S-500 vs Dark Eagle: रूस का बड़ा दावा! पुतिन का डिफेंस सिस्टम अमेरिकी हाइपरसोनिक मिसाइल को हवा में ही कर देगा ढेर

S-500 vs Dark Eagle: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस और अमेरिका की सैन्य ताकत आमने-सामने है. रूस का दावा है कि उसका S-500 एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी डार्क ईगल हाइपरसोनिक मिसाइल को रोक सकता है. जानिए S-500 की क्षमता, डार्क ईगल की रफ्तार, ऊंचाई, सीमाएं और क्यों यह मुकाबला सिर्फ हथियारों का नहीं, रणनीति की भी असली परीक्षा है.

S-500 vs Dark Eagle: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस और अमेरिका की सैन्य ताकत को लेकर बयानबाजी तेज है. इसी बीच रूस ने दावा किया है कि उसका नया और सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम S-500 प्रोमेथियस अमेरिका की खतरनाक हाइपरसोनिक मिसाइल डार्क ईगल को भी हवा में ही खत्म कर सकता है. लेकिन सवाल यही है कि क्या यह दावा जमीन पर उतना ही मजबूत है, जितना कागजों पर दिखता है?

रूस के राष्ट्रपति अकादमी से जुड़े सुरक्षा मामलों के विश्लेषक अलेक्जेंडर स्टेपानोव का कहना है कि S-500 रूस की सीमाओं के पास मौजूद सभी अहम इलाकों और ठिकानों को रणनीतिक सुरक्षा देगा. स्टेपानोव के अनुसार, अगर पश्चिमी देश यूक्रेन युद्ध को और भड़काते हैं, तो रूस ‘ओरेश्निक’ मिसाइल के जरिए उन सैन्य और औद्योगिक ठिकानों पर हमला कर सकता है, जो यूक्रेन को हथियार और तकनीकी मदद दे रहे हैं. इसमें नाटो देश भी शामिल हो सकते हैं. (Can Russia Air Defense Stop US Hypersonic Missile in Hindi)

S-500 vs Dark Eagle in Hindi: डार्क ईगल पर रूस की नजर

समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में स्टेपानोव ने अमेरिका की नई हाइपरसोनिक मिसाइल डार्क ईगल का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि S-500 सिर्फ एक एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है, बल्कि ऐसा सिस्टम है जो हाइपरसोनिक मिसाइलों के साथ-साथ धरती की निचली कक्षा में घूम रहे सैटेलाइट्स को भी मार गिराने में सक्षम है. रूस के अनुसार, यह सिस्टम दुश्मन की रणनीतिक ताकत को खत्म कर सकता है.

डार्क ईगल कैसे काम करती है?

डार्क ईगल कोई साधारण मिसाइल नहीं है. यह बूस्ट-ग्लाइड हाइपरसोनिक मिसाइल है. पहले रॉकेट इसे बहुत ऊंचाई तक ले जाता है. इसके बाद इससे अलग होकर इसका ग्लाइड बॉडी हवा में फिसलते हुए Mach 10 या उससे ज्यादा रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है. इसकी अधिकतम मारक दूरी करीब 3,500 किलोमीटर बताई जाती है.

कितनी ऊंचाई तक जाती है डार्क ईगल?

यूरेशियन टाइम्स के अनुसार, इस सवाल का जवाब पाने के लिए ग्रोक से पूछा गया कि 3,500 किलोमीटर की दूरी पर हमला करने के लिए डार्क ईगल को कितनी ऊंचाई तक जाना होगा. जवाब आया कि करीब 60 किलोमीटर. इस ऊंचाई पर हवा पतली होती है, जिससे रफ्तार बनी रहती है और मिसाइल लंबी दूरी तक तेजी से जा सकती है. इसका मतलब यह भी है कि कुछ समय तक डार्क ईगल S-500 की रडार सीमा में रहती है. हालांकि, सिर्फ रडार में दिख जाना ही काफी नहीं है.

डार्क ईगल का ग्लाइड बॉडी जो अचानक ऊपर-नीचे जा सकता है, दाएं-बाएं मुड़ सकता है और बीच रास्ते में अपनी दिशा बदल सकता है. इतनी तेज रफ्तार में इसके अगले कदम का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिससे इसे रोकना चुनौतीपूर्ण बन जाता है. हाइपरसोनिक रफ्तार पर उड़ते समय डार्क ईगल के चारों ओर प्लाज्मा की चमकदार परत बन जाती है. यह परत रडार के लिए मुश्किल पैदा करती है और मिसाइल को साफ-साफ ट्रैक करना कठिन हो जाता है. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे घने कोहरे में तेज रफ्तार गाड़ी को पकड़ने की कोशिश.

S-500 कितना ताकतवर है?

S-500 प्रोमेथियस सिस्टम में कई तरह की इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं. इसमें 77N6 और 77N6-N1 जैसी मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 500 से 600 किलोमीटर तक बताई जाती है और इन्हें हाइपरसोनिक मिसाइल, आईसीबीएम और सैटेलाइट को मार गिराने के लिए बनाया गया है.

इसके अलावा 40N6M मिसाइल भी है, जिसकी रेंज करीब 400 किलोमीटर है. रूस के अनुसार, ये इंटरसेप्टर 4-5 सेकंड में ही Mach 16 की रफ्तार पकड़ सकते हैं.

फिर भी भरोसे की गारंटी क्यों नहीं?

सैन्य नियम सीधा है, इंटरसेप्टर को लक्ष्य से काफी तेज होना चाहिए. लेकिन यहां डार्क ईगल की रफ्तार Mach 10 से Mach 17 के बीच बताई जाती है, जबकि S-500 की इंटरसेप्टर मिसाइलें करीब Mach 16 तक जाती हैं. अगर लक्ष्य की रफ्तार बराबर या ज्यादा हो, तो उसे भरोसेमंद तरीके से मार गिराना मुश्किल हो जाता है. S-500 की मिसाइलों में एक्टिव रडार सीकर लगा होता है. इसका फायदा यह है कि मिसाइल आखिरी समय में खुद लक्ष्य को पहचान सकती है और उसकी चाल के हिसाब से दिशा बदल सकती है. इससे हाइपरसोनिक मिसाइलों के खिलाफ थोड़ी मजबूती जरूर मिलती है.

डार्क ईगल की सबसे खतरनाक ताकत

डार्क ईगल की सबसे बड़ी ताकत उसकी मोबिलिटी है. इसे मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है और भविष्य में इसे हवा से लॉन्च करने की क्षमता भी जोड़ी जा सकती है. इसका मतलब यह है कि रूस पहले से यह तय नहीं कर सकता कि हमला कहां से होगा. फिलहाल रूस के पास सिर्फ एक ही ऑपरेशनल S-500 सिस्टम है. भले ही भविष्य में और सिस्टम तैयार हों, लेकिन पूरे रूस के सभी अहम ठिकानों को कवर कर पाना आसान नहीं होगा. इसके अलावा, चलते हुए S-500 सिस्टम खुद भी हमले का निशाना बन सकते हैं.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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