'नेपाल ने भारत की जमीन कब्जाई है', बयान देकर घर में फंसे PM बालेन शाह; विदेश मंत्रालय ने दी सफाई

Nepal PM Balesn Shah India Border: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक बयान ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है. शाह ने कहा कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ स्थानों पर भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किया है. बयान के बाद नेपाल में ही विवाद शुरू हो गया. इस पर सरकार को सफाई देनी पड़ी.

Balen Shah Nepal India Border: भारत और नेपाल के बीच वर्षों से चले आ रहे सीमा विवाद पर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की एक टिप्पणी ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी भाारत की जमीन पर कब्जा किया है. संसद में दिए गए उनके बयान के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए. इस पर नेपाल के विदेश मंत्रालय को आधिकारिक सफाई जारी करनी पड़ी.

संसद में पहली बार बोले प्रधानमंत्री; दिया चौंकाने वाला बयान

इस वर्ष नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने बालेन शाह पहली बार अपने देश की संसद को संबोधित कर रहे थे. अपने भाषण के दौरान उन्होंने भारत और नेपाल के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर जारी सीमा विवाद का जिक्र किया. हालांकि, उन्होंने विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों को मित्रतापूर्ण बातचीत की सलाह दी, लेकिन इसी दौरान दिया गया उनका एक बयान चर्चा का विषय बन गया.

35 वर्षीय प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें एक ऐसी जानकारी मिली जिसने उन्हें भी हैरान कर दिया. उनके अनुसार, केवल भारत ने ही नेपाली क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारतीय भूमि पर कब्जा किया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद से तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए और फिर मित्र देशों की तरह बैठकर इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए. 

बालेन शाह ने संसद को बताया कि नेपाल ने सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों को चीन और ब्रिटेन के समक्ष भी उठाया है. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को इस पर रुचि लेनी चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा उसी समय का है, जब उन्होंने देश छोड़ा था. ब्रिटेन का उल्लेख उन्होंने क्षेत्र में उसके औपनिवेशिक इतिहास के संदर्भ में किया.

विपक्ष ने मांगा सबूत; बयान हटाने की उठी मांग

प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर नेपाल की राजनीति में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली. नेपाली कांग्रेस की बसना थापा और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के रमेश मल्ला समेत कई विपक्षी सांसदों ने बयान पर आपत्ति जताई. उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री या तो अपने दावे के समर्थन में प्रमाण पेश करें या फिर बयान वापस लें. पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने भी कथित तौर पर प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग की.

सीमा विशेषज्ञों ने भी जताई असहमति

नेपाल-भारत सीमा मामलों के विशेषज्ञ और भूगोलवेत्ता बुद्धि नारायण श्रेष्ठ ने प्रधानमंत्री के दावे को खारिज किया. उन्होंने कहा कि नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किए जाने का कोई उदाहरण नहीं है. हालांकि, उन्होंने माना कि कुछ सीमावर्ती इलाकों में सीमा स्तंभों के गायब होने और लोगों के आवागमन के कारण दोनों देशों के किसानों ने एक-दूसरे की जमीन का उपयोग किया है, लेकिन इसे सरकारी स्तर पर अतिक्रमण नहीं कहा जा सकता.

पूर्व राजदूत ने भी उठाए सवाल

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत नीलाम्बर आचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास नेपाल द्वारा भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किए जाने संबंधी कोई ठोस जानकारी नहीं है. उन्होंने बताया कि भारत और नेपाल के बीच लगभग 97 प्रतिशत सीमा विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं. कुछ इलाकों में सीमा स्तंभों के अभाव के कारण भूमि उपयोग में ओवरलैप हो सकता है, लेकिन नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्जे का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है.

विदेश मंत्रालय ने बाद में दी सफाई

प्रधानमंत्री के बयान के कुछ घंटों बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया. मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री का आशय यह नहीं था कि नेपाल ने आधिकारिक तौर पर भारतीय भूमि पर कब्जा कर लिया है. मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने सीमा क्षेत्र में मौजूद ‘नो मैन्स लैंड’ और दोनों देशों के लोगों द्वारा एक-दूसरे की जमीन के उपयोग से जुड़ी परिस्थितियों का उल्लेख किया था.

सफाई में कहा गया कि कुछ ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं जहां भारतीय नागरिकों द्वारा उपयोग की जा रही भूमि नेपाल की सीमा में आती हो और इसी तरह कुछ नेपाली नागरिक भारतीय क्षेत्र में स्थित भूमि का उपयोग कर रहे हों. मंत्रालय ने इसे ‘सीमा पार भूमि उपयोग’ और ‘क्रॉस-बॉर्डर ऑक्युपेशन’ से जुड़ा मामला बताया. विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें और सीमा संबंधी तंत्र सीमा स्तंभों की मरम्मत, निर्माण और दशगजा क्षेत्रों से जुड़े आंकड़े एकत्र करने का काम लगातार कर रहे हैं.

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कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भी बढ़ा था विवाद

प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ सप्ताह पहले ही नेपाल ने लिपुलेख मार्ग से होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल के अभिन्न हिस्से हैं. वहीं, भारत का कहना है कि ये इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं.

दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना दावा करते हैं. भारत, चीन और नेपाल के त्रि-जंक्शन के निकट स्थित ये क्षेत्र कई वर्षों से विवाद का केंद्र रहे हैं. जून 2021 में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सरकार ने नया राजनीतिक नक्शा जारी कर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया था.

भारत ने नेपाल के इस दावे को खारिज करते हुए इसे एकतरफा और कृत्रिम रूप से सीमा विस्तार का प्रयास बताया था. भारत का कहना है कि इन क्षेत्रों का समाधान द्विपक्षीय वार्ता के जरिए होना चाहिए.

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Published by: Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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