US में मादुरो का केस सुनने वाले 92 वर्षीय जज की उम्र कम, कुछ तो हैं और भी बूढ़े, लेकिन ऐसा क्यों?
Oldest Serving Judges in US: 92 वर्षीय एक अमेरिकी जज अचानक से चर्चा में आ गए, जब मैनहैटन की अदालत में वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़े मामले की सुनवाई उनके जिम्मे आई. उनकी उम्र जानने के बाद लोगों में काफी जिज्ञासा पैदा हुई है. भारत में जहां न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र तय है, वहीं अमेरिका में जज 80 और 90 की उम्र में भी न्यायिक पीठ पर बने रहते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अमेरिकी न्यायाधीश इतनी लंबी अवधि तक सेवा में क्यों बने रहते हैं?
Oldest Serving Judges in US: अमेरिका में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़ा मामला जिस जज के सामने पेश हुआ, उनकी उम्र जानकर बहुत-से लोग हैरान रह गए. 92 वर्षीय एल्विन हेलरस्टीन (Alvin Hellerstein) इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई कर रहे हैं. आम धारणा है कि उम्र बढ़ने के साथ समझ और विवेक भी परिपक्व होता है, और अमेरिकी न्याय व्यवस्था में इस सोच को गंभीरता से अपनाया गया है. यही वजह है कि अमेरिका में ऐसे कई जज हैं, जिनकी उम्र हेलरस्टीन से भी अधिक है. अमेरिकी जिला अदालतों, सर्किट अदालतों और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट तक में 90 से 99 वर्ष की आयु वाले न्यायाधीश सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं. इनमें एक जज ऐसे भी हैं, जिन्होंने सौ साल की उम्र पार कर ली है.
अमेरिका के सबसे उम्रदराज सक्रिय न्यायाधीश 101 वर्षीय आई. लियो ग्लासर (Leo Glasser) हैं, जो ब्रुकलिन के संघीय जज हैं. वर्ष 1924 में जन्मे ग्लासर आज भी न्यायिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. उनके बाद 98 वर्षीय पॉलिन न्यूमैन (Pauline Newman)का नाम आता है, जो सेवा अवधि के लिहाज से अमेरिका की सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाली सक्रिय संघीय न्यायाधीश हैं, ध्यान रहे कि वे महिला हैं. भले ही उन्हें फिलहाल नए मामलों की सुनवाई से अलग रखा गया हो, लेकिन वे अब भी औपचारिक रूप से न्यायिक पीठ का हिस्सा हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 92 वर्षीय एल्विन हेलरस्टीन इस समय अमेरिका के तीसरे सबसे उम्रदराज सक्रिय जज माने जाते हैं.
अमेरिका के अन्य वरिष्ठ सक्रिय जज
अमेरिका में वरिष्ठ न्यायाधीशों की सूची में 1935 में जन्मे एलन लूरी भी शामिल हैं, जिनकी उम्र लगभग 91 वर्ष है. वे फेडरल सर्किट की अमेरिकी अपीलीय अदालत में सीनियर जज के रूप में कार्यरत हैं. वहीं 1937 में जन्मे डेविड हर्ड (करीब 89 वर्ष) न्यूयॉर्क के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट में सीनियर अमेरिकी जिला न्यायाधीश हैं. जहां एलन लूरी ने बौद्धिक संपदा कानून को दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वहीं डेविड हर्ड नागरिक अधिकारों और पर्यावरण से जुड़े कई अहम मामलों की सुनवाई कर चुके हैं. एल्विन हेलरस्टीन भी मादुरो केस के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, 9/11 आतंकी हमलों और सूडान में हुए नरसंहार से जुड़े मामलों की सुनवाई कर चुके हैं.
हालांकि अमेरिका में कुछ वर्ग अत्यधिक उम्रदराज न्यायाधीशों की मानसिक क्षमता को लेकर सवाल उठाते हैं, लेकिन कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र के साथ आने वाला अनुभव, संतुलन और निष्पक्षता ऐसी विरासत है, जिसकी भरपाई आसान नहीं.
अमेरिका में जज आजीवन सेवा में क्यों रहते हैं?
अमेरिका में न्यायाधीशों के लंबे समय तक पद पर बने रहने का प्रमुख कारण यह है कि संघीय जजों की नियुक्ति आजीवन होती है और उनके लिए कोई अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु तय नहीं है. कई जज एक निश्चित उम्र के बाद ‘सीनियर स्टेटस’ अपना लेते हैं और सीमित मामलों की सुनवाई करते हुए भी सक्रिय रहते हैं. अमेरिकी प्रणाली वरिष्ठ जजों के अनुभव और परिपक्वता को इतना महत्व देती है कि उन्हें जीवनभर सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाती है. यह व्यवस्था सीधे अमेरिकी संविधान से जुड़ी हुई है, जहां किसी न्यायाधीश का कार्यकाल उसकी उम्र नहीं, बल्कि उसकी मानसिक दक्षता से तय होता है.
आजीवन नियुक्ति का संवैधानिक आधार
अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद-III के तहत संघीय न्यायाधीशों को आजीवन नियुक्ति दी जाती है, ताकि वे राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर निष्पक्ष फैसले कर सकें और उन्हें पद खोने का भय न हो. इस प्रणाली का लाभ यह है कि अनुभवी जज दशकों के अनुभव के आधार पर जटिल मामलों, जैसे संवैधानिक विवाद या अंतरराष्ट्रीय मसलों पर अधिक संतुलित और गहन निर्णय दे पाते हैं. आई. लियो ग्लासर और एल्विन हेलरस्टीन जैसे न्यायाधीशों का लंबा अनुभव उनके फैसलों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है.
क्या होता है ‘सीनियर स्टेटस’?
‘सीनियर स्टेटस’ अमेरिकी न्याय प्रणाली का वह प्रावधान है, जिसके चलते जज लंबे समय तक सक्रिय रह पाते हैं. कोई भी जज 65 वर्ष की उम्र के बाद, कम से कम 15 साल की सेवा पूरी करने पर, या फिर तब सीनियर स्टेटस चुन सकता है जब उसकी उम्र और सेवा अवधि का योग 80 हो जाए—इसे ‘रूल ऑफ 80’ कहा जाता है. इस स्थिति में जज कम मामलों की सुनवाई करते हैं, लेकिन उन्हें पूरा वेतन मिलता है और वे लंबित मामलों के बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इसे आंशिक सेवानिवृत्ति के रूप में देखा जाता है.
अन्य देशों में व्यवस्था कैसी है?
भारत में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि हाईकोर्ट के जज 62 वर्ष में. निचली अदालतों के जज भी राज्य नियमों के अनुसार 60 या 62 वर्ष तक ही सेवा में रहते हैं. ब्रिटेन में 2022 में जजों की सेवानिवृत्ति आयु 70 से बढ़ाकर 75 वर्ष कर दी गई, ताकि न्यायिक अनुभव का अधिक समय तक लाभ लिया जा सके, हालांकि वहां भी एक स्पष्ट सीमा तय है. इसके विपरीत चीन में नियम काफी सख्त हैं, पुरुष जज 60 वर्ष और महिला जज 55 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में अवधि बढ़ाई जा सकती है.
चीन की व्यवस्था में न्यायिक कार्यबल के नियमित नवीनीकरण पर जोर दिया जाता है. वहीं भारत में सेवानिवृत्ति के बाद कई जज ट्रिब्यूनल, आयोग, जांच समितियों में भूमिका निभाते हैं या मध्यस्थ के रूप में काम करते हैं. कुछ मामलों में उन्हें उच्च अदालतों में तदर्थ जज भी नियुक्त किया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से उन्हें सक्रिय न्यायाधीश नहीं माना जाता. भारतीय प्रणाली नियमित बदलाव को प्राथमिकता देती है, जिससे न्यायपालिका में नए दृष्टिकोण और ताजगी बनी रहती है.
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