जानिए कौन है मिन आंग लाइंग, जिन्हें म्यांमार में तख्तापलट के बाद मिली है सत्ता

म्यांमार (Myanmar) में सोमवार को सैन्य तख्तापलट (coup) के बाद मिंट स्वे को राष्ट्रपति नामित किया किया. राष्ट्रपति नामित किए जाने के तुरंत बाद मिंट स्वे ने देश के शीर्ष सैन्य कमांडर सीनियर जनरल मिन आंग लाइंग (Min Aung Hlaing) को सत्ता की कमान सौंप दी.

बैंकॉक : म्यांमार में सोमवार को सैन्य तख्तापलट के बाद मिंट स्वे को राष्ट्रपति नामित किया किया. राष्ट्रपति नामित किए जाने के तुरंत बाद मिंट स्वे ने देश के शीर्ष सैन्य कमांडर सीनियर जनरल मिन आंग लाइंग को सत्ता की कमान सौंप दी.

जनरल मिन आंग लाइंग वह व्यक्ति है जिसने 2007 में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई की और उनके साथ क्रूरता की. जनरल मिन आंग लाइंग ने उस वक्त सेना की कमान संभाली थी जब म्यांमार लोकतंत्र की ओर अग्रसर था. लाइंग ने खुद को एक राजनेता और सार्वजनिक व्यक्ति के रूप में परिवर्तित किया.

म्यांमार की सेना ने अगस्त 2017 में रखाइन प्रांत में एक अभियान चलाया था जिसमें रोहिंग्या मुस्लिमों को निशाना बनाया गया था. उस वक्त जनरल मिन की सेना पर रोहिंग्या मुस्लिम महिलाओं के साथ रेप और यौन हिंसा के आरोप लगे थे.

सेना ने सोमवार को देश की शीर्ष नेता आंग सान सू की और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद सेना ने मिंट स्वे को राष्ट्रपति नामित किया. इससे पहले वह सेना द्वारा नियुक्त उपराष्ट्रपति थे.

म्यांमार के 2008 में बने संविधान के तहत, आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति सैन्य कमांडर को सत्ता की कमान सौंप सकता है. लाइंग (64) 2011 से सैन्य बलों के कमांडर हैं और जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, यानी यदि जुंटा वादे के अनुसार एक साल में चुनाव कराता है तो उनके असैन्य नेतृत्व की भूमिका संभालने का रास्ता साफ हो जाएगा.

सेना ने यह कहकर तख्तापलट को सही ठहराया है कि सरकार चुनाव में धोखाधड़ी के उसके दावों पर कार्रवाई करने में नाकाम रही है. चुनाव में सेना के समर्थन वाली ‘यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डवलपमेंट पार्टी’ को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. एशिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के गेरार्ड मैकार्थी ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि इस बात का एहसास हो गया है कि मिन आंग लाइंग सेवानिवृत्त होने वाले हैं और उन्हें एक बड़ी भूमिका दिए जाने की संभावना है.

अमेरिका सरकार ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन में शामिल होने के कारण लाइंग को 2019 में काली सूची में डाल दिया था. लाइंग ने राखिने क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों के दौरान सेना का नेतृत्व किया था. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जांचकर्ताओं का कहना है कि अभियान के दौरान सेना की कार्रवाई के कारण रोहिंग्या समुदाय के करीब सात लाख लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा था.

स्वे ने 2017 में एक जांच का नेतृत्व किया था, जिसमें सेना पर लगे इन आरोपों को खारिज किया गया था और कहा गया था कि सेना ने वैध तरीके से काम किया. लाइंग म्यांमार के दर्जन से अधिक उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें 2008 में फेसबुक से हटा दिया गया था. उनका ट्विटर अकाउंट भी बंद कर दिया गया था. स्वे (69) पूर्व जुंटा नेता थान श्वे के निकट सहयोगी हैं. स्वे ने 2011 में अर्द्ध-सैन्य सरकार की शुरुआत के लिए सत्ता हस्तांतरण की अनुमति दी थी.

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इस सत्ता हस्तांतरण के बाद म्यांमार पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हट गए थे, जिनके कारण यह देश वर्षों तक अलग-थलग रहा था और विदेशी निवेश से वंचित रहा था. उल्लेखनीय है कि म्यांमार में सेना ने सोमवार को तख्तापलट कर दिया और शीर्ष नेता आंग सान सू की समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया. पांच दशकों तक सैन्य शासन में रहे इस देश में सैन्य तख्तापलट की दुनिया के विभिन्न देशों और संगठनों ने निंदा की है और हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा करने की मांग की है.

Posted By : Rajneesh Anand

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