पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा भंडार में नया रिकॉर्ड बनाया है.11 सितंबर को देश का कुल विदेशी मुद्रा रिजर्व बढ़कर 26.79 अरब डॉलर हो गया. इसमें स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास 21.39 अरब डॉलर और वाणिज्यिक बैंकों के पास 5.40 अरब डॉलर हैं. हालांकि, रिजर्व में हुई यह तेज बढ़ोतरी सिर्फ निर्यात या देश की अपनी कमाई के कारण नहीं हुई है. रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में हुई इस बढ़ोतरी में, यूरोबॉन्ड से मिली रकम और दूसरे बाहरी वित्तीय स्रोतों की भी बड़ी भूमिका है.
तीन साल में 3 अरब डॉलर से 26 अरब डॉलर की छलांग
- पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए जनवरी 2023 पर नजर डालना जरूरी है.
- उस समय स्टेट बैंक (SBP) के पास विदेशी मुद्रा रिजर्व करीब 3.2 अरब डॉलर था, जबकि शुद्ध रिजर्व करीब 3.1 अरब डॉलर के आसपास रहा था. इसके बाद पाकिस्तान ने बाहरी वित्तीय सहायता, रेमिटेंस और विदेशी मुद्रा प्रवाह के जरिए अपने रिजर्व को धीरे-धीरे मजबूत किया.
- स्टेट बैंक ने भी 2023 में बताया था कि जनवरी के निचले स्तर से रिजर्व में सुधार हुआ था और इसमें गैर-कर्ज वाले विदेशी प्रवाह की भूमिका रही थी.
- 11 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में स्टेट बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार में 3.061 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 18.328 अरब डॉलर से बढ़कर 21.389 अरब डॉलर हो गया. स्टेट बैंक के मुताबिक, इस उछाल की मुख्य वजह पाकिस्तान को यूरोबॉन्ड से मिली रकम थी.
- इसका सीधा मतलब है कि एक हफ्ते में रिजर्व का 3 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ना पाकिस्तान की इतनी नई विदेशी कमाई नहीं है. इसमें उधार के जरिए जुटाई गई रकम भी शामिल है.
- 11 सितंबर 2026 तक पाकिस्तान का कुल लिक्विड विदेशी मुद्रा रिजर्व 26.791 अरब डॉलर था. इसमें 21.389 अरब डॉलर स्टेट बैंक के पास और 5.402 अरब डॉलर वाणिज्यिक बैंकों के पास थे. एक हफ्ते पहले देश का कुल रिजर्व 23.716 अरब डॉलर था.
ये भी पढ़ें: Video : US के पूर्व NSA ने कहा-धोखेबाज है पाकिस्तान...पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है!
रेमिटेंस से भी मिल रहा है डॉलर का सहारा
- पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा खाते को मजबूत करने में विदेशों में काम करने वाले पाकिस्तानियों की भेजी रकम यानी रेमिटेंस की भी अहम भूमिका है.
- स्टेट बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में पाकिस्तान को 3.66 अरब डॉलर की रेमिटेंस मिली. जुलाई में यह आंकड़ा करीब 3.63 अरब डॉलर था. यानी लगातार दूसरे महीने विदेशों से आने वाली रकम 3.6 अरब डॉलर से ऊपर रही.
लेकिन पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ
- रिजर्व बढ़ने के बावजूद पाकिस्तान के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. अगस्त 2026 में देश का चालू खाते का घाटा 9.8 करोड़ डॉलर रहा. जुलाई में यह घाटा 44.5 करोड़ डॉलर था.
- यानी बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार पाकिस्तान के लिए राहत जरूर है, लेकिन इसे अर्थव्यवस्था की सभी समस्याओं का समाधान नहीं माना जा सकता.
- रिजर्व को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए निर्यात बढ़ाना, रेमिटेंस का प्रवाह बनाए रखना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और बाहरी कर्ज की जरूरत को संभालना जरूरी होगा.
ये भी पढ़ें: सऊदी अरब पर हमले के लिए कौन दे रहा हूतियों को पैसा और हथियार?
विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से पाकिस्तान को क्या फायदा?
- विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का सीधा फायदा यह है कि पाकिस्तान जरूरत पड़ने पर इन पैसों से तेल, मशीनरी, कच्चा माल और दूसरी जरूरी चीजें विदेशों से खरीद सकता है.
- इसके अलावा पाकिस्तान को अपने विदेशी कर्ज की किस्त और ब्याज चुकाने के लिए भी डॉलर की जरूरत होती है. ज्यादा रिजर्व होने से इन भुगतानों को पूरा करने में कुछ राहत मिलती है.
- पाकिस्तान का मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार करीब तीन महीने के आयात खर्च के बराबर बताया जा रहा है.जिसका एक मतलब ये है पाकिस्तान अगले तीन महीने तक बिना कोई नया डॉलर कमाए आराम से काम चला सकता है.
- हालांकि यह पूरा सच नहीं है क्योंकि इसमें से बड़ा हिस्सा विदेशी देनदारियों और बाहरी ऋण से बंधा हुआ है.जिसे बाद में उसे चुकाना होगा.
