Coron crisis : मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु में 75,000 मजदूरों को रोजाना खाना खिलाएगी Paytm

केवीएन फाउंडेशन के साथ मिलकर मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु में रोजाना 75 हजार मजदूरों को खाना खिलाएगी पेटीएम

मुंबई : पेटीएम ने कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम को लेकर विभिन्न शहरों में दिहाड़ी मजदूरों को भोजन कराने के लिए केवीएन फाउंडेशन से हाथ मिलाने की घोषणा की. कंपनी ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि इसके तहत वह मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नोएडा जैसे शहरों में रोजाना 75 हजार मजदूरों को भोजन कराएगी.

इसे भी पढ़ें : प्रवासी मजदूरों के खाते में पांच-पांच हजार रुपये देने का आग्रह

पेटीएम के उपाध्यक्ष सिद्धार्थ पांडेय ने कहा कि इस लॉकडाउन (बंद) के कारण दिहाड़ी मजदूरों की कमाई प्रभावित हुई है. हम उनकी मदद करना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भूखे न रहें. केवीएन फाउंडेशन के साथ भागीदारी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है.

केवीएन फाउंडेशन ने 27 मार्च करे बेंगलुरु में ‘फीड माय सिटी’ मुहिम की शुरुआत की है. इसके तहत शुरुआत में 500 ऐसे लोगों को भोजन कराया जा रहा है, जिनकी आय लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुई है. फाउंडेशन का लक्ष्य अगले कुछ सप्ताह में 30 लाख लोगों को भोजन कराने का है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >