जंग में फंसे ईरान ने अजरबैजान पर हमला क्यों किया? एक और देश से मोल ली दुश्मनी; अटैक का खतरा

Why Iran Attacked Azerbaijan: अजरबैजान के ऊपर गुरुवार को दो ड्रोन गिरे. इन हमलों के लिए ईरान पर दोष मढ़ा गया. अजरबैजान ने भी ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे आतंकी कार्रवाई करार दिया. वहीं ईरान ने इससे इनकार किया है.

Why Iran Attacked Azerbaijan: ईरान के अजरबैजान के नखचिवान स्वायत्त क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है. अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने इस घटना को ‘कायरतापूर्ण हमला’ बताते हुए ईरान से आधिकारिक माफी की मांग की है. हालांकि ईरान ने इस हमले में किसी भी तरह की भूमिका से साफ इनकार किया है. यह घटना मध्य पूर्व और दक्षिण काकेशस में जारी संघर्ष को और व्यापक बना सकती है. तो आखिर ईरान ने रूस के दोस्त अजरबैजान पर हमला क्यों किया?

अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार गुरुवार दोपहर नखचिवान में दो ड्रोन हमले हुए. एक ड्रोन ने नखचिवान एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन को निशाना बनाया, जबकि दूसरा ड्रोन शकराबाद गांव में एक स्कूल के पास गिरा. इस हमले में दो नागरिक घायल हो गए और एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचा. अजरबैजान सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को तुरंत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.

भड़के अजरबैजान के राष्ट्रपति

राष्ट्रपति अलीयेव ने कहा कि अजरबैजान इस ‘आतंकी कार्रवाई’ को बर्दाश्त नहीं करेगा. अजरबैजान की सरकार ने तेहरान से इस मामले में स्पष्ट जवाब मांगा है और ईरान के राजदूत मोजतबा डेमिरचिलौ को तलब किया है. अजरबैजान ने यह भी कहा कि वह इस घटना के जवाब में ‘उचित कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.’ वहीं रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि राष्ट्रपति अलीयेव ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि वह इस बगैर उकसावे के किए गए आतंकवादी कृत्य और आक्रमण को सहन नहीं करेंगे. उन्होंने सशस्त्र बलों से उचित जवाबी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि उनका देश किसी भी दुश्मन ताकत के खिलाफ अपनी शक्ति दिखाने के लिए तैयार हैं. ईरान को ये नहीं भूलना चाहिए.

ईरान सीमा पर रोकी ट्रक ट्रैफिक

द कैस्पियन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अजरबैजान ने ईरान के साथ अपनी राज्य सीमा पर ट्रकों की आवाजाही को अस्थायी रूप से पूरी तरह निलंबित करने का फैसला किया है. सरकार के बयान के अनुसार, ईरानी क्षेत्र से आए ड्रोन हमलों के कारण पैदा हुई मौजूदा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के उल्लंघन को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. इसके तहत अजरबैजान-ईरान सीमा पर सभी बॉर्डर क्रॉसिंग पॉइंट्स से ट्रकों की आवाजाही फिलहाल रोक दी गई है. इनमें ट्रांजिट वाहन भी शामिल हैं.

ईरान ने हमलों से किया इनकार

दूसरी ओर ईरान ने हमले में शामिल होने के आरोपों को खारिज कर दिया. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव से फोन पर बातचीत में कहा कि तेहरान का इस हमले से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने दावा किया कि यह हमला संभवतः ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों को खराब करने के लिए किया गया हो सकता है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने भी कहा कि ईरान कभी अपने पड़ोसी देशों को निशाना नहीं बनाता. उनका कहना है कि ईरान केवल उन सैन्य ठिकानों पर हमला करता है जो अमेरिका और इजरायल जैसे दुश्मन देशों की गतिविधियों से जुड़े होते हैं.

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ईरान ने अजरबैजान पर हमला क्यों किया?

इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. तुर्किये ने भी हमले की कड़ी निंदा करते हुए अजरबैजान के समर्थन का ऐलान किया है. लेकिन अगर इस यह सच है कि ईरान ने ही यह अटैक किया है, तो आखिर क्या थी इसकी वजह? टाइमलाइन डेली के विशेषज्ञों के अनुसार इसके कई कारण हो सकते हैं. इनमें-

1. अजरबैजान पर इजरायली का खुफिया ठिकाना बनने का आरोप

ईरान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अजरबैजान अपनी जमीन को इजरायली खुफिया गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने दे रहा है. तेहरान का कहना है कि इससे उसकी उत्तरी सीमा की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है. इसी वजह से ईरान कई बार अजरबैजान को चेतावनी भी दे चुका है कि अगर यह गतिविधियां नहीं रुकीं तो वह कार्रवाई कर सकता है.

2. अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जवाबी रणनीति

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की कोशिश की. ऐसे में अजरबैजान को निशाना बनाना उस नेटवर्क पर हमला माना जा रहा है, जिसे ईरान अमेरिका-इजरायली से जुड़ा मानता है.

3. नखचिवान कॉरिडोर में अमेरिकी हित

नखचिवान एन्क्लेव को जोड़ने के लिए प्रस्तावित ट्रांजिट कॉरिडोर अमेरिका की मध्यस्थता से हुए शांति समझौते का हिस्सा है. इस परियोजना को ‘Trump Route for International Peace and Prosperity (TRIPP)’ कहा गया है. इस रूट के विकास में अमेरिका को अधिकार मिलने से ईरान को आशंका है कि अमेरिकी प्रभाव उसके पड़ोस में बढ़ जाएगा.

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4. क्षेत्रीय ट्रांजिट परियोजनाओं को लेकर ईरान की चिंता

ईरान को डर है कि नए ट्रांजिट मार्ग बनने से वह आर्मेनिया और कॉकस क्षेत्र से अलग-थलग पड़ सकता है. इसलिए वह इन परियोजनाओं का विरोध करता रहा है और उन्हें अपनी भू-राजनीतिक स्थिति के लिए खतरा मानता है.

5. सीमा के पास विदेशी सैन्य प्रभाव का डर

ईरान को आशंका है कि नखचिवान और आसपास के इलाकों में अमेरिका या अन्य विदेशी शक्तियों की मौजूदगी बढ़ सकती है. यह स्थिति उसकी सीमाओं के पास संभावित सैन्य दबाव पैदा कर सकती है.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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