ट्रंप-नेतन्याहू में तनातनी हुई, तो US को लगा इजरायल से जासूसी का खतरा! अमेरिकी अधिकारी अपना रहे ऐसे जुगाड़

US Fears Israel Spying: अमेरिकी अधिकारियों को इजरायल की जासूसी का खतरा महसूस हो रहा है. एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पेंटागन ने इजरायल की खुफिया गतिविधियों को लेकर खतरे का स्तर बढ़ा दिया है. यह घटनाक्रम डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान नीति को लेकर बढ़ते मतभेदों के बीच सामने आया है.

US Fears Israel Spying: अमेरिका और इजरायल को दुनिया के सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों में गिना जाता है, लेकिन हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर बढ़ती दूरी की चर्चा तेज हो गई है. खासकर ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अलग-अलग रुख ने नए सवाल खड़े किए हैं. इसी बीच अमेरिकी मीडिया संस्थान एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट ने दावा किया है कि पेंटागन की इजरायल की खुफिया गतिविधियों की वजह चिंता काफी बढ़ गई है.

पेंटागन की एजेंसी ने खतरे का स्तर बढ़ाया

एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, दो मौजूदा और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) ने हाल ही में इजरायल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे को ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा है. यह एजेंसी का सबसे ऊंचा इंटरनल एसेसमेंट माना जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि इजरायली खुफिया एजेंसियां वाशिंगटन की मिडिल ईस्ट पॉलिसी और प्रशासन के भीतर चल रही चर्चाओं से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकती हैं.

एक अमेरिकी अधिकारी ने एनबीसी न्यूज से कहा कि अमेरिका पहले से ही इजरायल यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानियां बरतता रहा है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) की रक्षा एवं सुरक्षा विभाग की उपाध्यक्ष एमिली हार्डिंग ने एनबीसी न्यूज से कहा कि इजरायल की खुफिया प्रणाली बेहद आक्रामक मानी जाती है. वह यह जानने में गहरी दिलचस्पी रखती है कि अमेरिका क्या कर रहा है. इजरायली एजेंसियों को लंबे समय से काफी एग्रेसिव तरीके से इनफॉर्मेशन जुटाने वाला माना जाता रहा है.

अमेरिकी अधिकारी पहले से अपनाते रहे हैं विशेष सुरक्षा उपाय

रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायल जाने वाले वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी कई बार बर्नर फोन, अस्थायी कंप्यूटर और विशेष संचार व्यवस्था का उपयोग करते हैं. पूर्व राजनयिकों, खुफिया अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कई अमेरिकी अधिकारी इजरायल में होटल के कमरों या अन्य संवेदनशील स्थानों पर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने से भी बचते हैं.

बर्नर फोन क्या होते हैं?

बर्नर फोन ऐसे मोबाइल फोन होते हैं जिन्हें आमतौर पर कम समय के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से खरीदा जाता है. इनका उपयोग किसी विशेष काम, मिशन या सीमित अवधि के संचार के लिए किया जाता है. अक्सर इनमें प्रीपेड सिम कार्ड लगाए जाते हैं और इनमें बहुत कम व्यक्तिगत जानकारी या डेटा रखा जाता है. काम पूरा होने के बाद फोन और सिम को बंद कर दिया जाता है, बदल दिया जाता है या कुछ मामलों में नष्ट भी कर दिया जाता है, ताकि उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाए.

खुफिया एजेंसियां, सैन्य अधिकारी, अंडरकवर एजेंट और सेंसिटिव ऑपरेशंस में शामिल लोग सुरक्षा कारणों से बर्नर फोन का इस्तेमाल करते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति की पहचान, लोकेशन या संपर्क नेटवर्क को ट्रैक किए जाने के जोखिम को कम करना होता है. 

हालांकि, बर्नर फोन सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों तक सीमित नहीं हैं. कई लोग यात्रा के दौरान, अस्थायी व्यावसायिक कार्यों के लिए या अपनी निजी और पेशेवर बातचीत को अलग रखने के लिए भी ऐसे फोन का उपयोग करते हैं. आमतौर पर ये साधारण फीचर फोन या कम कीमत वाले स्मार्टफोन होते हैं, जिन्हें लंबे समय तक व्यक्तिगत डिवाइस के रूप में इस्तेमाल करने के लिए नहीं खरीदा जाता.

सात पन्नों की रिपोर्ट में जताई गई चिंता

एनबीसी न्यूज के अनुसार, डीआईए ने हाल के सप्ताहों में एक आंतरिक नोटिस जारी किया था, जिसके साथ सात पन्नों का एक एसेसमेंट डॉक्यूमेंट भी था. रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया कि ह्यूमन इंटेल और टेक्नोलॉजी के जरिए जानकारी जुटाने की इजरायल की क्षमता को ‘क्रिटिकल लेवल’ का माना जाना चाहिए.

हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई, जिसकी वजह से सीधे यह फैसला लिया गया, बल्कि कई बातों को ध्यान में रखते हुए यह एसेसमेंट तैयार किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है.

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इजरायल ने आरोपों को बताया पूरी तरह झूठ

इन दावों पर इजरायल ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. वॉशिंगटन में इजरायली दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी किए जाने के आरोप पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने कहा कि इजरायल अमेरिकी संस्थानों या सरकारी अधिकारियों के खिलाफ खुफिया जानकारी एकत्र नहीं करता. उन्होंने कहा कि इजरायल की खुफिया गतिविधियां उसके विरोधियों पर केंद्रित होती हैं, मित्र देशों पर नहीं.

व्हाइट हाउस ने भी रिपोर्ट को खारिज किया

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने भी रिपोर्ट को गलत बताया. उन्होंने कहा कि यह जानकारी ऐसे लोगों से ली गई है जिन्हें आंतरिक घटनाक्रम की पूरी जानकारी नहीं है. इसलिए रिपोर्ट में किए गए दावों को सही नहीं माना जा सकता.

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच क्यों बढ़ी दूरी?

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद चर्चा का विषय बने हुए हैं. अप्रैल में हुए संघर्ष-विराम के बाद डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ पीस डील करने पर जोर दे रहे हैं. दूसरी ओर बेंजामिन नेतन्याहू लगातार यह सवाल उठाते रहे हैं कि क्या तेहरान किसी भी समझौते का ईमानदारी से पालन करेगा

रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने के पक्ष में है. लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े अभियानों को लेकर भी अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद सामने आए हैं. इजरायल ने बीते दिनों लेबनान में काफी अंदर तक अटैक किया. इजरायली सेना ने ब्यूफोर्ट कैसल पर अपना झंडा तक फहरा दिया था. 

फोन कॉल में भी दिखा था तनाव

अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हाल में हुई फोन बातचीत काफी तनावपूर्ण रही. रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रंप ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर संभावित इजरायली हवाई हमलों को लेकर नाराजगी जताई थी. उन्होंने नेतन्याहू को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद दोनों नेताओं के रिश्तों में बढ़ती खटास को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं.

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By Anant narayan shukla

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अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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