डिजीलॉकर में ड्राइविंग लाइसेंस क्या पुलिस मानेगी? जानिए क्या है नियम

DigiLocker RC Validity: भारत सरकार ने डिजीलॉकर और mParivahan ऐप में मौजूद ड्राइविंग लाइसेंस और RC को कानूनी मान्यता दी है. ट्रैफिक पुलिस इन्हें स्वीकार करने के लिए बाध्य है, लेकिन स्क्रीनशॉट या फोटो मान्य नहीं हैं.

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल ही हमारा असली वॉलेट बन चुका है. बैंकिंग से लेकर सरकारी सेवाओं तक सबकुछ स्मार्टफोन पर उपलब्ध है. अब वाहन मालिक अपने ड्राइविंग लाइसेंस और RC डिजीलॉकर या एमपरिवहन ऐप में रखते हैं. लेकिन अक्सर सवाल उठता है कि क्या ट्रैफिक पुलिस इन्हें मान्य मानती है? जवाब है- हां, यह पूरी तरह कानूनी रूप से वैध है.

डिजिटल दस्तावेजों की कानूनी मान्यता

भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और मोटर व्हीकल नियम 1989 के तहत डिजीलॉकर और mParivahan ऐप में मौजूद दस्तावेजों को मूल दस्तावेजों के बराबर मान्यता दी है. यानी ट्रैफिक चेकिंग के दौरान स्मार्टफोन पर दिखाए गए डिजिटल DL और RC को पुलिस स्वीकार करने के लिए बाध्य है. यह भी पढ़ें: पुरानी कार में E20 पेट्रोल भरवा रहे हैं? इंजन को नुकसान से बचाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

क्या नहीं चलेगा?

लाइसेंस या RC का स्क्रीनशॉट, फोटो या गैलरी में सेव कॉपी कानूनी रूप से मान्य नहीं है. दस्तावेज सीधे ऐप से लाइव दिखाने जरूरी हैं. साथ ही, अगर आपका लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है तो उसका डिजिटल वर्जन भी अमान्य माना जाएगा.

इंश्योरेंस और अन्य दस्तावेज

अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस अपडेटेड है और VAHAN डेटाबेस में दर्ज है, तो उसकी हार्ड कॉपी रखने की जरूरत नहीं है. ऐप पर दिखने वाली जानकारी ही पर्याप्त है.

ध्यान रखने योग्य बातें

डिजीलॉकर या mParivahan ऐप से ही दस्तावेज दिखाएं.
स्क्रीनशॉट या फोटो मान्य नहीं हैं.
लाइसेंस और RC की वैधता समय पर जांचते रहें.
फोन में बैटरी और ऐप ऐक्सेस सुनिश्चित करें.

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लेखक के बारे में

Published by: Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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