ईरान युद्ध ने खोली अमेरिकी हथियारों की पोल! पेंटागन ने कंपनियों को गोला बारूद तेजी से बनाने का दिया आदेश

ईरान के साथ लंबे युद्ध ने अमेरिका के मिसाइल भंडार पर भारी दबाव डाला है. THAAD, Patriot और Tomahawk मिसाइलों के भंडार चिंताजनक स्तर तक घट गए हैं. पेंटागन कंपनियों से उत्पादन बढ़ाने की योजना मांग रहा है.

ईरान के साथ लंबे समय से चल रहे युद्ध के चलते अमेरिकी हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ा दिया है. पेंटागन ने रक्षा कंपनियों को मिसाइलों और दूसरे जरूरी हथियारों का उत्पादन और सप्लाई तेजी से बढ़ाने का आदेश दिया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फेनबर्ग ने कंपनियों से 21 दिनों के भीतर उत्पादन बढ़ाने की योजना मांगी है. जबकि पेंटागन कहा कि मौजूदा सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार उपलब्ध हैं.

युद्ध के दौरान अमेरिका ने एयर डिफेंस सिस्टम की THAAD और Patriot मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया. CSIS के अनुमान के मुताबिक, अमेरिका के THAAD इंटरसेप्टर करीब 452 से घटकर 232-262 तक रह गए। Patriot मिसाइलों का भंडार भी करीब 2,330 से घटकर 759-827 के बीच पहुंचने का अनुमान है.

Tomahawk मिसाइलों का भी जमकर इस्तेमाल

ईरान के खिलाफ अभियान में अमेरिका ने लंबी दूरी की Tomahawk क्रूज मिसाइलों का भी भारी इस्तेमाल किया. उपलब्ध आकलनों के अनुसार, 1,000 से ज्यादा Tomahawk मिसाइलें दागी गईं. इनका उत्पादन सीमित गति से होने के कारण भंडार को दोबारा भरना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

हथियार बनाना आसान नहीं

आधुनिक मिसाइलों के निर्माण में खास इलेक्ट्रॉनिक्स, रॉकेट मोटर, सेंसर, गाइडेंस सिस्टम और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होती है. पेंटागन अब कंपनियों से नई उत्पादन लाइनें शुरू करने, कारखानों का विस्तार करने और सप्लाई चेन की बाधाएं दूर करने को कह रहा है.

भंडार भरने में लग सकते हैं कई साल

CSIS के आकलन के मुताबिक THAAD और Patriot के भंडार को पुराने स्तर तक पहुंचने में 2029 तक का समय लग सकता है. Tomahawk के मामले में यह समय 2030 के अंत तक जा सकता है. SM-3 और SM-6 जैसी मिसाइलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी करीब 3 साल लग सकते हैं.

चीन की चुनौती ने बढ़ाई टेंशन

अमेरिका की चिंता सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है. पेंटागन चीन और ताइवान को लेकर संभावित भविष्य के संघर्ष को भी ध्यान में रख रहा है. अगर हथियारों का भंडार लंबे समय तक कम रहा, तो एक साथ मिडिल ईस्ट , यूरोप और इंडो-पैसिफिक में सैन्य जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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