दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक नई योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत पुराने ट्रक और बस मालिकों को अपने वाहन बदलकर नए बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि स्वच्छ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा. खास बात यह है कि योजना के तहत वाहन मालिकों को ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर और कई तरह की वित्तीय राहत भी मिलेगी.
किन वाहनों को मिलेगा योजना का लाभ?
यह योजना दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के उन वाहन मालिकों के लिए लाई गई है जिनके पास बीएस-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले ट्रक और बस हैं. सरकार का लक्ष्य ऐसे वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाकर कम प्रदूषण फैलाने वाले बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है.
सरकारी अनुमान के अनुसार इस योजना से करीब 2.07 लाख वाहन मालिकों को फायदा मिलेगा. इनमें लगभग 1.91 लाख ट्रक और 16 हजार से ज्यादा बसें शामिल हैं.
क्या-क्या फायदे देगी सरकार?
नई योजना के तहत वाहन मालिकों को पांच साल तक वाहन ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी. इसके अलावा वाहन की श्रेणी के अनुसार हर महीने 4,800 रुपये तक के ईंधन वाउचर भी उपलब्ध कराए जाएंगे. जो लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना चाहते हैं, उन्हें एकमुश्त अतिरिक्त लाभ भी दिया जाएगा.
राज्य सरकारें भी योजना में भागीदारी करेंगी. नए वाहनों पर पंजीकरण शुल्क में छूट, मोटर वाहन कर में 10 साल तक 100 प्रतिशत तक राहत और पुराने वाहनों से जुड़ी कुछ लंबित देनदारियों में छूट जैसे लाभ भी दिये जाएंगे. वहीं वाहन निर्माता कंपनियां भी एक्स-शोरूम कीमत पर 8 प्रतिशत तक की छूट देंगी.
पुराने वाहन का क्या होगा?
सरकार ने पुराने वाहनों के निस्तारण को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए हैं. बीएस-3 और उससे पुराने वाहनों को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर में भेजना अनिवार्य होगा. वहीं बीएस-4 वाहनों को स्क्रैप कराने के अलावा एनसीआर के बाहर ऐसे शहरों या कस्बों में बेचा जा सकेगा जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के दायरे में नहीं आते.
इसके बाद वाहन मालिक को नया बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदकर उसका पंजीकरण कराना होगा. दिल्ली में हल्के मालवाहक वाहनों के लिए केवल इलेक्ट्रिक विकल्प ही मान्य होगा, जबकि बसों के लिए बीएस-6 सीएनजी या इलेक्ट्रिक विकल्प को प्राथमिकता दी जाएगी.
प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम
दिल्ली-एनसीआर देश के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में गिना जाता है. सर्दियों के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब वाहन उत्सर्जन वायु गुणवत्ता को तेजी से प्रभावित करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने डीजल और भारी वाहनों को हटाने से प्रदूषण स्तर में उल्लेखनीय कमी लायी जा सकती है.
सरकार का कहना है कि स्वच्छ परिवहन तकनीकों को बढ़ावा देने से क्षेत्र में पर्यावरणीय सुधार होगा और लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा. यह योजना देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
योजना का संचालन पूरी तरह डिजिटल प्लैटफॉर्म के जरिये किया जाएगा. पात्रता जांच, ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर और प्रदूषण में कमी से जुड़े आंकड़ों की निगरानी एकीकृत पोर्टल पर की जाएगी. इससे प्रक्रिया पारदर्शी और आसान बनेगी.
योजना की निगरानी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति करेगी. वहीं जिला स्तर पर जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे.
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