Breaking News : सूडान में सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत

सूडान में एक सोने की खदान के ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई है. यह जानकारी न्यूज एजेंसी एपी के हवाले से सामने आई है.

सूडान के सुदूर इलाके में स्थित एक सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई है. यह जानकारी एक चिकित्सा समूह और जीवित बचे लोगों के हवाले से न्यूज एजेंसी एपी ने दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूडान के वेस्ट कोर्डोफन स्टेट में स्थित सोने की खदान में यह दुर्घटना हुई.


खदान ढहने की घटना मंगलवार देर रात हुई

यह हादसा वेस्ट कोर्डोफान प्रांत के नूहूद शहर में अल-जारा सोने की खदान में हुआ. यह इलाका अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के नियंत्रण में है, जो पिछले तीन साल से ज्यादा समय से देश की सेना के साथ लड़ाई लड़ रही है. हादसे में बचे हुए लोगों ने बताया कि खदान ढहने की घटना मंगलवार देर रात हुई और कई लोग अब भी लापता हैं. चिकित्साकर्मियों के समूह ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि मलबे में दबे लोगों या जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान अभी जारी है.


ये भी पढ़ें: मक्का के पास ड्रोन को लेकर बढ़ा तनाव, भारत ने जताई चिंता, सऊदी और हूतियों के दावे अलग

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >