कितने समय के बाद बदल देना चाहिए कार का टायर? इन आसान तरीकों से तुरंत पता लगाएं

Car Tyre Replacement: कार के टायर गाड़ी की सेफ्टी, ब्रेकिंग, आराम और माइलेज में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है. समय पर टायर बदलना हादसों से बचाव के लिए जरूरी है. लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर कितने समय के बाद कार के टायरों को बदल देना चाहिए? आइए आपको बताते हैं.

Car Tyre Replacement: हम अक्सर कार में पेट्रोल भरवाना, सर्विस कराना या सफाई करवाना याद रखते हैं, लेकिन टायरों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. जबकि टायर ही गाड़ी का वह हिस्सा होते हैं जो सीधे सड़क को छूते हैं. उनकी हालत का सीधा असर सेफ्टी, ब्रेकिंग, आराम और माइलेज पर पड़ता है. समय पर टायर बदलना सिर्फ मेंटेनेंस नहीं, बल्कि हादसों से बचाव भी है. लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर कितने समय के बाद कार का टायर बदलना चाहिए? आइए आपको बताते हैं. 

टायर की सेहत क्यों है इतनी जरूरी?

गाड़ी की पकड़, संतुलन और कंट्रोल पूरी तरह टायरों पर निर्भर करता है. घिसे हुए या पुराने टायर ब्रेक लगने पर दूरी बढ़ा देते हैं, गीली सड़क पर पकड़ कम हो जाती है और तेज रफ्तार में अचानक फटने का खतरा भी रहता है. इसलिए, भले ही कार चलाने में ठीक लगे, टायरों की हालत समय-समय पर जांचते रहना बेहद जरूरी है.

कब बदल देना चाहिए कार का टायर?

अक्सर लोग मानते हैं कि टायर तभी बदलने की जरूरत होती है जब उनकी ग्रिप खत्म हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं है. इस्तेमाल चाहे जितना भी हुआ हो, टायर 5 से 6 साल के भीतर बदल देना चाहिए. समय के साथ रबर धूप, गर्मी और हवा के संपर्क में आकर कमजोर हो जाता है. यहां तक कि कम चलने वाली गाड़ी के टायर भी पुराने होने पर असुरक्षित हो सकते हैं.

टायर की उम्र जांचने के लिए उसके साइड में लिखा DOT कोड देखें. यह चार अंकों का होता है, जिसमें पहले दो अंक टायर बनने का हफ्ता और आखिरी दो अंक उसका साल बताते हैं.

ट्रेड डेप्थ क्या है?

ट्रेड डेप्थ यानी टायर की घास (grooves) की गहराई, खासकर बारिश में सड़क पर पकड़ बनाने में बहुत जरूरी है. भारत समेत कई देशों में इसका कानूनी न्यूनतम स्तर 1.6 मिमी है. ज्यादातर टायर में Tread Wear Indicators (TWI) होते हैं, जो छोटे उठे हुए बार होते हैं. अगर टायर की ट्रेड डेप्थ इन बार के बराबर हो जाए, तो उसे तुरंत बदलना चाहिए. बेहतर सुरक्षा के लिए सलाह दी जाती है कि टायर तब बदलें जब ट्रेड डेप्थ 3 मिमी तक आ जाए, क्योंकि इसके नीचे ब्रेकिंग और गीली सड़क पर परफॉर्मेंस तेजी से घट जाती है.

टायर आमतौर पर कितने समय तक चलते हैं?

आमतौर पर पैसेंजर कार के टायर 40,000 से 80,000 किलोमीटर तक चल जाते हैं, लेकिन यह ड्राइविंग के तरीके, सड़क की हालत और टायर की क्वालिटी पर निर्भर करता है. तेज रफ्तार में चलाना, अचानक ब्रेक लगाना या खराब सड़कों पर गाड़ी चलाने से टायर जल्दी घिस सकते हैं. वहीं, हाई-परफॉर्मेंस टायरों की उम्र अक्सर इससे भी कम होती है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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