Video: ईरान के 10 ठिकानों पर अमेरिका की भीषण बमबारी, ट्रंप बोले- जरूरत पड़ी तो इस्लामिक रिपब्लिक खत्म कर देंगे

US Iran Attacks: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. तेल टैंकर पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमला किया. होर्मुज में हुई इस कार्रवाई में ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणालियों, वायु रक्षा ठिकानों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. वहीं ईरान ने इस हमले का करारा जवाब देने की कोशिश की है.

US Iran Attacks: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है. शनिवार को अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की. यह हमला उस समय हुआ जब पनामा के झंडे वाले एक तेल टैंकर को होर्मुज स्ट्रेट के पास निशाना बनाया गया. अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ऐसी सैन्य कार्रवाई की है. अगर ऐसे ही हमले जारी रहे तो दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम और शांति समझौता खतरे में पड़ सकता है.

सीजफायर के बाद ईरान पर अमेरिका का दूसरा हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि यह हमला ‘कमांडर इन चीफ (डोनाल्ड ट्रंप) के निर्देश पर 27 जून को ईरान के कई ठिकानों पर’ किया गया. अमेरिका ने दावा किया कि ईरान ने सीजफायर समझौते का पालन नहीं किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई.

CENTCOM ने अपने बयान में कहा, ‘कल एम/वी एवर लवली पर ईरानी हमले के जवाब में अमेरिका ने कार्रवाई की थी. ईरान को सीजफायर समझौते का सम्मान करने का मौका दिया गया, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. ईरानी बलों ने आज सुबह 4:30 बजे ईटी पर एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन से एम/टी किकू को निशाना बनाया.’ 

अमेरिकी कमांड के मुताबिक, पनामा के झंडे वाला यह तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के पास यात्रा कर रहा था और इसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल मौजूद था. सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाओं ने आज ईरान की ओर से वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ जारी आक्रामक गतिविधियों के जवाब में सीधे कार्रवाई करते हुए हमले किए. 

अमेरिका ने कहां-कहां किए हमले?

अमेरिकी सैन्य विमानों ने ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणालियों, वायु रक्षा ठिकानों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया. वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही होर्मुज स्ट्रेट से लगातार जारी है. अमेरिकी सेनाएं पूरी तरह सतर्क हैं, कार्रवाई के लिए तैयार हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सक्षम हैं.

 CENTCOM ने अपने हमलों का अनक्लासिफाइड वीडियो भी जारी किया. इसमें चार जगहों पर किए गए हमले दिखाए गए हैं. सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में सेंटकॉम ने कहा, अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने आज रात ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमले किए. ये हमले होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास के कई इलाकों में स्थित ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए. यह कार्रवाई ईरान की ओर से एम/टी किकू पर किए गए ड्रोन हमले के जवाब में की गई. हालांकि, अमेरिका ने ये हमले कहां किए सटीक तौर पर इसकी जानकारी साझा नहीं की. 

देखें वीडियो- 

ईरान के सिरिक द्वीप पर धमाकों की आवाज, केशम द्वीप पर भी हमले का दावा

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी मीडिया ने बताया कि दक्षिणी ईरान के सिरिक द्वीप इलाके में कई धमाकों की आवाज सुनी गई. यह होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है, जहां पहले भी अमेरिकी कार्रवाई हुई थी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी सेना के कई प्रोजेक्टाइल केशम द्वीप के एक गांव को भी निशाना बना सकते हैं.

ट्रंप की चेतावनी- ‘ईरान का इस्लामिक रिपब्लिक खत्म हो सकता है’

अमेरिकी हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने समझौते का उल्लंघन जारी रखा तो अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘अमेरिकी विमानों ने अभी ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों तथा तटीय रडार साइटों पर हमला किया है, क्योंकि उसने फिर से सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हो सकता है कि वे कभी सीखें ही नहीं. एक समय ऐसा आ सकता है जब हमारे पास उचित रहने का कोई विकल्प नहीं बचेगा और हमें उस काम को सैन्य रूप से पूरा करना पड़ेगा, जिसे हमने सफलतापूर्वक शुरू किया था. अगर ऐसा हुआ तो ईरान का इस्लामिक रिपब्लिक अस्तित्व में नहीं रहेगा.’

