ड्राइविंग केवल गाड़ी चलाने की कला नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारी, अनुशासन और सुरक्षा का प्रतीक भी है. सड़क पर लिया गया हर फैसला जीवन और मौत के बीच की दूरी तय कर सकता है. भारत में ट्रैफिक नियमों को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बन जाती है. कई लोग मान लेते हैं कि चप्पल या फ्लिप-फ्लॉप पहनकर गाड़ी चलाना गैरकानूनी है और इसके लिए चालान कट सकता है. लेकिन हकीकत कुछ और है. अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या चप्पल पहनकर गाड़ी चलाना कानूनन अपराध है? क्या इसके लिए चालान कट सकता है?
कानून क्या कहता है
मोटर व्हीकल एक्ट में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि चप्पल पहनकर गाड़ी चलाने पर जुर्माना लगेगा. 2019 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी स्पष्ट किया था कि इस तरह की व्याख्या गलत है. यानी ट्रैफिक पुलिस केवल चप्पल पहनने के आधार पर चालान नहीं काट सकती.
क्यों फैला यह भ्रम?
पिछले कई सालों से सोशल मीडिया और कुछ पुलिसकर्मियों के बयानों के कारण यह धारणा बनी कि चप्पल पहनकर ड्राइविंग करना प्रतिबंधित है. असल में यह नियमों की गलत व्याख्या थी, जिसे बाद में सरकार ने साफ किया.
सुरक्षा का पहलू क्या है?
हालांकि कानून में कोई रोक नहीं है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से चप्पल पहनकर गाड़ी चलाना जोखिम भरा हो सकता है. चप्पल पैडल पर सही पकड़ नहीं बना पाती, फिसल सकती है और अचानक ब्रेक या क्लच दबाने में दिक्कत हो सकती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ हमेशा जूते पहनकर ड्राइविंग करने की सलाह देते हैं.
दोपहिया वाहन पर और बढ़ जाता है खतरा
बाइक या स्कूटर चलाते समय चप्पल पहनना और भी खतरनाक है.सड़क पर फिसलने, पैर में चोट लगने और संतुलन बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है. इसलिए राइडिंग गियर और मजबूत फुटवियर का इस्तेमाल करना बेहतर है.
सुरक्षित ड्राइविंग के लिए समझदारी
कानून की नजर में चप्पल पहनकर गाड़ी चलाना अपराध नहीं है और इसके लिए चालान नहीं कटेगा. लेकिन सुरक्षित ड्राइविंग के लिए जूते पहनना ही समझदारी है.
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