कार में चूहे और AC की बदबू? 100 रुपये से कम में अपनी गाड़ी को ब्रांड न्यू रखने के 5 देसी और काम के हैक्स

कार में चूहे घुसने या AC से सीलन की बदबू आने से परेशान हैं? 100 रुपये से भी कम खर्च में इन आम परेशानियों को दूर करने के 5 असरदार घरेलू उपाय जानें. अपनी कार को रखें हमेशा फ्रेश और बिल्कुल नया.

अपनी कार को चमचमाती और खुशबूदार बनाए रखना हर कार मालिक की चाहत होती है. लेकिन, मौसम बदलने या गाड़ी कई दिनों तक खड़ी रहने पर एसी से अजीब सी सीलन भरी बदबू आने लगती है. वहीं, दूसरी तरफ बोनट के अंदर घुसकर चूहों का कीमती वायरिंग को काट देना एक ऐसी गंभीर समस्या है जिससे लगभग हर गाड़ी मालिक परेशान रहता है. इन परेशानियों को ठीक कराने के लिए गैरेज जाना या महंगे केमिकल वाले प्रोडक्ट्स खरीदना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है. राहत की बात यह है कि आप ₹100 से भी कम खर्च में कुछ आसान और असरदार घरेलू तरीकों से अपनी गाड़ी को बिल्कुल नया और फ्रेश रख सकते हैं.

चूहों की नो-एंट्री के लिए कपूर का आसान तरीका

कार का इंजन बे यानी बोनट के अंदर का हिस्सा चूहों का सबसे पसंदीदा ठिकाना होता है. चूहों को बहुत तेज गंध से सख्त नफरत होती है. इस समस्या से निपटने के लिए आप बाजार से ₹20-30 का कपूर की गोलियां ले सकते हैं. इन्हें किसी सूती कपड़े की छोटी-छोटी पोटली में बांध लें और बोनट के अंदर उन जगहों पर लगा दें जहां तार ज्यादा हों. बस ध्यान रखें कि पोटली को बहुत ज्यादा गर्म होने वाले हिस्सों जैसे इंजन से दूर रखें. इसकी गंध चूहों को कार से दूर रखेगी.

AC की सीलन और बदबू भगाएगा बेकिंग सोडा

जब भी कार का AC चालू करते ही सीलन भरी गंदी बदबू आए तो समझ जाएं कि एसी डक्ट्स में नमी जमा हो चुकी है. इसे खत्म करने के लिए ₹30-40 का बेकिंग सोडा और थोड़ा सा सफेद सिरका लें. एक स्प्रे बोतल में पानी और सिरका मिलाकर कार की सीटों और मैट्स पर हल्का छिड़काव करें. सीटों के कपड़ों पर बेकिंग सोडा छिड़ककर थोड़ी देर छोड़ दें और बाद में सूखे कपड़े से साफ कर लें. यह तरीका बिना किसी नुकसान के हर तरह की दुर्गंध को खत्म कर देता है.

ये भी पढ़ें:पुरानी गाड़ियों की हेडलाइट पर क्यों लगाई जाती थी काली पट्टी? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

पुराने ब्रश से करें एसी वेंट की गहरी सफाई

AC की ग्रिल और वेंट के अंदर जमा बारीक धूल हवा के साथ सीधे आपके फेफड़ों तक पहुंचती है. इसे साफ करने के लिए महंगे कार क्लीनिंग टूल्स खरीदने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. घर में रखा कोई पुराना पेंट ब्रश या स्पंज लें और उसे किसी लकड़ी या पतली डंडी पर लपेट लें. इसे हल्के से सैनिटाइजर या पानी से गीला करें और एसी की ग्रिल के अंदर घुमाएं. इससे अंदर जमी सारी धूल आसानी से बाहर निकल जाएगी और एसी से साफ हवा आएगी.

ये भी पढ़ें: 10 रुपये का टूथपेस्ट से चमकेगा कार का हेडलाइट, नहीं पड़ेगी एंटी-फॉग स्प्रे की जरूरत, अपनाएं ये आसान ट्रिक

कॉफी से पाएं प्रीमियम कार फ्रेशनर जैसा अहसास

दुकानों में मिलने वाले महंगे कार फ्रेशनर बहुत जल्दी उड़ जाते हैं और केमिकल की तेज महक देते हैं. इसकी जगह आप ₹50 का कॉफी पाउडर या कॉफी बीन्स का छोटा पैकेट ला सकते हैं. एक छोटी सूती थैली में दो चम्मच कॉफी पाउडर डालकर कार के कप होल्डर या डैशबोर्ड पर रख दें. कॉफी की नेचुरल और बेहतरीन खुशबू कार के अंदर की हर बुरी गंध को सोख लेती है और माहौल को एकदम तरोताजा बनाए रखती है.

शेविंग क्रीम से धुंधले शीशों की छुट्टी

बारिश या ठंड के दिनों में कार के शीशों और वाइंडशील्ड पर अंदर से भाप जमने लगती है, जिससे ड्राइव करना खतरनाक हो जाता है. इससे बचने के लिए ₹80-100 वाली किसी भी साधारण शेविंग क्रीम का इस्तेमाल करें. इसे कांच के अंदरूनी हिस्से पर हल्का सा फैलाएं और फिर सूखे सूती कपड़े या अखबार से पोंछ दें. यह शीशे पर एक ऐसी सुरक्षा परत बना देता है जिससे उस पर दोबारा धुंध नहीं जमती और विजिबिलिटी एकदम साफ रहती है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >