फॉक्स न्यूज से बातचीत में जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य इस क्षेत्र से तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है. ताकि वैश्विक और अमेरिकी बाजार में ऊर्जा की कीमतें कम रखी जा सकें. वेंस ने कहा, "हम ईरानियों से बात कर रहे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल-गैस की आपूर्ति अधिकतम करने की कोशिश में हैं. ईरान ने आश्वासन दिया है कि वह वाणिज्यिक जहाजों पर हमला नहीं करेगा, लेकिन हम उन पर भरोसा नहीं करते."
वेंस ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है और आगे भी उस पर दबाव जारी रहेगा.
ईरान का रुख: मार्ग खोलना शर्तों पर निर्भर
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात नियंत्रण को लेकर बनी समझ का मतलब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलना नहीं है. अराघची के अनुसार, तकनीकी जटिलताओं के कारण फिलहाल एक अस्थायी मार्ग पर विचार किया जा रहा है, जो आगे चलकर स्थायी व्यवस्था का आधार बन सकता है. ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि इस्लामाबाद समझौते के तहत शुरुआती हफ्तों में जहाजों की आवाजाही 60 फीसदी तक लौट आई थी, लेकिन अमेरिका द्वारा नए मार्ग बनाने की कोशिशों से गतिरोध पैदा हुआ. उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना अमेरिका पर निर्भर करेगा.
ओमान की मध्यस्थता से सुलह की उम्मीद
इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों और रॉयटर्स के अनुसार ओमान और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति हुई है. वाशिंगटन को उम्मीद है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक तेल जहाजों की आवाजाही को लेकर समझौता हो सकता है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि समझौता लागू होने और ईरानी प्रतिबद्धता पूरी होने पर अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने पर विचार कर सकता है. वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भरोसा जताया है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है.
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