भारत में पहली कार खरीदना सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि एक बड़ा और खास पल होता है. लेकिन आज के समय में इतनी सारी कारें, फीचर्स और ऑप्शन मौजूद हैं कि सही चुनाव करना थोड़ा कन्फ्यूजिंग हो जाता है. खासकर अगर आप पहली बार कार ले रहे हैं, तो बेहतर है कि आप दिखावे या ज्यादा फीचर्स के बजाय अपने बजट, आसान ड्राइविंग और कम खर्च पर ध्यान दें. इसीलिए, सही फैसला लेने में आपकी मदद के लिए हम एक आसान स्टेप-बाय-स्टेप गाइड लेकर आए हैं. इसमें हमने बताया है कि पहली कार खरीदते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. आइए जानते हैं.
सबसे पहल बजट तय कर लें
कार खरीदने से पहले सबसे जरूरी चीज है अपना बजट साफ-साफ तय करना. सिर्फ एक्स-शोरूम कीमत देखकर फैसला मत लें, बल्कि ऑन-रोड प्राइस को ध्यान में रखें, जिसमें EMI, इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन और बाकी खर्च भी शामिल होते हैं.
अपनी जरूरत पता कर लें
दूसरी चीज है कि आपको अपनी जरूरत पता होनी चाहिए. आप ज्यादा शहर में चलाते हैं या हाईवे पर? रोजाना इस्तेमाल कितना है, साथ में कितने लोग और कितना सामान रहता है. ये सब चीजें काफी फर्क डालती हैं.
अगर आप ज्यादातर सिटी में ड्राइव करते हैं, तो छोटी हैचबैक या कॉम्पैक्ट SUV आपके लिए बढ़िया रहेगी. वहीं, हाईवे के लिए थोड़ा पावरफुल सेडान या SUV ज्यादा आरामदायक होती है. फैमिली के साथ सफर करना हो तो स्पेस और कम्फर्ट सबसे जरूरी हो जाता है.
फ्यूल टाइप और गियरबॉक्स चुन लें
सही फ्यूल टाइप चुनना जरूरी है, क्योंकि यही आपके खर्च और इस्तेमाल को तय करता है. अगर आपकी ड्राइविंग कम है, तो पेट्रोल कार ठीक रहती है. ज्यादा चलाने वालों के लिए डीजल बेहतर रहता है, जबकि CNG सस्ता ऑप्शन है लेकिन थोड़े समझौते के साथ आता है. शहर में इस्तेमाल के लिए इलेक्ट्रिक कार भी अच्छा ऑप्शन बनती जा रही है, बस चार्जिंग की सुविधा होनी चाहिए.
जहां तक गियरबॉक्स की बात है, मैनुअल गाड़ियां सस्ती होती हैं, लेकिन आजकल ट्रैफिक को देखते हुए ऑटोमैटिक गाड़ियां ज्यादा आरामदायक लगती हैं. रोजाना शहर में ड्राइव करते हैं, तो ऑटोमैटिक आपकी लाइफ आसान कर सकती है.
जरूरी सेफ्टी फीचर्स पर डेस्क करें
कार खरीदते समय सिर्फ दिखावा या लंबी फीचर लिस्ट पर मत जाएं. असली ध्यान उन चीजों पर होना चाहिए जो रोज के इस्तेमाल में काम आए, आपकी सेफ्टी बढ़ाएं. टचस्क्रीन सिस्टम जिसमें फोन कनेक्ट हो जाए, रिवर्स कैमरा, पार्किंग सेंसर और स्टीयरिंग कंट्रोल जैसी चीजें ड्राइव को आसान बनाती हैं.
सनरूफ जैसी एक्स्ट्रा चीजें अच्छी लगती हैं, लेकिन जरूरी नहीं होतीं. वहीं सेफ्टी के मामले में बिल्कुल समझौता न करें. ड्यूल एयरबैग, ABS के साथ EBD, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और क्रैश टेस्ट रेटिंग जरूर देखें.
मेंटेनेंस और सर्विस का जांच कर लें
गाड़ी खरीदना ही खर्च का अंत नहीं होता, असली कहानी तो उसके बाद शुरू होती है. सर्विस कितनी महंगी है, आपके आसपास सर्विस सेंटर आसानी से मिलते हैं या नहीं, स्पेयर पार्ट्स की कीमत क्या है और ब्रांड कितना भरोसेमंद है. ये सब चीजें जरूर ध्यान में रखें. आमतौर पर जिन कंपनियों का सर्विस नेटवर्क बड़ा होता है, उनकी गाड़ियां मेंटेन करना ज्यादा आसान और झंझट-फ्री रहता है.
ऑफर्स चेक करें और मोलभाव करें
जब भी कार खरीदने जाएं, सिर्फ एक ऑफर देखकर फैसला मत लें. अलग-अलग डीलर्स के ऑफर्स जरूर तुलना करें. कहीं डिस्काउंट मिलेगा, तो कहीं एक्सचेंज या कॉर्पोरेट बेनिफिट्स. थोड़ा मोलभाव भी करें, इससे कीमत और कम हो सकती है. याद रखें, ये बड़ा निवेश है, इसलिए जल्दबाजी या सेल्स प्रेशर में आकर नहीं, बल्कि समझदारी से फैसला लें.
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