एम/वी एवर लवली हमले के बाद शुरू हुआ नया टकराव

अमेरिकी कार्रवाई से पहले भी वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ चुका था. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ पहली कार्रवाई उस हमले के बाद की थी जिसमें एम/वी एवर लवली नाम के एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाया गया था. यह जहाज गुरुवार को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ.

इसके बाद ट्रंप ने संकेत दिया था कि अमेरिका इस घटना का जवाब देगा. उन्होंने इसे शांति वार्ता के दौरान किया गया ‘मूर्खतापूर्ण उल्लंघन’ बताया था. CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया.

ईरान ने भी किया जवाबी हमला

अमेरिका की ताजा सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने पलटवार करते हुए रविवार तड़के अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी नौसेना और एयरोस्पेस यूनिट ने मिलकर मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन शुरू किया. इस कार्रवाई का लक्ष्य कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे.

IRGC के मुताबिक, यह हमला अमेरिका की ओर से ईरानी क्षेत्र में किए गए ताजा हमलों के जवाब में किया गया है. ईरान से जुड़े सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज से जुड़ी घटना को आधार बनाकर ईरान के पांच तटीय ठिकानों पर हमला किया.

कुवैत ने हवाई रक्षा प्रणाली सक्रिय की

कुवैत की सेना ने पुष्टि की है कि उसकी हवाई रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दी गई हैं. सेना ने बताया कि वह ‘दुश्मन’ मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की कोशिश कर रही है. हालांकि, अभी तक अमेरिकी अधिकारियों की ओर से यह जानकारी नहीं दी गई है कि निशाना बनाए गए सैन्य ठिकानों पर कितना नुकसान हुआ है या कोई हताहत हुआ है.

होर्मुज स्ट्रेट फिर बना संघर्ष का केंद्र

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने वाला यह रास्ता लंबे समय से रणनीतिक महत्व रखता है. सीजफायर और पीस डील साइन होने के बाद यहां व्यापारिक गतिविधियां दोबारा शुरू होने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन तेल टैंकर एम/वी एवर लवली और एम/टी किकू पर हमले ने फिर से खतरा बढ़ा दिया है.

ये भी पढ़ें:- यूरोप में गर्मी का कहर: स्विट्जरलैंड में तेजी से पिघल रहा है ग्लेशियर, जलवायु परिवर्तन का बना संकट

ईरान ने पहले ही खाड़ी देशों को दी थी चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट के नियंत्रण को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं. ईरान का कहना है कि पिछले सप्ताह हुए समझौते के बाद इस समुद्री रास्ते की निगरानी में क्षेत्रीय देशों की भूमिका होनी चाहिए.

वहीं, अमेरिका और छह खाड़ी देशों के संयुक्त बयान में ईरान के उस दावे को खारिज किया गया था जिसमें उसने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट शुल्क लगाने की बात कही थी. ईरान का कहना है कि होर्मुज से ईरान द्वारा तय किए गए रास्ते से ही यातायात होगा. अगर कोई और रूट अपनाया जाता है, तो यह ईरान को बर्दाश्त नहीं होगा. एम/वी एवर लवली पर इसीलिए हमला किया गया था. 

ईरानी उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने एक्स पर लिखा, ‘होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही ऐसे अस्पष्ट समझौतों, वैकल्पिक रास्तों या ऐसे फैसलों के जरिए सुनिश्चित नहीं की जा सकती, जिनमें तटीय देश के रूप में ईरान की भूमिका को नजरअंदाज किया जाए.’ ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने भी अमेरिका पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब कूटनीतिक बातचीत जारी थी, उसी दौरान अमेरिका ने हमला किया.

ये भी पढ़ें:- ‘मेखाला’ और ‘हिगोस’, दो दैत्य तूफानों के बीच फंसा जापान, बिगड़ सकते हैं हालात

ईरान की चेतावनी- सीजफायर टूट सकता है

IRGC ने एक कड़े बयान में अमेरिका पर सीजफायर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. ईरानी गार्ड ने चेतावनी दी कि अगर इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उल्लंघन जारी रहा तो चल रही सभी कूटनीतिक प्रक्रियाएं पूरी तरह रुक सकती हैं.

IRGC ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे जहाजों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिन्हें वह समझौते का उल्लंघन करने वाला मानेगा. अपने बयान में ईरानी बलों ने कहा कि किसी भी ‘दुश्मन आक्रामकता’ का जवाब ‘कुचल देने वाली प्रतिक्रिया’ के साथ दिया जाएगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Anant Narayan Shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >