बांका से सुभाष वैद्य की रिपोर्ट.
Banka Weather Alert: जिले में शनिवार को उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया. तापमान में मामूली गिरावट के बावजूद वातावरण में मौजूद नमी के कारण लोगों को राहत नहीं मिली. घरों के भीतर पंखे और कूलर भी बेअसर नजर आए, जबकि बाजारों और सड़कों पर दोपहर के समय सामान्य दिनों की तुलना में कम चहल-पहल देखी गई. मौसम विभाग ने फिलहाल गर्मी से राहत के संकेत नहीं दिए हैं, हालांकि 6 से 10 जून के बीच आंधी और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है.
तापमान घटा, लेकिन उमस ने बढ़ाई परेशानी
शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. शुक्रवार की तुलना में अधिकतम तापमान में एक डिग्री की कमी आई, लेकिन लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका. हवा में नमी बढ़ने से उमस का असर और ज्यादा महसूस किया गया. सुबह से ही पसीना और बेचैनी लोगों को परेशान करती रही.
दोपहर के समय बाजारों, चौक-चौराहों और प्रमुख सड़कों पर सामान्य से कम भीड़ दिखाई दी. लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलते नजर आए.
बदलते मौसम से अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज
लगातार बदलते मौसम का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है. जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बुखार, सर्दी, डिहाइड्रेशन और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है.
चिकित्सकों ने लोगों को दिन के समय धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि सुबह और शाम के समय ही जरूरी कार्यों के लिए बाहर निकलना बेहतर होगा. अधिक शारीरिक श्रम और सीधे धूप के संपर्क से बचना चाहिए.
आंधी और बारिश की संभावना, किसानों के लिए अहम सलाह
बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर और भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार 6 से 10 जून के बीच जिले के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आंधी और हल्की वर्षा हो सकती है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अधिकतम तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. सुबह में आर्द्रता 70 से 75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे उमस का असर बना रहेगा.
मानसून पर पड़ सकता है असर
जलवायु मॉडल के ताजा संकेतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अलनीनो की परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं. यदि ऐसा होता है तो सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका बढ़ सकती है.
कम बारिश की स्थिति खेती और जल संसाधनों दोनों पर असर डाल सकती है. ऐसे में किसान अभी से वैकल्पिक तैयारी पर ध्यान दे रहे हैं.
धान की नर्सरी और बीजोपचार पर जोर
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम अनुकूल रहने पर लंबी अवधि वाली धान की किस्मों जैसे सबौर श्री, स्वर्णा सब-1, राजेंद्र मंसूरी, राजेंद्र श्वेता और स्वर्णा की नर्सरी तैयार करें. नर्सरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करने और प्रमाणित बीजों का चयन करने की सलाह दी गई है.
विशेषज्ञों ने बुवाई से पहले बीजोपचार को जरूरी बताया है. उनका कहना है कि 1.5 ग्राम बविस्टिन प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करने से फसल रोगों से बचाव संभव है और बेहतर उत्पादन मिल सकता है.
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