भारत का न्यौता ठुकराया, पहले विदेशी दौरे पर चीन जाएंगे बांग्लादेश PM तारिक रहमान! तीस्ता प्रोजेक्ट में लगवाएंगे बीजिंग का पैसा

Tarique Rahman: बांग्लादेश की नई राजनीतिक परिस्थिति के बीच प्रधानमंत्री तारिक रहमान का संभावित चीन दौरा दक्षिण एशियाई राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है. माना जा रहा है कि यह उनकी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली विदेश यात्रा होगी और इसमें तीस्ता नदी परियोजना सबसे अहम मुद्दा बन सकती है.

Tarique Rahman: बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पहली संभावित विदेश यात्रा चीन की हो सकती है. इसने दक्षिण एशिया की राजनीति और कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है. भारत और बांग्लादेश के रिश्ते शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन के बाद फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें चल रही हैं. भारत और बांग्लादेश के बीच इस समय बॉर्डर और पानी को लेकर तनाव है. ऐसे में रहमान के इस दौरे पर तीस्ता नदी परियोजना सबसे अहम मुद्दा बन सकती है.

दक्षिण एशियाई राजनीति में किसी नए प्रधानमंत्री की पहली विदेश यात्रा को बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसके जरिए सरकार अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं और विदेश नीति की दिशा का संकेत देती है. उन्हें भारत और भूटान की तरफ से भी निमंत्रण मिला हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फरवरी में शपथ लेने के तुरंत बाद तारिक रहमान को भारत आने का निमंत्रण दिया था. रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने तारिक रहमान को जून के आखिर में बीजिंग आने का प्रस्ताव भेजा है. 

हालांकि ढाका की ओर से अभी तक इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायुं कबीर कई मौकों पर ऐसे संकेत दे चुके हैं कि चीन रहमान की पहली विदेश यात्रा बन सकता है. हुमायुं कबीर ने कहा था कि प्रधानमंत्री निश्चित रूप से चीन जाएंगे और बीजिंग बांग्लादेश का एक महत्वपूर्ण विकास साझेदार है.

शी जिनपिंग से मुलाकात संभव

ढाका के मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर यात्रा तय होती है तो बीजिंग पहुंचने के अगले दिन तारिक रहमान की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से हो सकती है. बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने हाल ही में कहा था कि तारिक रहमान की संभावित चीन यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि चीन बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास में हरसंभव सहयोग जारी रखेगा.

तीस्ता परियोजना और चीन की भूमिका पर भारत की नजर

भारत की चिंता का बड़ा कारण तीस्ता प्रोजेक्ट और चीन की बढ़ती भागीदारी मानी जा रही है. ढाका तीस्ता प्रोजेक्ट में चीनी निवेश चाहता है. यह परियोजना सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकेन नेक’ के करीब स्थित है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला रणनीतिक इलाका है. इसी वजह से चीन की बढ़ती मौजूदगी को नई दिल्ली रणनीतिक नजर से देख रही है.

विदेश मंत्री पहले ही जा चुके हैं चीन

तारिक रहमान सरकार में विदेश मंत्री बने खालिलुर रहमान इससे पहले मई में चीन का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर बीजिंग में कई बैठकों में हिस्सा लिया था. इस दौरान दोनों देशों ने बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआईआई), व्यापार, निवेश, उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, जल संसाधन, स्वास्थ्य और आपसी संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई थी. खालिलुर रहमान ने चीन को बांग्लादेश का ‘विश्वसनीय’ और ‘अपरिहार्य’ साझेदार भी बताया था. उन्होंने वन चाइना पॉलिसी के प्रति बांग्लादेश के समर्थन को भी दोहराया.

विदेश मंत्री की पहली यात्रा चीन नहीं, भारत थी

दिलचस्प बात यह है कि बीएनपी सरकार बनने के बाद खालिलुर रहमान की पहली विदेश यात्रा चीन नहीं बल्कि भारत थी. अप्रैल में वह नई दिल्ली पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाकात भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से हुई थी. दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग, सीमा प्रबंधन और ‘बांग्लादेश प्रथम’ नीति पर चर्चा हुई थी.

गंगा जल समझौता और अवैध घुसपैठ भी मुद्दा

बांग्लादेश की ओर से तीस्ता प्रोजेक्ट और गंगा जल समझौता जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं. वहीं भारत ने अवैध घुसपैठ और मवेशी तस्करी जैसे मामलों को बांग्लादेश के सामने रखा है. इन सबके बावजूद दोनों देश ‘ऑल वेदर फ्रेंडशिप’ को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

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हसीना सरकार के समय भारत ने भी दिया था प्रस्ताव

शेख हसीना सरकार के अंतिम महीनों में भारत ने खुद तीस्ता परियोजना के जीर्णोद्धार को फंड करने की पेशकश की थी. हालांकि नई सरकार बनने के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि वह प्रस्ताव अब भी विचाराधीन है या नहीं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन इस परियोजना में बड़ी भूमिका निभाता है तो इसका असर केवल बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति पर भी पड़ सकता है. 

बदलती रही हैं बांग्लादेश की प्राथमिकताएं

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्रियों की पहली विदेश यात्रा हमेशा बदलती राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से तय होती रही है. ऐसे में अगर तारिक रहमान चीन को पहली प्राथमिकता देते हैं, तो इसे केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं बल्कि दक्षिण एशिया में बदलते शक्ति संतुलन के संकेत के तौर पर भी देखा जाएगा.

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शेख हसीना और खालिदा जिया के दौर से तुलना

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2024 में दोबारा सत्ता में आने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा भारत की की थी. हालांकि 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर उन्होंने चीन का दौरा किया था. वहीं तारिक रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने 1991 में सत्ता में आने के बाद 1992 में अमेरिका का दौरा किया था. बाद में वह सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आई थीं. बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान ने 1972 में प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहले भारत का दौरा किया था.

यूनुस सरकार के बाद बढ़ी चीन से नजदीकी

विश्लेषकों का मानना है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान ढाका और बीजिंग के रिश्ते तेजी से मजबूत हुए थे. अब बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद भी यह करीबी बनी हुई दिखाई दे रही है.

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लेखक के बारे में

Published by: Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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