Yair Lapid Slams Netanyahu: इजरायल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर जोरदार हमला बोला है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब मंगलवार देर रात अमेरिका और ईरान के बीच 11वें घंटे में दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) का समझौता हो गया. लैपिड ने इस समझौते को इजरायल के इतिहास की सबसे बड़ी ‘राजनीतिक आपदा’ बताया है. उनका कहना है कि जब इजरायल की सुरक्षा से जुड़े इतने बड़े फैसले लिए जा रहे थे, तब नेतन्याहू बातचीत की टेबल पर मौजूद तक नहीं थे.
नेतन्याहू पर लक्ष्यों में फेल होने का आरोप
लैपिड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि देश की सेना ने अपना काम बखूबी किया और जनता ने भी हिम्मत दिखाई, लेकिन नेतन्याहू रणनीतिक रूप से पूरी तरह फेल रहे. उन्होंने आरोप लगाया कि नेतन्याहू ने युद्ध के जो लक्ष्य तय किए थे, उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ. लैपिड के मुताबिक, नेतन्याहू की लापरवाही और खराब प्लानिंग की वजह से इजरायल को जो नुकसान हुआ है, उसे ठीक करने में सालों लग जाएंगे.
क्या थे इजरायल के बड़े टारगेट?
इजरायल के लिए इस युद्ध का मुख्य मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना था, जिसे नेतन्याहू अपने देश के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते थे. इसके अलावा ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल ताकत को कम करना और वहां की सरकार के दबदबे को रोकना भी इजरायल के एजेंडे में था. एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल में इस समझौते को लेकर काफी चिंता है क्योंकि वहां के लोग इससे कहीं ज्यादा हासिल करना चाहते थे.
लेबनान पर हमला जारी रखने की जिद
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस सीजफायर में मध्यस्थ की भूमिका निभाई. उन्होंने दावा किया कि इस समझौते में लेबनान में भी शांति शामिल है, लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने साफ कर दिया कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता. इसके तुरंत बाद इजरायली सेना ने लेबनान के टायर (Tyre) इलाके के लोगों को घर खाली कर उत्तर की ओर जाने की चेतावनी दी और वहां हमले शुरू कर दिए. हालांकि, रॉयटर्स ने लेबनानी सूत्रों के हवाले से बताया कि हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर फिलहाल फायरिंग रोक दी है.
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सीजफायर के बीच कई देशों में मिसाइल अलर्ट
सीजफायर की घोषणा के बाद भी तनाव कम नहीं हुआ है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, इजरायल, बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए. अबु धाबी में एक गैस प्लांट में ईरानी हमले के बाद आग लग गई. वहीं, इजरायली सेना ने भी ईरान के शिराज में एक पेट्रोकेमिकल साइट और हथियारों की सप्लाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पुलों पर हमले किए. इजरायल का कहना है कि वह अमेरिका के शांति प्रयासों का समर्थन तो करता है, लेकिन लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ उसका अभियान जारी रहेगा.
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