ईरान पर हमला करने को तैयार US, अगर जंग छिड़ी तो बदल सकता है दुनिया का भूगोल; 6 पॉइंट

US Iran War Outcome: अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ सकती है. डोनाल्ड ट्रंप ने अब आखिरी अल्टीमेटम के तहत 10-15 दिन का समय दिया है. अगर दोनों देशों के बीच बात नहीं बनी और युद्ध हो गया, तो मिडिल ईस्ट में तबाही आ सकती है. 6 पॉइंट में समझें कैसे

US Iran War Outcome: संयुक्त राज्य अमेरिका (US) और ईरान जंग के मुहाने पर खड़े हैं. अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी करता हुआ दिखाई दे रहा है. हाल के हफ्तों में वॉशिंगटन ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. अपनी नौसेना के जहाज, लड़ाकू विमान और मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद सैनिकों की बदौलत अमेरिका शिया मुल्क पर अपना दबाव बढ़ाता जा रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु हथियार की आकांक्षाओं को छोड़कर एटमी वीपंस बनाने से तौबा कर ले. ईरान अपने बयानों से ऐसा करने की बात तो कहता है, लेकिन चोरी छिपे न्यूक्लियर वीपन बनाने की पूरी तैयारी कर रहा है. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब 10 दिन का समय दिया है. अगर यह बातचीत विफल रहती है और ट्रंप हमले का आदेश देने का फैसला करते हैं, तो क्या-क्या हो सकता है? 

अमेरिकी हमले के संभावित लक्ष्य तो ज्ञात हैं, लेकिन नतीजा क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है. ऐसे में अमेरिका और ईरान संघर्ष के यह 6 पॉसिबल आउटकम हो सकते हैं. 

टारगेटेड हमला; सरकार गिरे और राजनीतिक बदलाव हो जाए

अमेरिका ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े ठिकानों, मिसाइल स्थलों और उसके परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्सों पर लक्षित हवाई और नौसैनिक हमले कर सकता है. इस परिदृश्य में ईरानी नेतृत्व कमजोर पड़ता है और अंततः गिर जाता है, तो लोकतंत्र की ओर बढ़ने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. हालांकि, इराक और लीबिया में पश्चिमी हस्तक्षेपों ने शासकों को तो हटाया, लेकिन उसके बाद वर्षों तक अस्थिरता बनी रही.

ईरान में अभी सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खामेनेई के सामने अभी तक कोई भी नेता सामने नहीं आया है. ईरान में धार्मिक सत्तावादी शासन है. चुने हुए नेताओं के पास शासन नहीं बल्कि सुप्रीम लीडर राज्य के प्रमुख हैं. वह सैन्य, न्याय और विदेश नीति से जुड़े मामलों पर फैसला लेते हैं. फिलहाल मसूद पेजेशकियान ईरान के राष्ट्रपति हैं. अगर अमेरिका की यह नीति सफल रहती है, तो सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हीं के हाथ आ सकती है. 

शासक हटा दिया जाए; शासन बचा रहे और नीति बदले

एक अन्य संभावना यह है कि ईरान में ‘वेनेजुएला मॉडल’ लागू हो. यानी नेतृत्व सत्ता में बना रहे, लेकिन अमेरिकी सैन्य ताकत सुप्रीम लीडर (अयातोल्लाह अली खामेनेई) को ही हटा दे. इसके बाद दबाव में ईरान अपनी नीतियों में बदलाव करे. इसका मतलब यह है कि वह क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को समर्थन कम करे, मिसाइल और परमाणु गतिविधियों को सीमित करे और घरेलू दमन में ढील दे.

वेनेजुएला में बाहरी दबाव से नेतृत्व नहीं हटा, लेकिन सीमित बदलाव के लिए मजबूर हुआ है. खासकर मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज राष्ट्रपति बनीं. फिर भी, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई दशकों से ऐसे तंत्र का नेतृत्व कर रहे हैं जिसने बदलाव का विरोध किया है. हालांकि, ईरान वेनेजुएला नहीं है. यह क्षेत्रफल के लिहाज से बहुत बड़ा देश है. इसकी सेना भी बड़ी है और यह क्षेत्र अमेरिका से दूर भी है. ऐसे में ईरान में बड़े सुधार की संभावना कम है.

