SIPRI Nuclear Weapons Report 2026: दुनिया भर में परमाणु हथियारों की कुल संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कुछ कम हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खतरा कम नहीं हुआ है. उल्टा, परमाणु युद्ध का जोखिम पहले से अधिक गंभीर होता जा रहा है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई परमाणु संपन्न देश अब अपने हथियारों को गोदामों से निकालकर सीधे लॉन्चिंग सिस्टम और मिसाइल प्लेटफॉर्म पर तैनात कर रहे हैं.
सिपरी ईयरबुक 2026 के मुताबिक जनवरी 2026 तक दुनिया में कुल 12,187 परमाणु वॉरहेड मौजूद थे. इनमें से करीब 9,745 हथियार ऐसे हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इस साल कुल संख्या में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन इसकी वजह पुराने हथियारों को हटाया जाना है, न कि परमाणु कार्यक्रमों में कमी. अमेरिका और रूस ने जहां अपने हथियारों की कुल संख्या में कमी की है, वहीं फ्रांस ने सबसे ज्यादा, उसके बाद चीन, भारत और उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु वॉरहेड्स की संख्या बढ़ाई है.
परमाणु हथियार कम हुए, लेकिन खतरा बढ़ गया
रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में कुल परमाणु हथियारों की संख्या फिर बढ़ सकती है. इसका कारण यह है कि पुराने हथियारों को हटाने की प्रक्रिया धीमी पड़ रही है, जबकि नए परमाणु हथियारों की तैनाती और आधुनिकीकरण तेज गति से आगे बढ़ रहा है. सिपरी के निदेशक करीम हग्गाग ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘सबसे चिंता की बात यह है कि परमाणु हथियारों की संख्या कम होने के बावजूद परमाणु जोखिम और खतरे लगातार बढ़ रहे हैं.’
अब गोदामों से निकलकर लॉन्चिंग सिस्टम तक पहुंच रहे हथियार
रिपोर्ट में जिस प्रवृत्ति को सबसे चिंताजनक बताया गया है, वह है परमाणु हथियारों की सक्रिय तैनाती. हग्गाग के अनुसार, ‘परमाणु हथियार रखने वाले देश अब उन्हें भंडारण से निकालकर ऐसे डिलीवरी सिस्टम पर लगा रहे हैं जो किसी भी समय इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इसका मतलब है कि दुनिया में तैनात परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ रही है.’ इससे किसी भी संकट की स्थिति में प्रतिक्रिया का समय कम हो सकता है और गलत आकलन से बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका और रूस अभी भी सबसे आगे
दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका और रूस के पास है. दोनों देशों के पास 5,000 से अधिक वॉरहेड मौजूद हैं. हालांकि, दोनों देश अपने परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. फिलहाल दोनों देशों ने अपने अपने हथियारों में कमी की है.
सिपरी के मुताबिक अमेरिका का परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है, लेकिन योजना और फंडिंग से जुड़ी समस्याओं के कारण इसमें देरी और लागत बढ़ने की आशंका है. वहीं रूस को अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) परीक्षणों में विफलताओं का सामना करना पड़ा है. यूक्रेन युद्ध से जुड़े आर्थिक दबाव और पश्चिमी प्रतिबंध भी उसके कार्यक्रम को प्रभावित कर रहे हैं.
चीन सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा रहा परमाणु ताकत
रिपोर्ट में चीन को लेकर विशेष चिंता जताई गई है. सिपरी के अनुसार दुनिया में सबसे तेजी से परमाणु क्षमता बढ़ाने वाला देश फिलहाल चीन है. सिपरी का अनुमान है कि चीन के पास अब लगभग 620 परमाणु वॉरहेड हैं. यदि मौजूदा गति जारी रही तो 2030 तक उसके पास अमेरिका और रूस के बराबर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं. हालांकि, रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यदि चीन 2030 तक 1,000 वॉरहेड के आंकड़े तक भी पहुंच जाता है, तब भी उसका जखीरा अमेरिका और रूस के भंडार का लगभग एक-चौथाई ही होगा.
दक्षिण एशिया में भी परमाणु प्रतिस्पर्धा जारी
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपने परमाणु शस्त्रागार में 10 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी की है. उसके पास अब लगभग 190 परमाणु वॉरहेड हैं. इससे पहले रिपोर्ट में भारत के पास 180 वॉरहेड्स कंफर्म किए गए थे. वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तान के पास 170 वॉरहेड होने का अनुमान है. हालांकि रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान लगातार फिसाइल मैटेरियल जमा कर रहा है, जिससे आगे उसका परमाणु भंडार बढ़ सकता है.
फ्रांस, ब्रिटेन और इजरायल भी कर रहे हैं तैयारी
यूरोप में फ्रांस और ब्रिटेन ने फिलहाल अपने परमाणु भंडार को स्थिर रखा है. फ्रांस के पास लगभग 370 और ब्रिटेन के पास 225 वॉरहेड हैं. फ्रांस ने अपने वॉरहेड्स में 80 की बढ़ोतरी की है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी मार्च में परमाणु भंडार बढ़ाने का निर्देश दिया था. हालांकि, सिपरी का कहना है कि 2021 की रक्षा समीक्षा के बाद ब्रिटेन भविष्य में अपने परमाणु भंडार की सीमा बढ़ा सकता है.
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इजरायल जस का तस, नॉर्थ कोरिया ने की बढ़ोतरी
इजरायल आधिकारिक तौर पर अपने परमाणु हथियारों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन सिपरी का अनुमान है कि उसके पास करीब 90 परमाणु वॉरहेड हैं और वह भी अपने शस्त्रागार को आधुनिक बना रहा है. उत्तर कोरिया भी अपने घोषित लक्ष्य के अनुसार तेजी से परमाणु क्षमता बढ़ाने में जुटा हुआ है. सिपरी के अनुमान के मुताबिक उसके पास फिलहाल करीब 60 परमाणु वॉरहेड हैं. उसने भी अपने परमाणु हथियारों में 10 की संख्या का इजाफा किया है.
जनवरी 2026 तक दुनिया के प्रमुख देशों के परमाणु हथियार (SIPRI डेटा)
अमेरिका
2025: 5,177
2026: 5,042
बदलाव: 135 वॉरहेड्स की कमी
रूस
2025: 5,459
2026: 5,420
बदलाव: 39 वॉरहेड्स की कमी
यूनाइटेड किंगडम
2025: 225
2026: 225
बदलाव: कोई बदलाव नहीं
फ्रांस
2025: 290
2026: 370
बदलाव: 80 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी
चीन
2025: 600
2026: 620
बदलाव: 20 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी
भारत
2025: 180
2026: 190
बदलाव: 10 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी
पाकिस्तान
2025: 170
2026: 170
बदलाव: कोई बदलाव नहीं
इजरायल
2025: 90
2026: 90
बदलाव: कोई बदलाव नहीं
उत्तर कोरिया
2025: 50
2026: 60
बदलाव: 10 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी
कुल वैश्विक परमाणु हथियार
2025: 12,241
2026: 12,187
बदलाव: कुल 54 वॉरहेड्स की कमी
प्रमुख निष्कर्ष
- दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार अब भी रूस (5,420) और अमेरिका (5,042) के पास हैं.
- भारत (190) के पास अब पाकिस्तान (170) से 20 अधिक परमाणु वॉरहेड्स हैं.
- चीन का परमाणु जखीरा लगातार बढ़ रहा है और वह सबसे तेजी से विस्तार करने वाले देशों में शामिल है.
- फ्रांस ने इस सूची में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की है, जहां वॉरहेड्स की संख्या 290 से बढ़कर 370 हो गई.
- कुल वैश्विक भंडार में मामूली गिरावट आई है, लेकिन कई देश अपने परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण और सक्रिय तैनाती बढ़ा रहे हैं.
क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
सिपरी ईयरबुक 2026 की रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यह है कि दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या घटने का मतलब यह नहीं है कि खतरा कम हो गया है. इसके उलट, आधुनिक मिसाइलों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य प्रणालियों, साइबर युद्ध और सक्रिय परमाणु तैनाती ने वैश्विक सुरक्षा वातावरण को और अधिक जटिल बना दिया है. यही कारण है कि विशेषज्ञ अब केवल परमाणु हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी तैनाती, तकनीकी क्षमता और इस्तेमाल की तैयारी को दुनिया के लिए सबसे बड़ी चिंता मान रहे हैं.
