Sona Mohapatra Exclusive: बिहार दिवस पर आयी गायिका बोली- कई मौके छूटे, कई रास्ते बंद हुए; पर सच्चाई व आवाज का सौदा नहीं किया

Sona Mohapatra Exclusive: बिहार दिवस पर पटना पहुंचीं बॉलीवुड सिंगर सोना महापात्रा ने प्रभात खबर से खास बातचीत में म्यूजिक इंडस्ट्री के दबावों और अपनी बेबाकी पर खुलकर बात की. उन्होंने मैथिली भाषा और शारदा सिन्हा की सराहना की. वहीं, बिहार की बेटियों को निडर होकर सपने पूरे करने का संदेश दिया. पढ़ें बातचीत के प्रमुख अंश.

Sona Mohapatra Exclusive: मैंने हमेशा माना है कि चुप रहना आसान होता है, लेकिन ईमानदारी से जीना ज्यादा जरूरी है. सच बोलने की कीमत जरूर चुकानी पड़ती है, पर मुझे इसका कोई पछतावा नहीं है. ये बातें बॉलीवुड की बेबाक गायिका सोना महापात्रा ने प्रभात खबर से खास बातचीत में कहीं. बिहार दिवस के अवसर पर हाल ही में वह पटना पहुंचीं थी. उन्होंने अपनी सफलता, संगीत इंडस्ट्री में मौजूद दबावों और एक इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट के तौर पर अपनी पहचान को लेकर खुलकर बात की.

भाषा और लोक-संस्कृति पर बात करते हुए गायिका ने मैथिली की सराहना की. उन्होंने मैथिली को दुनिया की सबसे मीठी भाषाओं में से एक बताया और प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा को याद करते हुए कहा कि उनकी आवाज ने बिहार की लोक-संस्कृति को देश और दुनिया तक पहचान दिलाई है. वहीं, गांधी मैदान में प्रस्तुति से पहले सोना महापात्रा ने बिहार म्यूजियम का भ्रमण किया. यहां उन्होंने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नजदीक से देखा और उसे अपने जीवन के नजरिए से जोड़ा. म्यूजियम भ्रमण के दौरान उन्होंने सिलाव का खाजा चखा. साथ ही म्यूजियम के विक्रय केंद्र से लाल चूड़ियां खरीदकर बिहार की संस्कृति को अपने साथ ले जाने की बात कही.

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Q. बिहार दिवस पर आप पटना आईं और बिहार म्यूजियम भी गईं. यहां की कौन सी बात आपकी यादों में हमेशा के लिए बस गई है?
– गांधी मैदान में अपने कॉन्सर्ट से पहले बिहार म्यूजियम में बिताया समय मेरे लिए बहुत खास रहा. वहां जाकर मुझे गहराई से एहसास हुआ कि हम कौन रहे हैं.दीदारगंजयक्षी की गरिमा हो या मौर्य और गुप्त काल की कलाकृतियां. हर चीज में भारतीय सभ्यता का आत्मविश्वास झलकता है.‘लाफिंगगर्ल’ की प्रतिकृति मुझे भेंट में मिली, जो अब मेरे घर में सजी है और हर दिन मुस्कान देती है. म्यूजियम की बनावट, खुलापन और सोच मुझे बहुत पसंद आई. यह जगह इतिहास को सहेजने के साथ आगे भी देखती है.

Q. कहा जाता है कि बिहार के लोग कलाकार से सीधा दिल से जुड़ते हैं. मंच पर परफॉर्म करते वक्त आपने यहां के दर्शकों में क्या खास महसूस किया?
– यह बात बिल्कुल सही है. बिहार का दर्शक दिल से सुनते हैं और दिल से जवाब देते हैं. गांधी मैदान में हजारों लोग जब साथ गा रहे थे, तो वो सिर्फ ऑडियंस नहीं थे, वो एक सामूहिक धड़कनथे. मैंने छठ पूजा का गीत गाया, फिर मैथिली और भोजपुरी लोकगीत पेश किए. हर गीत पर लोगों की प्रतिक्रिया बताती थी कि वे अपनी जड़ों से कितने जुड़े हुए हैं. यह युवा दर्शक था, गर्व से भरा हुआ. उसी पल मुझे लगा कि बिहार को किसी एक नजरिए से नहीं देखा जा सकता.

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Q. बिहार में अब लाइव कंसर्ट और म्यूजिक इवेंट्स को काफी अहमियत मिल रही है. आप इसे कैसे देखती हैं? यहां के लोगों के लिए कोई एक गीत जो आप समर्पित करना चाहें?
– यह एक बहुत सकारात्मक बदलाव है. जब कोई राज्य लाइव म्यूजिक को अपनाता है, तो वो अपनी संस्कृति को नई ऊर्जा देता है. लाइव म्यूजिक सिर्फ मनोरंजन नहीं होता, यह लोगों को जोड़ताहै. अगर एक गीत समर्पित करना हो, तो मैं ‘उगो है सूरज देव..’ कहूंगी. अपनी मिट्टी और पूर्वजों की स्मृति के लिए. दूसरा गीत ‘मुझे क्या बेचेगा रुपैया..’ जो आत्मसम्मान की आवाज है.

Q. आप अपनी बेबाक बातों के लिए जानी जाती हैं. क्या आपको लगता है कि आज भी सच बोलने की कीमत एक कलाकार को चुकानी पड़ती है?
– हां, सच बोलने की कीमत चुकानी पड़तीहै. सवाल बस इतना है कि आप वह कीमत देने को तैयार हैं या नहीं. मैं मानती हूं कि अगर आपकी आवाज में सच्चाई है, तो उसका इस्तेमाल सिर्फ गाने के लिए नहीं, बोलने के लिए भी होना चाहिए. चुप रहना आसान है, लेकिन ईमानदारी से जीना ज्यादा जरूरी है. मुझे कभी इसका पछतावा नहीं हुआ.

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Q. आपका फिल्मी और संगीत का सफर आसान नहीं रहा. आज जब आप पीछे मुड़कर देखती हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती क्या लगती है?
– मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती समझौता न करना रही है. कई बार आसान रास्ता होता है, भीड़ को खुश करने वाला संगीत चुनने का. लेकिन बिहार दिवस जैसे मौके पर हमने सोच-समझकर प्रस्तुति दी. भक्ति, लोक, सूफी और जड़ों से जुड़ा संगीत चुना. यह रास्ता कठिन होता है, लेकिन जो संतोष मिलता है, वही असली सफलता है.

Q. आपने अक्सर इंडस्ट्री की कमियों पर आवाज उठाई है. क्या इस मुखर स्वभाव की वजह से आपके काम के मौकों पर कोई असर पड़ा?
– हां, असर पड़ाहै. और मैं इसे छुपाती नहीं हूं. लेकिन इसी वजह से मुझे वो काम भी मिला है, जो मेरे दिल के करीब है. मैं हर मौका नहीं चाहती. मुझे सही मौका चाहिए. अगर कुछ दरवाजे बंद हुए, तो कई नए रास्ते भी खुले.

Q. आज के दौर में गाना ज्यादा मायने रखता है या कलाकार की सोशल मीडिया इमेज? आपकी नजर में असली सफलता क्या है?
– सोशल मीडिया आज जरूरी है, लेकिन वह टिकाऊ नहीं होता. अगर गाना सच्चा है, तो वह समय के साथ और मजबूत होता है. मेरे लिए असली सफलता तब है, जब कोई कहे कि मेरे गीत ने उसे हिम्मत दी या मुश्किल वक्त में साथ दिया.

Q. सोशल मीडिया से जहां पहचान मिली है, वहीं ट्रोलिंग भी बढ़ी है. आप इन निगेटिव कमेंट्स का सामना कैसे करती हैं?
– मैं ट्रोल्स को बहुत गंभीरता से नहीं लेती, लेकिन पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं करती. कभी-कभी जवाब देना जरूरी होता है. सबसे जरूरी है खुद को जानना. अगर आप अपने सच के साथ खड़े हैं, तो बाहरी शोर आपको डिगा नहीं सकता.

Q. बिहार की बेटियों के लिए, जो संगीत या कला में करियर बनाना चाहती हैं, आपका क्या संदेश है?
– अपने सपनों को अनुमति का इंतजार मत करवाइए. यह संदेश सिर्फ लड़कियों के लिए नहीं, सबके लिए है. अगर आपकी प्रतिभा सच्ची है और सोच साफ है, तो वह हर किसी तक पहुंचेगी. एक स्वतंत्र, निडर और अपने दम पर खड़ी औरत होना ही अपने आप में संदेश है कि औरतें किसी से कम नहीं हैं. खुद पर भरोसा रखें, मेहनत करें और सपनों को सच करने की हिम्मत रखें.

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लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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