पाकिस्तान में अजब हाल! बढ़ती महंगाई में जनता खाना-पानी और बिजली पर उड़ा रही पैसा, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Pakistan Inflation: पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट ने आम परिवारों की जिंदगी मुश्किल कर दी है. एक नए सरकारी सर्वे के अनुसार, परिवार अब अपनी इनकम का दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ खाने और जरूरी चीजों पर खर्च कर रहे हैं. शिक्षा, हेल्थकेयर और बचत पर खर्च कम हो गया है, जबकि विदेशों से आने वाले पैसों पर निर्भरता बढ़ गई है.

By Govind Jee | January 3, 2026 6:24 PM

Pakistan Inflation: पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट ने आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है. हाल ही में जारी हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकॉनॉमिक सर्वे 2024-25 ने इस संकट की तस्वीर साफ दिखाई है. रिपोर्ट के अनुसार, अब परिवार अपनी आय का लगभग दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ खाने-पीने और बिजली जैसी जरूरी चीजों पर खर्च कर रहे हैं. इसका मतलब यह है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की बचत जैसी चीजों के लिए बहुत कम पैसा बचता है. यह स्थिति महंगाई और आर्थिक गलत प्रबंधन का असर दिखाती है, जैसा कि द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया है.

Pakistan Inflation in Hindi: खर्च बढ़ने की रफ्तार आमदनी से कहीं ज्यादा है

सर्वे बताता है कि खर्च बढ़ने की रफ्तार आमदनी से कहीं ज्यादा है. लगातार बढ़ती कीमतें और यूटिलिटी टैरिफ ने आम परिवारों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है. अब पाकिस्तानी परिवार कुल खर्च का लगभग 63% हिस्सा सिर्फ दो चीजों में खाना और घर के खर्च जैसे बिजली और गैस पर खर्च कर रहे हैं. खाने का हिस्सा अकेले 37% है, जबकि घर और यूटिलिटी का हिस्सा 26% है. यह दिखाता है कि परिवार अब केवल बुनियादी जरूरतों तक ही सीमित रह गए हैं.

शिक्षा पर खर्च में बड़ी गिरावट

सर्वे में यह भी सामने आया कि शिक्षा पर खर्च बेहद कम हो गया है. अब परिवार अपनी कुल बजट का सिर्फ 2.5% हिस्सा शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं, जो घर और यूटिलिटी खर्च का आधा से भी कम है. शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन पर कुल खर्च सिर्फ 7% है. यह मानव विकास और भविष्य की संभावनाओं के लिए चिंता का विषय है.

रेमिटेंस और बाहरी मदद पर बढ़ती निर्भरता

सर्वे यह भी दिखाता है कि ग्रामीण और शहरी परिवार विदेशों से भेजी गई धनराशि (रेमिटेंस) और बाहरी सहायता पर अधिक निर्भर हो रहे हैं. पिछले छह साल में रेमिटेंस की हिस्सेदारी आय में 5% से बढ़कर 8% हो गई है, जबकि उपहार और बाहरी मदद दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह घरेलू अर्थव्यवस्था के सिकुड़ने का संकेत है. (Pakistan Inflation Household Spending Food Electricity in Hindi)

आय बढ़ी लेकिन महंगाई ने पीछे छोड़ दिया

पिछले छह साल में औसत मासिक आय 41,500 रुपए से बढ़कर 82,000 रुपए हो गई है, लेकिन खर्च और महंगाई की दर इससे भी तेज़ी से बढ़ रही है. सर्वे के अनुसार, परिवारों के खर्च में लगभग 19% सालाना वृद्धि हुई है, जिससे उनकी वास्तविक क्रय शक्ति कम हो रही है. सर्वे से यह भी पता चला है कि अमीर और गरीब के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है. सबसे अमीर 20% परिवार अब सबसे गरीब 20% परिवार की तुलना में तीन गुना से ज्यादा कमाते हैं. इसका मतलब है कि आम लोग महंगाई और कमाई के बीच फंसकर मुश्किल हालात में हैं.

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