बगावत से पाकिस्तान पस्त, आठ माह में मारे गये 957 सुरक्षाकर्मी

पाकिस्तान में सशस्त्र विद्रोह के खिलाफ जारी अभियान सुरक्षा बलों के लिए लगातार जानलेवा साबित हो रहा है. साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (एसएटीपी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के पहले आठ महीनों में 957 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं. यानी हर महीने औसतन करीब 120 जवानों की जान गयी. यह आंकड़ा पिछले साल के औसत से करीब 18 फीसदी अधिक है. 2025 में हर महीने औसतन करीब 102 सुरक्षाकर्मी मारे गये थे.

आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान का आंतरिक सुरक्षा संकट लगातार गहराता जा रहा है और विद्रोही हिंसा के खिलाफ सेना की लड़ाई पहले से अधिक खूनी होती जा रही है. आंकड़े दर्शाते हैं कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी से जुड़े संघर्षों में सुरक्षा बलों की मौतें टीटीपी से जुड़े मामलों की तुलना में कहीं ज्यादा हैं. साल 2024 में बीएलए से जुड़ी घटनाओं में 151 और टीटीपी से जुड़े मामलों में 71 सुरक्षाकर्मी मारे गये थे.

साल 2025 में बीएलए से संघर्ष में 339 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी

साल 2025 में बीएलए से संघर्ष में 339 और टीटीपी के साथ 174 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई. इस साल सितंबर की शुरुआत तक बीएलए से जुड़े संघर्षों में 136 और टीटीपी से जुड़े मामलों में 87 सुरक्षाकर्मियों की मौतें सामने आयी हैं. हालांकि कई हमले अप्रत्यक्ष या अज्ञात श्रेणी में भी होते हैं. साफ है कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह दोनों ही पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं.

  • दो साल में 131% बढ़ीं मौतें
  • 2023 : 532 सुरक्षाकर्मी मारे गये
  • 2024 : यह संख्या बढ़कर 754 हुई, यानी 41.7% की वृद्धि
  • 2025 : मौतें 1,229 पहुंच गयीं, यानी एक साल में करीब 63% की बढ़ोतरी
  • 2026 : आठ महीनों में 957 सुरक्षाकर्मी मारे गये

कहां और क्यों हो रहे विद्रोह

पाकिस्तान में सुरक्षा बलों की यह मौतें मुख्य रूप से दो प्रमुख अंचलों- बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा- में केंद्रित हैं. बलूचिस्तान में अकेले 2025 में 751 और खैबर पख्तूनख्वा में 455 सुरक्षाकर्मी मारे गये थे. दोनों को मिलाकर कुल 1,206 मौतें इन दो प्रांतों में हुईं, जबकि पूरे देश का कुल आंकड़ा 1,229 था. इस साल अब तक अकेले बलूचिस्तान में 630 सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में यह संख्या 280 है. इस तरह इस साल अब तक लगभग 68 फीसदी सुरक्षा बलों की मौतें केवल बलूचिस्तान से सामने आयी हैं. यह पाकिस्तान की बदलती आंतरिक सुरक्षा स्थिति का सबसे बड़ा संकेत है. खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान मुख्य आतंकी चुनौती बना है.

दुनिया के नक्शे पर भारत के वोट से तिलमिलाया पाकिस्तान

संयुक्त राष्ट्र में दुनिया के नक्शे को लेकर आये एक प्रस्ताव पर भारत के समर्थन के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी फिर तेज हो गयी है. भारत ने चार सितंबर को अपनाये गये प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था. इसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ने यह भी साफ किया कि प्रस्ताव का जम्मू-कश्मीर, लद्दाख या किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा के राजनीतिक दर्जे से कोई लेना-देना नहीं है. इसके बावजूद अगले ही दिन पाकिस्तान ने भारत के रुख को निशाना बनाया और जम्मू-कश्मीर पर अपने पुराने दावे दोहरा दिये.


ये भी पढ़ें: 9/11 के संदिग्ध के अल-कायदा कनेक्शन के नए सबूत: FBI क्यों रही खामोश, सामने आए चौंकाने वाले वीडियो

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >