इधर मिडिल ईस्ट में US का जंगी जहाज तैनात, उधर यूएई का ऐलान; ईरान के खिलाफ हमले के लिए हमारा एयरस्पेस नहीं

UAE airspace Iran Attack US Aircraft Carrier: अमेरिकी नौसेना का जंगी जहाज यूएसएस अब्राहम लिंकन अपने बेड़े के साथ हिंद महासागर में आ गया है. इसके बाद, ईरान पर हमले की आशंका तेज हो गई है. हालांकि, इस मामले पर मिडिल ईस्ट की पॉलिटिक्स भी असर डाल रही है. यूएई ने ऐलान किया है कि उसके एयरस्पेस या क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जाएगा.

UAE airspace Iran Attack US Aircraft Carrier: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव नहीं कम हो रहा है. मिडिल ईस्ट के शिया मुल्क में अंदरूनी कलह (विरोध प्रदर्शन) भले ही कम हो गया, लेकिन बाहर से दबाव बढ़ गया है. अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन हिंद महासागर में पहुंच गया है. इसे मिडिल ईस्ट में तैनात किया गया है. इससे ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा बढ़ गया है. इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने यूएस को झटका दिया है. उसने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हवाई क्षेत्र, समुद्री सीमा या जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के सैन्य अभियान के लिए नहीं होने देगा. यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिमी एशिया में हालात पहले से ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं.

यूएई के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि देश किसी भी ऐसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा जो ईरान के खिलाफ सैन्य रूप ले. साथ ही यह भी कहा गया कि इस तरह की किसी भी गतिविधि के लिए वह कोई लॉजिस्टिक या अन्य मदद भी उपलब्ध नहीं कराएगा. मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत, शांति की दिशा में कदम, अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन और हर देश की संप्रभुता का सम्मान है.

क्षेत्र में बढ़ती अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका ने ईरान के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं. अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के पश्चिम एशिया के जलक्षेत्र में तैनात होने के बाद क्षेत्रीय हलचल और तेज हो गई है. यह युद्ध पोत तीन अन्य जहाजों के साथ आया है. यह अमेरिका की अक्टूबर के बाद, क्षेत्र में किसी बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर की पहली तैनाती है. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की जाती है, तो अमेरिका सैन्य विकल्प पर भी विचार कर सकता है. हालांकि, ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि उन्हें इसका इस्तेमाल न करना पड़े.

ईरान में विरोध प्रदर्शन और अशांति

पिछले महीने के आखिर में ईरान में शुरू हुए प्रदर्शन शुरुआत में शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में हालात बिगड़ते चले गए और विरोध कई शहरों तक फैल गया. ईरानी प्रशासन का कहना है कि कुछ उपद्रवियों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और सुरक्षा बलों पर हमले किए, जिनमें कई सुरक्षाकर्मी मारे गए. ईरानी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस प्रदर्शन को दबाने में 3000 से ज्यादा लोग मारे गए. हालांकि, कुछ ह्यूमन राइट्स ग्रुप के मुताबिक यह संख्या इससे कहीं ज्यादा है. 

अमेरिका और मोसाद के बयानों से बढ़ा विवाद

ईरान ने इन विरोध प्रदर्शन को उकसाने के लिए अमेरिकी और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है. उसने कहा कि इन अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के कुछ बयानों ने विवाद और बढ़ाया. अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में सड़कों पर उतरने वाले ईरानियों को शुभकामनाएं दीं और कथित तौर पर मोसाद एजेंटों का भी जिक्र किया. वहीं, फारसी भाषा में किए गए एक संदेश में मोसाद की ओर से लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की गई. संदेश में दावा किया गया कि उनके लोग केवल दूर से समर्थन नहीं कर रहे, बल्कि जमीन पर भी मौजूद हैं.

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हालिया अशांति किसी आंतरिक घटना से ज्यादा एक बाहरी साजिश का हिस्सा है. उनका दावा है कि जून 2025 में हुए 12 दिन के संघर्ष के बाद यह घटनाएं इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ छेड़े गए अभियान का अगला चरण हैं. हालांकि, 28 दिसंबर से शुरू हुए यह विरोध प्रदर्शन फिलहाल शांत हैं. लेकिन अमेरिकी सैन्य पोत के ईरान के आस-पास पहुंचने के बाद, अमेरिकी हमले को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 

यह इसलिए भी माना जा रहा है कि इसी संघर्ष के दौरान कई बार ऐसा लगा कि अमेरिका शिया मुल्क पर हमला करने वाला है, लेकिन इसे बार-बार टाल दिया गया. इसमें अरब देशों ने पर्दे के पीछे से बड़ी भूमिका निभाई थी. अब यूएई का यह कदम खुले तौर पर सामने आया है. आने वाले समय में अन्य देश भी ऐसी घोषणा कर सकते हैं. 

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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