अमेरिका ने ईरान पर दूसरी बार सैन्य हमला किया. इस दौरान होर्मुज के पास मौजूद कोस्टल डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल कमर्शियल जहाजों को धमकाने के लिए किया जा रहा था. वहीं, ईरान ने इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई बताया और चेतावनी दी कि वह क्षेत्र से होने वाले तेल और एनर्जी एक्सपोर्ट में और बड़ी रुकावट पैदा कर सकता है.
U.S. Central Command @CENTCOM ने गुरुवार (16 जुलाई) सुबह एक्स पर हमले की जानकारी दी. एक्स पर उसने लिखा कि अमेरिकी सेना ने 15 जुलाई दोपहर 3 बजे (भारतीय समयानुसार रात करीब 12:30 बजे) ईरान पर दूसरे चरण की सैन्य कार्रवाई शुरू की. इस दौरान होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को खतरा पैदा करने वाले ईरानी सैन्य ठिकानों, कोस्टल डिफेंस सिस्टम और मिसाइल लॉन्च साइटों को टारगेट में रखा गया.
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कुराकाओ के झंडे वाले खाली तेल टैंकर पर हमला
अमेरिकी सेना ने 15 जुलाई को ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकेबंदी के तहत एक तेल टैंकर को रोक दिया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, कुराकाओ के झंडे वाला खाली तेल टैंकर एम/टी बेल्मा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से ईरान के खरग द्वीप की ओर जा रहा था. अमेरिका का दावा है कि जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने नाकेबंदी का पालन नहीं किया. इसके बाद अमेरिकी सैन्य विमान ने हेलफायर मिसाइल से जहाज की चिमनी पर हमला किया, जिससे वह आगे नहीं बढ़ सका. CENTCOM ने कहा कि अब यह टैंकर ईरान की ओर नहीं जा रहा है.
अमेरिकी सेना ने 14 जुलाई को शाम 4 बजे (ईटी) से ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, पहले 24 घंटों में दो कमर्शियल जहाजों को रास्ता बदलने के लिए कहा गया, जबकि आदेश नहीं मानने वाले एक जहाज को टारगेट किया गया. अमेरिकी सेना ने कहा कि नाकेबंदी का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के लिए उसकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.
