6 एयरबैग्स, 360 डिग्री कैमरा... इस मेड इन इंडिया SUV का विश्व में जलवा, 2 लाख एक्सपोर्ट का आंकड़ा किया पार

मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स ने एक्सपोर्ट के क्षेत्र में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है, 38 महीने से भी कम समय में 2 लाख यूनिट्स का निर्यात किया है. खास बात यह है कि पहले 1 लाख यूनिट्स के एक्सपोर्ट में 25 महीने लगे, जबकि अगले 1 लाख यूनिट्स सिर्फ 13 महीनों में ही एक्सपोर्ट हो गए.

मारुति सुजुकी ने भारत से फ्रॉन्क्स (Fronx) की 2 लाख गाड़ियों का एक्सपोर्ट कर दिया है. कंपनी ने यह आंकड़ा 38 महीने से भी कम समय में हासिल किया है. यह नया रिकॉर्ड जुलाई, 2026 में बना है. इस कॉम्पैक्ट एसयूवी का एक्सपोर्ट जून 2023 में शुरू हुआ था. तब से लेकर अब तक यह गाड़ी जापान सहित लगभग 90 देशों में भेजी जा चुकी है. दिलचस्प बात यह है कि पहली 1 लाख गाड़ियां एक्सपोर्ट होने के बाद इसकी रफ्तार बहुत तेज हो गई. फ्रॉन्क्स को पहले 1 लाख के आंकड़े तक पहुंचने में 25 महीने से कम समय लगा था, लेकिन अगले 1 लाख का आंकड़ा सिर्फ 13 महीने में ही पार हो गया. यह 6 एयरबैग्स और 360 डिग्री कैमरा से लैस है.

Maruti Fronx एक्सपोर्ट 13 महीने में हुआ दोगुना

मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स एसयूवी ने एक्सपोर्ट शुरू होने के 25 महीने से भी कम समय में 1 लाख गाड़ियों का आंकड़ा पार कर लिया था. इसके बाद दूसरे 1 लाख का आंकड़ा लगभग 13 महीने में पूरा हो गया. इसका मतलब है कि गाड़ी ने अगला 1 लाख का आंकड़ा पहले के मुकाबले आधे समय में हासिल कर लिया.

नए आंकड़ों में सबसे खास बात यही है. सिर्फ 2 लाख के कुल आंकड़े को देखने के बजाय अगर एक्सपोर्ट का समय देखें तो पता चलता है कि पहली 1 लाख गाड़ियां भेजने के बाद एक्सपोर्ट की रफ्तार बहुत तेज हुई है.

ये भी पढ़ें: Maruti Suzuki की कार खरीदने का प्लान है? Baleno समेत इन गाड़ियों की कीमत ₹30,000 तक बढ़ी, देखें पूरी लिस्ट

फ्रॉन्क्स के एक्सपोर्ट मार्केट में जापान भी शामिल

मारुति सुजुकी का कहना है कि फ्रॉन्क्स को अब लगभग 90 देशों में भेजा जा रहा है. इन देशों की लिस्ट में जापान भी शामिल है. यह गाड़ी मारुति सुजुकी के बड़े एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो का हिस्सा है. कंपनी फिलहाल 17 मॉडल्स को लगभग 120 देशों में भेजती है. विदेश भेजे जाने से पहले यह सभी गाड़ियां गुजरात के हंसलपुर प्लांट में ही बनाई जाती हैं.

वित्त वर्ष 2026-27 (FY2026-27) की पहली तिमाही के लिए मारुति सुजुकी ने फ्रॉन्क्स, जिम्नी 5-डोर, ई-विटारा, डिजायर और बलेनो हैचबैक को अपने सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट होने वाले मॉडल्स की लिस्ट में रखा है. सियाम (SIAM) के आंकड़ों के हवाले से कंपनी ने बताया कि इस तिमाही में भारत से बाहर भेजी गई कुल पैसेंजर गाड़ियों में उसकी हिस्सेदारी 55% से ज्यादा रही. कंपनी की रिलीज रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त-वर्ष 2024-25 से ही फ्रॉन्क्स मारुति सुजुकी के सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट होने वाले मॉडल्स में शामिल रही है.

ये भी पढ़ें: Maruti Suzuki SUV: नई ब्रेजा के सहारे मारुति सुजुकी का दांव, इस साल 7 लाख एसयूवी बेचने का लक्ष्य

2 लाख के आंकड़े का क्या है मतलब?

इन आंकड़ों का सीधा सा मतलब है कि फ्रॉन्क्स ने 1 लाख से 2 लाख एक्सपोर्ट तक पहुंचने में बहुत कम समय लिया. सियाम (SIAM) के आंकड़ों के आधार पर मारुति सुजुकी का कहना है कि फ्रॉन्क्स वित्त-वर्ष 2024-25 से ही भारत से सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट होने वाली पैसेंजर गाड़ी रही है. कंपनी खुद इस 2 लाख के आंकड़े को भारत की किसी एसयूवी का सबसे तेज एक्सपोर्ट मानती है. हालांकि यह कंपनी का अपना दावा है, किसी अलग संस्था की रैंकिंग नहीं है, लेकिन एक्सपोर्ट की गिनती को लेकर कोई शक नहीं है. जून 2023 में एक्सपोर्ट शुरू होने के बाद से अब तक 38 महीने से कम समय में 2 लाख फ्रॉन्क्स गाड़ियां भारत से बाहर भेजी जा चुकी हैं. यह गाड़ी अब तक लगभग 90 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच चुकी है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >