सिर्फ 6 महीने और ₹5 लाख से कम खर्च... मंगलुरु के छात्रों ने पुरानी कार को बना दी सेल्फ-ड्राइविंग EV

कर्नाटक के मंगलुरु स्थित SUIET के छात्रों और शिक्षकों ने AI से लैस सेल्फ-ड्राइविंग इलेक्ट्रिक कार बनाई है. इसे तैयार करने में सिर्फ 6 महीने लगे और ₹4-5 लाख खर्च हुए. पुरानी कार को मॉडिफाई कर बनाया गया यह प्रोटोटाइप बिना ड्राइवर चल सकता है.

सेल्फ-ड्राइविंग कार बनाने के लिए टेस्ला जैसी कंपनियां अरबों रुपये खर्च कर रही हैं. लेकिन कर्नाटक के मंगलुरु स्थित श्रीनिवास यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SUIET) के छात्रों और शिक्षकों ने कम लागत में AI से लैस सेल्फ-ड्राइविंग इलेक्ट्रिक कार बना दी. इस कार का नाम 'श्री-वाहन' (Sri-Vahan) रखा गया है. आइए आपको इस गाड़ी के बारे में डिटेल में बताते हैं.

पुरानी कार से बना AI इलेक्ट्रिक प्रोटोटाइप

23 जुलाई 2026 को इस कार से पर्दा उठाया गया. खास बात यह है कि यह सिर्फ कॉलेज का एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पूरी तरह काम करने वाला प्रोटोटाइप है.  इसे आगे चलकर असली सड़कों पर यूज के लिए भी तैयार किया जा सकता है. इस टीम ने नई कार बनाने के बजाय एक पुरानी कार को मॉडिफाई किया है. इसे इलेक्ट्रिक और AI-बेस्ड सेल्फ-ड्राइविंग गाड़ी में बदला गया. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट को करीब 6 महीने में सिर्फ ₹4 से ₹5 लाख की लागत में तैयार कर लिया गया.

सामने के रास्ते को कैसे स्कैन करती है ये गाड़ी?

यह गाड़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस है. इसमें LiDAR, कैमरा-बेस्ड विजन सिस्टम, GPS नेविगेशन, अल्ट्रासोनिक सेंसर, ओडोमेट्री, विजुअल SLAM और सेंसर फ्यूजन जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का यूज किया गया है. इन सभी की मदद से यह बिना ड्राइवर के पहले से तय किए गए रास्ते पर सेफ तरीके से चल सकता है.

अगर रास्ते में कोई इंसान, जानवर या कोई दूसरी रुकावट आ जाती है, तो इसके सेंसर तुरंत उसे पहचान लेते हैं और गाड़ी अपने आप रुक जाता है. जरूरत पड़ने पर ऑपरेटर इसमें लगे कैमरे की मदद से गाड़ी पर नजर भी रख सकते हैं. इतनी ही नहीं, वो उसे दूर बैठे ही कंट्रोल कर सकते हैं. खास बात यह है कि इसमें एक AI असिस्टेंट भी दिया गया है, जो इसे और ज्यादा स्मार्ट बनाता है.

कितनी है स्पीड और रेंज?

फिलहाल टेस्टिंग के दौरान सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए इस गाड़ी की ऑटोनॉमस (बिना ड्राइवर) मोड में स्पीड सिर्फ 5 km/h रखी गई है. वहीं, मैनुअल मोड में इसे 20 से 28 km/h की स्पीड से चलाया जा सकता है. 

इसमें 5kW की लिथियम-आयन बैटरी दी गई है. यह एक बार फुल चार्ज होने पर 15 से 22 km तक की दूरी तय कर सकती है. यह गाड़ी करीब 360 kg तक का वजन उठा सकती है. यानी इसमें एक साथ 6 लोग बैठ सकते हैं या फिर इतने ही वजन का सामान ले जाया जा सकता है.

किन जगहों पर काम आएगी ये गाड़ी?

इस गाड़ी को कई अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसका यूज स्कूल और कॉलेज कैंपस में छात्रों को लाने-ले जाने, फैक्ट्री या इंडस्ट्रियल एरिया में कर्मचारियों की आवाजाही, हॉस्पिटलों में मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और एम्बुलेंस के तौर पर किया जा सकता है. इतना ही नहीं, सेना के हाई-रिस्क इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने और रिमोट कंट्रोल के जरिए रक्षा अभियानों में भी यह गाड़ी बड़ा रोल प्ले कर सकता है.

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By Ankit Anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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