटने वाले होते हैं.
इसके अलावा, हवा में मौजूद नमी धीरे-धीरे टायर के मेटल रिम्स में जंग (corrosion) भी लगा सकती है. वहीं नाइट्रोजन एक बड़ा और कम रिसाव (leak) वाला गैस मॉलिक्यूल है. इसलिए यह रेगुलर हवा की तुलना में टायर से धीरे-धीरे बाहर निकलता है और प्रेशर भी लंबे समय तक बना रहता है.
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नाइट्रोजन हवा की कीमत और उपलब्धता
अगर आप टायर में नॉर्मल हवा (regular air) भरवाते हैं, तो उसका खर्च लगभग ना के बराबर होता है. कई फ्यूल पंप पर तो ये बिल्कुल फ्री भी मिल जाती है. लेकिन अगर आप नाइट्रोजन गैस भरवाते हैं, तो वो आमतौर पर पेड सर्विस होती है. फ्यूल स्टेशन या टायर शॉप पर इसके लिए चार्ज लिया जाता है. जगह के हिसाब से चारों टायर में नाइट्रोजन भरवाने या टॉप-अप कराने का खर्च लगभग ₹150 से ₹200 तक आ सकता है.
अब बात आती है सुविधा की. नाइट्रोजन फिलिंग हर जगह आसानी से नहीं मिलती, खासकर छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों या नए हाईवे एरिया में. ऐसे में अगर रास्ते में टायर पंचर हो जाए या हवा कम हो जाए, तो आपको मजबूरी में रेगुलर हवा ही भरवानी पड़ सकती है.
क्या आपको टायरों में रेगुलर हवा की जगह नाइट्रोजन का यूज करना चाहिए?
अगर आप लंबी हाईवे ड्राइव पर निकल रहे हैं, तो नाइट्रोजन भरवाना एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इससे टायर के अंदर टेम्परेचर और प्रेशर में अचानक बदलाव कम होते हैं. खासकर जब आप हाई-स्पीड पर ड्राइव करते हैं या ट्रैक जैसी जगहों पर गाड़ी चलाते हैं, तब नाइट्रोजन टायर के अंदर का प्रेशर बेहतर तरीके से बनाए रखता है. यही वजह है कि मोटरस्पोर्ट्स और एयरोस्पेस में इसका यूज ज्यादा किया जाता है.
लेकिन रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए नॉर्मल हवा ही पूरी तरह ठीक है. सबसे जरूरी चीज है कि आप टायर प्रेशर को समय-समय पर चेक करते रहें. इससे टायर की सेहत अच्छी रहती है और लंबे समय में पैसे भी बचते हैं. जो ये आम धारणा है कि नाइट्रोजन भरवाने से पंचर नहीं होता, माइलेज बहुत बढ़ जाता है, टायर बिल्कुल गर्म नहीं होते या टायर की लाइफ कई गुना बढ़ जाती है तो ये सब बातें सही नहीं हैं.
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