भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. पारंपरिक पेट्रोल बाइक छोड़कर लोग अब क्लीन एनर्जी की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं. लेकिन जब बात इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल खरीदने की आती है, तो ज्यादातर ग्राहकों के मन में एक बड़ा सवाल हमेशा घूमता रहता है कि क्या इन गाड़ियों में पेट्रोल बाइक की तरह गियर होते हैं? दरअसल, यह सवाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि गियर बदलने का जो मजा भारतीय राइडर्स को पारंपरिक मोटरसाइकिलों में मिलता है, वे उसे इलेक्ट्रिक अवतार में भी तलाश रहे हैं.
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल में गियर का झंझट: क्या वाकई बदल रहे हैं नियम या सिर्फ ऑटोमैटिक का है जमाना?
भारतीय टू-व्हीलर बाजार में इलेक्ट्रिक बाइक्स की एंट्री के बाद से ही ग्राहकों के मन में कई तरह के सवाल घूम रहे हैं. सबसे बड़ा और आम सवाल यह उठ रहा है कि क्या पेट्रोल बाइक्स की तरह इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों में भी गियर बदलने की जरूरत होती है? आम धारणा यही है कि हर मोटरसाइकिल में गियर होने ही चाहिए, लेकिन ईवी (EV) टेक्नोलॉजी ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. आज के समय में देश की सड़कों पर दौड़ने वाली ज्यादातर इलेक्ट्रिक बाइक्स बिना गियर यानी सिंगल-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ आती हैं, जो राइडिंग को बेहद आसान और स्मूथ बना देती हैं. हालांकि, गियर का असली थ्रिल पसंद करने वाले शौकीनों के लिए बाजार में कुछ दिलचस्प विकल्प भी मौजूद हैं.
क्यों नहीं होती इलेक्ट्रिक बाइक्स में गियर की जरूरत?
पारंपरिक पेट्रोल इंजन के मुकाबले इलेक्ट्रिक मोटर का काम करने का तरीका बिल्कुल अलग होता है. पेट्रोल गाड़ियों को रफ्तार पकड़ने और सही ताकत (Torque) हासिल करने के लिए एक निश्चित आरपीएम (RPM) तक पहुंचना पड़ता है, जिसके लिए गियरबॉक्स बेहद जरूरी है. इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल चालू होते ही शुरुआती सेकंड से अपनी पूरी ताकत देने में सक्षम होती हैं. यही वजह है कि एक ही गियर रेशियो की मदद से ये गाड़ियां शून्य से लेकर 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार आसानी से पकड़ लेती हैं. गियर न होने से बाइक का वजन कम रहता है, मैकेनिज्म सरल होता है और बार-बार क्लच दबाने की झंझट से मुक्ति मिल जाती है.
गियर वाली इकलौती भारतीय बाइक: मैटर ऐरा (Matter AERA)
अगर आप उन राइडर्स में से हैं जिन्हें बिना गियर की बाइक अधूरी लगती है, तो भारतीय बाजार में ‘मैटर ऐरा’ एक बड़ा नाम बनकर उभरी है. यह देश की पहली ऐसी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल है जो 4-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और क्लच के साथ आती है. कंपनी ने इसे खासतौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया है जो इलेक्ट्रिक की बचत तो चाहते हैं, लेकिन पेट्रोल बाइक जैसा गियर शिफ्टिंग का फील और कंट्रोल नहीं छोड़ना चाहते. इसे चलाने का अनुभव काफी हद तक 150cc से 200cc की रेगुलर कम्यूटर बाइक जैसा महसूस होता है.
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बिना गियर वाले धाकड़ विकल्प: रिवोल्ट से लेकर ओला तक
भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट का 95 फीसदी हिस्सा बिना गियर वाली मोटरसाइकिलों से भरा पड़ा है. रिवोल्ट की पॉपुलर सीरीज जैसे RV400, RV1 और ब्लेजएक्स (BlazeX) पूरी तरह ऑटोमैटिक हैं. इसी तरह, ओला की हालिया रोडस्टर सीरीज (Ola Roadster, X, Pro) भी बिना किसी फिजिकल गियर के आती है. अगर प्रीमियम और हाई-स्पीड सेगमेंट की बात करें, तो अल्ट्रावॉयलेट एफ77 (Ultraviolette F77), ओबेन रोर (Oben Rorr) और टॉर्क क्रैटोस आर (Tork Kratos R) जैसी गाड़ियां भी बिना गियर के डायरेक्ट ड्राइव पर चलती हैं. इनमें राइडर को बस थ्रॉटल यानी एक्सीलेटर घुमाना होता है और बाइक हवा से बातें करने लगती है.
राइडिंग मोड्स का भ्रम: क्या हैंडल का स्विच गियर है?
बाजार में मिलने वाली कई बिना गियर वाली बाइक्स (जैसे रिवोल्ट) के हैंडल पर 1, 2, 3 नंबर लिखे हुए स्विच मिलते हैं. कई बार नए ग्राहक इसे गियर समझ लेते हैं, जो कि पूरी तरह गलत है. दरअसल, ये गियर नहीं बल्कि अलग-अलग राइडिंग मोड्स (जैसे इको, सिटी और स्पोर्ट) होते हैं. इनका काम सिर्फ मोटर की टॉप-स्पीड और बैटरी की खपत को कंट्रोल करना होता है, गियर बदलने से इसका कोई सीधा संबंध नहीं होता है. कुल मिलाकर, यदि आप सिंपल और आरामदायक राइड चाहते हैं तो ऑटोमैटिक ईवी बेस्ट हैं, लेकिन अगर आपको पुरानी यादें ताजा रखनी हैं तो गियर वाली इलेक्ट्रिक का रुख किया जा सकता है.
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