अब आसान नहीं अमेरिकी नागरिकता !

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मजात नागरिकता की संवैधानिक गारंटी को सीमित करने का दूसरा प्रयास किया है. अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआत से ही वे एक सदी से भी अधिक समय से जन्म के साथ स्वतः मिल रहे अमेरिकी नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं. बीते 6 अगस्त को ट्रंप ने जन्मजात नागरिकता को प्रतिबंधित करने के इरादे से दो कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किये हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति का ये कदम भारतीयों के लिए क्या मायने रखता है, जानें विस्तार से...

भारत समेत दुनिया भर के देशों से एक बेहतर भविष्य का सपना लेकर अमेरिका जानेवाले लोगों के लिए अमेरिकी सिटीजनशिप का अर्थ सिर्फ एक नया पासपोर्ट हासिल करना भर नहीं,  बल्कि कानूनी, आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन में एक अहम बदलाव का बड़ा आधार है. जनवरी 2025 में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किये थे, जिसमें अमेरिका में अवैध अप्रवासियों और कई अस्थायी वीजा धारकों के बच्चों को स्वतः नागरिकता न देने का प्रावधान था. कुछ ही दिनों के भीतर डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 22 राज्यों ने अप्रवासी अधिकार संगठनों के साथ मिलकर इस आदेश को अदालत में चुनौती दी. वर्ष 2026 में 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के आदेश को खारिज कर दिया. लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तकरीबन एक माह बाद फिर इससे संबंधित दो नये कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर जन्मजात नागरिकता को सीमित करने के अपने प्रयास तेज कर दिये हैं.

क्या है ट्रंप के नये कार्यकारी आदेश में

जन्मजात नागरिकता को सीमित करनेवाला आदेश : इसका उद्देश्य अमेरिका में जन्म लेने के आधार पर स्वत: मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता के दायरे को सीमित करना है. यह आदेश कुछ विशिष्ट श्रेणियों के लोगों के बच्चों को मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता की पात्रता से बाहर करने का प्रयास करता है. इनमें शामिल हैं-विदेशी दूतावास, विदेशी सरकारों या उनसे जुड़े संगठनों में काम करनेवाले कर्मचारियों के बच्चे. विदेशी आतंकवादी संगठनों, दुश्मनों या विदेशी सरकारों के लिए लॉबिंग करनेवाले लोगों के बच्चे. ऐसे माता-पिता के बच्चे, जिन्होंने धोखाधड़ी या गलत तरीकों से आव्रजन स्थिति या नागरिकता हासिल करने की कोशिश की हो.

'बर्थ टूरिज्म' पर रोक लगाने वाला आदेश  : इस आदेश का उद्देश्य केवल अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर उसे स्वत: अमेरिकी नागरिकता दिलाने की नीयत से की जानेवाली यात्राओं यानी 'बर्थ टूरिज्म' को रोकना है. इसमें अमेरिका आनेवाले पर्यटकों और विजिटर वीजा आवेदकों की जांच कड़ी करने का प्रावधान है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य डिलीवरी कराना नहीं है. संघीय एजेंसियों को उन व्यावसायिक ऑपरेटरों और एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश देना भी इसमें शामिल है, जो 'बर्थ टूरिज्म' के नाम पर पैकेज या सेवाएं संचालित करते हैं.

कितना प्रभावी है यह आदेश !

नवीनतम कार्यकारी आदेश में एच-1 बी, एच-4, एल-1, एल-2 या एफ-1 जैसी सामान्य अस्थायी वीजा श्रेणियों का उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय लोग फिर भी चिंतित हैं. डोनाल्ड ट्रंप की अप्रवासन नीतियां 'अमेरिका फर्स्ट' के सिद्धांत पर आधारित रही हैं और जन्मजात नागरिकता पर उनका नवीनतम आदेश इसी राजनीतिक संदेश का एक हिस्सा है. यह आदेश कानूनी रूप से कितना प्रभावी होगा? इसके बारे में विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव कहते हैं, तकरीबन एक माह बाद ही चीजें स्पष्ट होंगी. बहुत संभव है कि इस आदेश को भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाये, लेकिन एंबेसी और इमिग्रेशन चेक पर अभी से इसका प्रभाव दिखेगा. कार्यान्वयन की व्यावहारिक बारीकियां या बुनियादी विवरण जब पूरी तरह सामने आ जायेगा, तो स्थिति ज्यादा साफ होगी.

भविष्य में दिख सकता है असर

भविष्य में जो लोग अमेरिका जायेंगे, वे इस आदेश से प्रभावित हो सकते हैं. रोबिंदर सचदेव एक उदाहरण देते हैं कि इसे ऐसे देखें, कोई एच-1 वीजा पर अमेरिका में है और वहां उनकी पत्नी ने गर्भधारण किया है, लेकिन उसी दौरान अगर वह रिन्यूअल वीजा के लिए भारत आती हैं और एंबेसी में वीजा अफसर को यह लगता है कि वह गर्भवती है, तो वह उनका वीजा अस्वीकार कर सकता है. इस तरह की परिस्थितियां बन सकती हैं भविष्य में.

चीन के चलते शुरू हुई बर्थ टूरिज्म रोकने की बात 

बर्थ टूरिज्म रोकने वाले आदेश पर रोबिंदर सचदेव कहते है कि कोई गर्भवती महिला टूरिज्म के लिए यूएसए जा रही है या बिजनेस कॉन्फ्रेंस में, तो वे स्पष्ट कैसे करेंगे कि जानेवाले की मंशा क्या है. वह आगे कहते हैं, असल में, बर्थ टूरिज्म को लेकर जो यह विवाद खड़ा हुआ है, उसकी मुख्य वजह चीन है. चीनी एजेंटों द्वारा इस पूरी प्रक्रिया को मैनेज किया जाता है, जिसके तहत अमीर चीनी परिवारों की महिलाएं बच्चे को जन्म देने के लिए दक्षिणी कैलिफोर्निया आती हैं, ताकि उनके बच्चे को अमेरिका की नागरिकता मिल सके.

नहीं प्रभावित होंगे कूटनीतिक संबंध 

एक चर्चा यह भी है कि ट्रंप के इस आदेश का भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर होगा, इस पर सचदेव कहते हैं, इसका कोई असर नहीं होगा. यह अमेरिका की डोमेस्टिक पॉलिसी है और इससे किसी भी देश के साथ उसके रणनीतिक  या सामरिक संबंध बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होंगे.

अभी 14वां संशोधन देता है जन्मजात नागरिकता  

यूएसए के मौजूदा संघीय कानून के तहत, एच-1बी, एच-4, एल-1, एल-2 या एफ-1 जैसे अस्थायी वीजा पर कानूनी रूप से अमेरिका में मौजूद भारतीय माता-पिता से पैदा हुए बच्चे को जन्म के समय ही स्वतः अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है. यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत मिलता है, जिसके मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्ति अमेरिका के नागरिक हैं. एक सदी से भी अधिक समय से अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने इस संशोधन की व्यापक व्याख्या को बनाये रखा है.

अमेरिकी नागरिकता में क्या है खास

  • वोट देने और चुनाव लड़ने का कानूनी अधिकार मिलता है.
  • अमेरिकी संघीय और रक्षा नौकरियों के लिए पात्र हो जाते हैं.
  • अमेरिकी पासपोर्ट से 180 से अधिक देशों में बिना पूर्व वीजा या 'वीजा ऑन अराइवल' के आसानी से यात्रा की जा सकती है.
  • किसी भी जगह आपात स्थिति या कानूनी संकट आने पर अमेरिकी दूतावास पूरी सुरक्षा प्रदान करता है.
  • ग्रीन कार्ड धारकों को कुछ परिस्थितियों या अपराधों में देश से निकाले जाने का खतरा रहता है, लेकिन अमेरिकी नागरिक बनने के बाद यह डर खत्म हो जाता है.

अमेरिकी नागरिकता पाने में दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं भारतीय

अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के मामले में भारतीय नागरिक पूरी दुनिया में मैक्सिको के बाद दूसरे स्थान पर हैं. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हर साल लगभग 50,000 से 65,000 भारतीय आधिकारिक तौर पर अमेरिकी नागरिक बनते हैं.

  • 49,700 भारतीयों को अमेरिकी नागरिकता मिली वर्ष 2024 में, जो अमेरिका में कुल दी गयी नागरिकता का लगभग 6.1% है.
  • 59,100 भारतीयों ने अमेरिका की नागरिकता हासिल की वर्ष 2023 में.
  • 65,960 भारतीय अमेरिकी नागरिक बने थे 2022 में.


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लेखक के बारे में

By Preeti Singh Parihar

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