अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है. लगातार 13वीं रात हमले होने के बाद भी दोनों देशों के बीच जंग खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं. लड़ाई फिर तेज होने की आशंका और बातचीत के प्रयासों को लेकर अनिश्चितता के बीच दोनों देशों ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे हालात और बिगड़ने का डर बढ़ गया है. पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी दूतावासों ने वहां रह रहे अपने नागरिकों को अलर्ट रहने की सलाह दी है. उन्हें चेतावनी दी गई है कि जरूरत पड़ने पर वहां से निकलने के रास्ते सीमित हो सकते हैं. वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने पड़ोसी देशों के लोगों से अपील की है कि वे उन सैन्य ठिकानों से दूर रहें, जहां अमेरिकी सेना तैनात है.
यमन में भी बढ़ गया तनाव
इस बीच, यमन में भी तनाव बढ़ गया है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि सऊदी अरब ने लाल सागर में अपने तेल टैंकरों पर हुए हमलों के जवाब में यमन के बंदरगाह शहर हुदैदा पर हमला किया. इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का हाथ बताया गया है. वहीं, हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि वे अपने हमले और तेज करेंगे. इससे यमन में कई वर्षों से बनी शांति पर असर पड़ा है.
अमेरिकी सेना के मुताबिक, ‘एम/टी लवीन’ नाम के कार्गो शिप ने ओमान की खाड़ी में नाकाबंदी तोड़ने की चार बार कोशिश की. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि चेतावनी देने के बाद भी जहाज ने निर्देश नहीं माने. इसके बाद अमेरिकी बलों ने कार्रवाई करते हुए जहाज के इंजन वाले हिस्से पर गोलीबारी की और उसे रोक दिया.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने क्या बताया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसने 12 अन्य जहाजों का रास्ता भी बदल दिया है. इससे पहले अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप की ओर जा रहे तेल टैंकर ‘बेल्मा’ पर कार्रवाई की थी. अमेरिका का कहना है कि जहाज ने कई चेतावनियों को नजरअंदाज किया. इसके बाद 15 जुलाई को अमेरिकी विमान ने मिसाइल दागकर जहाज को इनएक्टिव कर दिया.
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इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (24 जुलाई) को ईरान के साथ बातचीत को ‘‘अब तक की सबसे गंभीर वार्ता’’ बताया. हालांकि अमेरिका ईरान पर रोजाना हमले कर रहा है. ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें युद्ध समाप्त करने की ‘‘कोई जल्दी नहीं’’ है.