पतन के बाद सैन्य शासन या अराजकता

अगर अमेरिकी हमलों से व्यवस्था कमजोर होती है, लेकिन विरोध प्रदर्शन सत्ता पर काबिज नहीं हो पाते, तो सुरक्षा बल हस्तक्षेप कर सकते हैं. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का राजनीति और व्यापार में गहरा प्रभाव है. BBC की रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी हमले के बाद पैदा हुई अव्यवस्था में सैन्य नेतृत्व वाली सरकार उभर सकती है.

एक और परिणाम यह हो सकता है कि नेतृत्व गिर जाए, लेकिन उसकी जगह कोई स्पष्ट सत्ता स्थापित न हो. करीब 9.3 करोड़ की आबादी वाला ईरान आंतरिक संघर्ष का सामना कर सकता है. कुर्द, बलूच और अजरबैजानी जातीय अल्पसंख्यक सत्ता के शून्य में अपने क्षेत्रों की रक्षा के लिए आगे आ सकते हैं. पड़ोसी देश अस्थिरता और संभावित शरणार्थी संकट से डरते हैं.

हालांकि, अब तक विरोध प्रदर्शनों के चलते राज्य के भीतर बड़े पैमाने पर दलबदल नहीं हुआ है. सत्ता में बैठे लोगों ने नियंत्रण बनाए रखने के लिए बल का इस्तेमाल किया है. क्षेत्र में अमेरिकी बलों की बढ़ी हुई है, ऐसे में  तनावपूर्ण स्थिति के बीच दोनों संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता. 

पर्शियन गल्फ में नौसैनिक टकराव

खाड़ी में सीधे नौसैनिक टकराव का खतरा भी है. अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया है, इसमें USS Gerald R Ford भी शामिल है. अमेरिका की मुख्य चिंताओं में से एक ईरान का ‘स्वार्म अटैक’ है, जिसमें ड्रोन और तेज रफ्तार नौकाएं एक साथ किसी जहाज को निशाना बनाती हैं. हालांकि इसे कम संभावना वाला माना जाता है, लेकिन यदि किसी अमेरिकी युद्धपोत को डुबो दिया गया, तो तनाव तेजी से बढ़ जाएगा. 

अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान का पलटवार; क्षेत्र में पैदा होगी बड़ी मुसीबत 

ईरान ने चेतावनी दी है कि वह किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब देगा. उसके नेतृत्व ने कहा है कि उसकी ‘उंगली ट्रिगर पर है’ और हमला होने पर अमेरिकी बलों को मुंहतोड़ जवाब देगा. ईरान खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल कर सकता है, जिनमें बहरीन, कतर और जॉर्डन शामिल हैं. 

इजरायल तो उसका सबसे बड़ा दुश्मन है ही. वह भी जरूर निशाना बनेगा. खाड़ी के अन्य अरब देश भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि किसी भी अमेरिकी कार्रवाई से उनके इलाकों पर जवाबी हमले हो सकते हैं.

होर्मूज जलडमरूमध्य में बाधा; व्यापार में बाधा

ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर सकता है. यह ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा जलमार्ग है. इस क्षेत्र से दुनिया का 25% ऑयल 20% नैचुरल गैस का ट्रेड होता है. ईरान के ऊपर हमला हुआ तो वह इस क्षेत्र में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा सकता है, जिससे समुद्री यातायात में बाधा आएगी और यह रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करेगी. तेल के दाम बढ़ेंगे, दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है. ईरान ने 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध के दौरान पहले भी जहाज मार्गों में बारूदी सुरंगें बिछाई थीं. 

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By Anant narayan shukla

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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