वेनेजुएला के बाद ईरान में एंट्री ले सकता है अमेरिका, विरोध प्रदर्शन में 35 की मौत की आशंका; रिपोर्ट का दावा
US Israel considering potential intervention in Iran: ईरान में सरकार विरोधी आंदोलनों में तेजी आ रही है. लोग सड़कों पर उतरकर जोरदार ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं. इसके जवाब में शासन भी कड़ाई कर रहा है, दावा किया जा रहा है कि अब तक 35 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. इसके जवाब में अमेरिका और इजरायली अधिकारी अब ईरान में सीधा हस्तक्षेप करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.
US Israel considering potential intervention in Iran: ईरान में शासन सत्ता के खिलाफ आंदोलन जोर पकड़ रहा है. बीते साल के आखिरी हफ्ते में तेहरान के बाजार बंद से शुरू हुआ अभियान देश के अन्य हिस्सों में फैल गया है. लोगों के बीच अली खामनेई के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं, तो कहीं-कहीं रेजा पहलवी के समर्थन में भी नारेबाजी हो रही है. अमेरिका और इजरायल के अधिकारी ईरान में जारी अशांति के जवाब में संभावित नीतिगत विकल्पों का आकलन कर रहे हैं. द जेरूसलम पोस्ट और अन्य इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि इन आंदोलनों के बाद दोनों देशों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है.
ईरान के विभिन्न शहरों में लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं और वेनेजुएला में अमेरिका की हालिया कार्रवाइयों ने क्षेत्रीय रणनीतिक गणनाओं को प्रभावित किया है. द जेरूसलम पोस्ट लिखता है कि ईरान में समय-समय पर विरोध प्रदर्शनों की लहरें उठती रही हैं, जिनके पीछे आर्थिक दबाव, राजनीतिक दमन और मौलवी शासन के प्रति असंतोष जैसे कारण रहे हैं. हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने पहले ऐसे आंदोलनों को दबाने में सफलता पाई है, लेकिन मौजूदा प्रदर्शनों की निरंतरता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर ध्यान खींचा है. वहीं टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 35 हो गई है.
अब तक 1,200 से ज्यादा लोग हिरासत में
अखबार ने अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया कि एक सप्ताह से अधिक समय से जारी इन प्रदर्शनों में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. एजेंसी के अनुसार, मारे गए लोगों में 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरान की सुरक्षा बलों के दो सदस्य शामिल हैं. प्रदर्शन ईरान के 31 में से 27 प्रांतों के 250 से अधिक स्थानों तक फैल चुके हैं. वहीं, ईरानी फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि इन प्रदर्शनों के दौरान 250 पुलिसकर्मी और स्वयंसेवी बसीज बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं.
ट्रंप ने दी थी धमकी
2 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि ईरानी अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल करते हैं, तो अमेरिका जवाब देने के लिए “लॉक्ड एंड लोडेड” है. ईरान के कई प्रांतों में बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर फैलते प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने यह बयान दिया. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, “अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें हिंसक तरीके से मारता है, जैसा कि उनकी परंपरा रही है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनके बचाव के लिए आगे आएगा. हम पूरी तरह तैयार हैं. इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!”
प्रिंस पहलवी भी प्रदर्शनकारियों को खुलकर दे रहे समर्थन
इस बीच, निर्वासन में रह रहे ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी भी खामेनेई शासन के खिलाफ प्रदर्शनकारियों को खुलकर समर्थन दे रहे हैं. सोमवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “प्रिय हमवतन साथियों, मालेकशाही के बहादुर और सम्मानित लोगों पर की गई गोलीबारी, शहर के युवाओं की हत्या और इसके बाद इलाम अस्पताल पर शासन के भाड़े के लोगों का कायरतापूर्ण हमला, एक स्पष्ट अपराध है, जो 2022 के ‘ब्लडी फ्राइडे’ को जाहेदान में हुए नरसंहार की याद दिलाता है.”
उन्होंने आगे लिखा, “जो शासन निहत्थे युवाओं को मारता है और चिकित्सा केंद्रों पर छापे मारता है, उसकी कोई वैधता नहीं रह जाती और वह अपने अंत के करीब है. मालेकशाही और इलाम के पीड़ित और देशभक्त लोगों के साथ मैं शोक और एकजुटता में खड़ा हूं और आश्वस्त करता हूं कि खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक के भ्रष्ट, हत्यारे सरगनाओं को इस अपराध की कीमत चुकानी पड़ेगी.”
वेनेजुएला पर हमले के बाद ईरान की ओर मुड़ सकता है US
इसके अलावा, पहलवी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा, “मैंने इस संक्रमण का नेतृत्व करने के लिए कदम आगे बढ़ाया है… यह आत्मनिर्णय, आजादी और हमारे देश के पुनर्निर्माण के बारे में है.” डोनाल्ड ट्रंप की ओर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ की गई कार्रवाई ने भी ईरानी प्रदर्शनकारियों को और प्रोत्साहित किया है, जिससे मध्य-पूर्व की स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है. इसी बीच मीडिया में यह भी खबर सामने कि खामनेई ईरान छोड़कर भागने वाले हैं, उनका संभावित देश रूस या ईराक हो सकता है. हालांकि भारत में ईरान के राजदूत ने इसको पूरी तरह से खारिज कर दिया.
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